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कोझिकोड रेलवे स्टेशन का करीब 130 साल पुराना ऐतिहासिक क्लॉक टावर अचानक भरभराकर ढह गया और उसका भारी मलबा सीधे प्लेटफॉर्म नंबर-2 व ओवरहेड बिजली लाइन पर जा गिरा. राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि उस वक्त प्लेटफॉर्म पर यात्री मौजूद नहीं थे और ट्रेन के दरवाजे भी बंद थे.

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130 साल पुराना क्लॉक टावर ढहा, कुछ मिनटों ने बचा दी सैकड़ों यात्रियों की जानZoom

कोझिकोड रेलवे स्टेशन के पास 130 साल पुराना क्लॉक टावर ढह गया.

कोझिकोड. केरल के कोझिकोड रेलवे स्टेशन पर गुरुवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. स्टेशन का करीब 130 साल पुराना ऐतिहासिक क्लॉक टावर अचानक भरभराकर गिर गया. टावर का भारी मलबा प्लेटफॉर्म नंबर-2 और ऊपर से गुजर रही बिजली की ओवरहेड लाइन पर आ गिरा. राहत की बात यह रही कि हादसे के समय वहां कोई यात्री मौजूद नहीं था, जिससे किसी तरह की जनहानि नहीं हुई.

यह घटना गुरुवार की सुबह हुई. उस समय टावर के पास मौजूद रेलवे कर्मचारियों ने इमारत को गिरते देखा और तुरंत वहां से हट गए. उनकी सतर्कता के कारण वे सुरक्षित बच निकले. हादसे के समय कोझिकोड-कन्नूर पैसेंजर ट्रेन, जो दोपहर 2:05 बजे रवाना होने वाली थी, प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर खड़ी थी. हालांकि ट्रेन के दरवाजे बंद थे और उसमें अभी यात्रियों की चढ़ाई शुरू नहीं हुई थी. इसी वजह से एक बड़ा हादसा टल गया.

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, प्लेटफॉर्म नंबर-2 और 3 के बीच स्थित क्लॉक टावर का एक हिस्सा और उसकी छत एक साथ गिर गई. मलबा गिरने से ओवरहेड बिजली की लाइनें भी क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे ट्रेन संचालन प्रभावित हुआ. इस घटना के बाद मंगलुरु-तिरुवनंतपुरम एरानाड एक्सप्रेस को देरी का सामना करना पड़ा. एहतियात के तौर पर रेलवे ने प्लेटफॉर्म नंबर-2 और 3 पर यात्रियों की आवाजाही रोक दी और पूरे क्षेत्र को खाली करा दिया.

प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि पिछले कई दिनों से हो रही लगातार भारी बारिश के कारण यह पुरानी इमारत कमजोर हो गई थी. गुरुवार सुबह भी कोझिकोड में तेज बारिश जारी थी, जिससे ढांचा और कमजोर पड़ गया. इस घटना ने रेलवे के पुराने ढांचों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अधिकारियों के अनुसार, इमारत में पहले से दरारें दिखाई दे रही थीं और यह भी माना जा रहा था कि उम्र के कारण इसकी हालत काफी खराब हो चुकी है. जानकारी के मुताबिक, रेलवे अधिकारियों ने गुरुवार सुबह ही क्लॉक टावर का निरीक्षण किया था और उसकी मरम्मत या सुरक्षा को लेकर चर्चा भी चल रही थी.

स्टेशन पर इन दिनों पुनर्विकास कार्य चल रहा है, जिसमें पाइलिंग का काम भी शामिल है. पहले भी यह चिंता जताई गई थी कि इन कार्यों से पैदा होने वाले कंपन (वाइब्रेशन) पुराने ढांचे को और कमजोर कर सकते हैं. आलोचकों का आरोप है कि बार-बार चेतावनी मिलने के बावजूद समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए. रेलवे को आशंका है कि क्लॉक टावर का बचा हुआ हिस्सा भी अस्थिर हो सकता है. इसी को देखते हुए स्टेशन पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है. प्रभावित क्षेत्र को पूरी तरह घेर दिया गया है और जब तक ढांचे को सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता, तब तक वहां आम लोगों के प्रवेश पर रोक रहेगी.

वहीं, स्थानीय विधायक मोहम्मद रियास ने पूरे कोझिकोड रेलवे स्टेशन का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है. उन्होंने कहा कि हाल ही में डिविजनल रेलवे मैनेजर (डीआरएम) ने भी इस स्थल का दौरा किया था और ऐतिहासिक इमारत की खराब हालत की जानकारी अधिकारियों को पहले से थी. इसके बावजूद न तो प्रभावी सुरक्षा उपाय किए गए और न ही लोगों की आवाजाही पर रोक लगाई गई. उन्होंने कहा कि यह केवल सौभाग्य की बात है कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

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