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राम मंदिर चंदा घोटाले के आरोपों को लेकर देश की सियासत लगातार गर्म है, लेकिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी की चुप्पी अब खुद एक बड़ा राजनीतिक सवाल बन गई है. इसी मुद्दे पर मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना साजिद रशीदी ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों पर निशाना साधते हुए दावा किया कि विपक्ष अब खुलकर ‘नरम हिंदुत्व’ की राजनीति की राह पर चल पड़ा है.
राहुल गांधी की चुप्पी को लेकर मौलाना रशीदी ने सवाल खड़े किए. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. राम मंदिर चंदा घोटाले के आरोपों पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आने को लेकर मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी अब नरम हिंदुत्व की राजनीति की ओर बढ़ रही हैं. दोनों दल ऐसे किसी विवादित मुद्दे पर बयान देने से बच रहे हैं जिससे हिंदू मतदाता नाराज़ हो सकते हैं. अब विपक्षी दल हिंदू वोटों को साधने की रणनीति अपना रहे हैं, इसलिए इस तरह के मामलों पर चुप्पी बनाए हुए हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सच जो भी हो, उसे बिना किसी राजनीतिक लाभ-हानि की परवाह किए सामने रखना चाहिए.
महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की कोशिशों पर भी मौलाना साजिद रशीदी ने अपनी राय जाहिर की. उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार राज्यों को यूसीसी लागू करने का अधिकार है. हालांकि, इसे लागू करने से पहले राज्य के सभी वर्गों और समुदायों की राय लेना आवश्यक है. यदि बिना व्यापक जन-परामर्श के यूसीसी लागू किया जाता है, तो यह उचित नहीं होगा. उन्होंने सरकारों से आग्रह किया कि मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का सम्मान किया जाए और किसी भी निर्णय से पहले सभी पक्षों की सहमति सुनिश्चित की जाए.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना ने कहा कि यह स्वीकार किया जा सकता है कि पहले की सरकारों के दौरान कुछ मुस्लिम युवा गलत रास्ते पर चले गए थे और अब उनमें बदलाव आया है. लेकिन उन्होंने सरकार के धार्मिक स्थलों पर खर्च को लेकर संतुलित नीति अपनाने की बात कही. यदि सरकार मंदिरों, कांवड़ यात्रा, दिवाली या तीर्थ यात्राओं पर सार्वजनिक धन खर्च करती है, तो कब्रिस्तानों की बाउंड्री वॉल जैसी बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए. सरकार को सभी धार्मिक समुदायों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए.
उत्तर प्रदेश में वक्फ कानून के तहत वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने के प्रस्ताव पर मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि यह मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए किसी भी तरह की जल्दबाज़ी उचित नहीं होगी. जब तक सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक सरकार को इंतजार करना चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अन्य धार्मिक संस्थाओं या मंदिर प्रबंधन समितियों में मुसलमानों को सदस्य नहीं बनाया जाता, तो वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है. यह एक बहुत बड़ा सवाल है.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें
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