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गौतम गंभीर सही हैं जब वह कहते हैं कि कुछ हार से भारत खराब टीम नहीं बन जाता बिल्कुल नहीं बनता, लेकिन इन हारों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट है, और यहां जो हो रहा है उसे अनदेखा कर यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि सब अपने आप ठीक हो जाएगा.
बचे हुए 2 मैचों में टीम इंडिया को बदलना होगा हाई-रिस्क, हाई-रिवॉर्ड प्लान
गौतम गंभीर सही हैं जब वह कहते हैं कि कुछ हार से भारत खराब टीम नहीं बन जाता बिल्कुल नहीं बनता, लेकिन इन हारों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट है, और यहां जो हो रहा है उसे अनदेखा कर यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि सब अपने आप ठीक हो जाएगा.
हाई रिस्क हाई-रिवार्ड थ्योरी
भारत टी20 क्रिकेट में हाई-रिस्क, हाई-रिवार्ड का खेल खेलता है लेकिन क्या यही तरीका हर परिस्थिति में अपनाया जा सकता है? क्या जो रणनीति भारतीय पिचों पर काम करती है, उसे इंग्लैंड जैसी परिस्थितियों में भी उसी तरह लागू किया जा सकता है, जहां गेंदबाजों को कहीं ज्यादा मदद मिलती है? क्या खेल की असली पहचान परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना नहीं है? ओपनिंग जोड़ी को ही देख लीजिएअभिषेक शर्मा ने जोफ्रा आर्चर की पहली ही गेंद पर आगे बढ़कर शॉट खेलने की कोशिश की. लगातार दो मैचों में ऐसा हुआ. मैनचेस्टर में वह बच गए, लेकिन नॉटिंघम में वही शॉट खेलते हुए आउट हो गए.
अगर आंकड़ों के लिहाज से देखें, तो क्या इंग्लैंड में आर्चर के खिलाफ ऐसा जोखिम उठाना फायदेमंद है या आउट होने की संभावना ज्यादा है? हाई-रिस्क, हाई-रिवार्ड का मतलब यह नहीं कि जोखिम इतना ज्यादा हो जाए कि रिवार्ड की संभावना ही कम हो जाए समस्या अप्रोच की है, और भारतीय बल्लेबाज परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढालने में नाकाम रहे हैं.
इंग्लिश बल्लेबाजों से सीखने की जरूरत
मैनचेस्टर में इंग्लैंड के मैच विनर जैकब बेथेल ने आदर्श पारी खेली. उन्होंने पहले खुद को सेट किया और फिर अंत में आक्रामकखेल दिखाया. क्या भारतीय बल्लेबाज ऐसा नहीं कर सकते? बिल्कुल कर सकते हैं. उनमें क्षमता है, लेकिन अब तक उन्होंने परिस्थितियों के अनुसार ढलने की इच्छा कम दिखाई है. इसे कोई एक खिलाड़ी नहीं बदल सकता. यह पूरी टीम की नाकामी है और इसे उसी तरह संबोधित करना होगा. क्रिकेट हमेशा से परिस्थितियों को समझकर खेलने का खेल रहा है. भारत ने यह लचीलापन नहीं दिखाया और इसकी कीमत चुकाई है. ऐसा लगता है जैसे बल्लेबाजों को खेलने का सिर्फ एक ही तरीका आता है—क्रीज पर आते ही पहली गेंद से हमला शुरू कर देना, भले ही इससे विपक्ष को मौका मिल जाए. कितने बल्लेबाजों ने पारंपरिक क्रिकेट शॉट्स खेले हैं? आक्रामक बल्लेबाजी का मतलब हमेशा बेधड़क शॉट लगाना नहीं होता, और यही बारीकियां भारत के खेल में नजर नहीं आई हैं.
फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है—द्विपक्षीय टी20 सीरीज प्राथमिकताओं में बहुत ऊपर नहीं होतीं—लेकिन यह जरूरी है कि टीम मैनेजमेंट अपनी गलतियों को स्वीकार करे. टीम में बदलाव और नए कप्तान पर भरोसा जताने के बाद अब खामियों को पहचानना, आत्ममंथन करना और सुधार करना बेहद जरूरी है. मैनेजमेंट अब आंखें मूंदकर नहीं बैठ सकता, क्योंकि अगर नतीजे नहीं सुधरे तो श्रेयस अय्यर और गौतम गंभीर पर दबाव लगातार बढ़ता जाएगा.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें
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