Last Updated:
Basmati Farming : मानसून की दस्तक के साथ धान की रोपाई शुरू हो गई है. बासमती धान किसानों के लिए हमेशा से मुनाफे का पिटारा रहा है. किसान भाई अगर थोड़ी सी सावधानी बरतें तो बंपर पैदावार पा सकते हैं. बासमती की रोगों से सुरक्षा के लिए कुछ कदम उठाने जरूरी हैं. इसे सबसे ज्यादा खतरा झंडा रोग से रहता है. शाहजहांपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान लोकल 18 से बताते हैं कि यह बीमारी बासमती 1509 किस्म को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है. संक्रमित पौधों में या तो बालियां बनती ही नहीं हैं. अगर किसी में बालियां आ भी जाएं, तो उनमें दाने नहीं पड़ते हैं. झंडा रोग का संक्रमण मुख्य रूप से बीज और मिट्टी के माध्यम से फैलता है. कृषि एक्सपर्ट डॉ. हादी हुसैन का मानना है कि रासायनिक खादों, विशेषकर यूरिया का अत्यधिक उपयोग भी इस बीमारी को बढ़ावा देता है.
शाहजहांपुर के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान लोकल 18 से बताते हैं कि झंडा रोग धान की फसल में लगने वाला एक विनाशकारी फंगस जनित रोग है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘बकाने बीमारी’ भी कहा जाता है. यह मुख्य रूप से फ्यूजेरियम मोनिलिफार्मी नामक फंगस के कारण फैलता है. इस रोग की पहचान यह है कि प्रभावित पौधे सामान्य पौधों की तुलना में काफी लंबे, पतले और पीले दिखाई देने लगते हैं. ये पौधे खेत में दूर से ही झंडे की तरह अलग नजर आते हैं, इसलिए इसे स्थानीय भाषा में झंडा रोग कहते हैं.
यह बीमारी बासमती 1509 किस्म को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है. रोग का हमला होने पर पौधे की जड़ों के पास से अतिरिक्त कल्ले निकलने लगते हैं, जो पूरी तरह कमजोर होते हैं. संक्रमित पौधों में या तो बालियां बनती ही नहीं हैं, और अगर किसी में बालियां आ भी जाएं, तो उनमें दाने नहीं पड़ते हैं. बालियां पूरी तरह खाली और सफेद रह जाती हैं. इससे पैदावार में 50 से 80 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आ सकती है.
झंडा रोग का संक्रमण मुख्य रूप से बीज और मिट्टी के माध्यम से फैलता है. इसलिए, इस बीमारी से बचाव का सबसे पहला और अचूक उपाय यही है कि स्वस्थ और प्रमाणित बीजों का चुनाव करें. किसानों को कभी भी संक्रमित खेत से लिए गए बीजों का उपयोग अगली फसल के लिए नहीं करना चाहिए. विश्वसनीय दुकान या सरकारी केंद्रों से खरीदे गए प्रमाणित बीज इस बीमारी के शुरुआती खतरे को काफी हद तक कम कर देते हैं.
Add News18 as
Preferred Source on Google
नर्सरी तैयार करते समय बीजोपचार करके इस बीमारी से बचा जा सकता है. बुआई से पहले बीजों को ट्राइकोडर्मा या कार्बेन्डाजिम जैसी रासायनिक दवा से उपचारित करना चाहिए. बीजों को दवा के घोल में निश्चित समय के लिए भिगोकर रखने से बीज की सतह और उसके भीतर मौजूद हानिकारक फंगस के बीजाणु पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं, जिससे स्वस्थ पौध तैयार होती है.
नर्सरी के प्रबंधन में पानी का सही निकास बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है. पौधशाला में लंबे समय तक जलभराव होने से मिट्टी में फंगस को पनपने के लिए अनुकूल माहौल मिल जाता है. अधिक नमी पाकर फंगस तेजी से सक्रिय होती है और छोटी पौध की जड़ों पर हमला कर देती है. इसलिए, नर्सरी में केवल जरूरत के अनुसार ही सिंचाई करें और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने का उचित प्रबंध रखें.
अगर नर्सरी में कुछ पौधों में झंडा रोग के लक्षण दिखाई देने लगें, तो उन्हें तुरंत उखाड़कर नष्ट कर देना चाहिए. संक्रमित पौधों को खेत के आसपास फेंकने के बजाय मिट्टी में दबा देना या जला देना बेहतर रहता है. ऐसा न करने पर फंगस के बीजाणु हवा और पानी के माध्यम से स्वस्थ पौधों में भी फैल जाते हैं. मुख्य खेत में रोपाई करते समय भी केवल स्वस्थ पौधों का ही चयन करना चाहिए.
रोपाई के समय अगर संक्रमित पौधों की छंटाई नहीं की गई, तो यह बीमारी मुख्य खेत में फैलकर महामारी का रूप ले लेती है. शुरुआत में किसान इस लंबे और तेजी से बढ़ते पौधे को स्वस्थ समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन बाद में यही पौधा पूरी फसल में संक्रमण फैलाता है. समय रहते ध्यान न देने पर पूरी मेहनत और लागत बेकार हो जाती है, जिससे किसानों को तगड़ा झटका लगता है.
कृषि एक्सपर्ट डॉ. हादी हुसैन का मानना है कि रासायनिक खादों, विशेषकर यूरिया का अत्यधिक उपयोग भी इस बीमारी को बढ़ावा देता है. यूरिया के अधिक इस्तेमाल से पौधे जरूरत से ज्यादा कोमल और संवेदनशील हो जाते हैं, जिससे उन पर फंगस का हमला आसान हो जाता है. संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करके और जैविक खादों को बढ़ावा देकर फसल की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है.
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



