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Agency:एजेंसियां

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Ahmedabad 2008 Blast Case: अहमदाबाद में 26 जुलाई 2008 को हुए सीरियल बम धमाकों ने पूरे देश को दहला दिया था. महज एक घंटे के अंतराल में एक के बाद एक 20 बम फटे थे. अस्‍पताल से लेकर मार्केट तक में भीषण तबाही मची थी. आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने इस हमले की जिम्‍मेदारी ली थी. गुजरात हाईकोर्ट ने इसी मामले में 38 दोषियों की फांसी और 11 के उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है.

अहमदाबाद धमाका: जब 20 बम धमाकों से दहला था देश, 1 घंटे में 57 की गई थी जानZoom

अहमदाबाद में 26 जुलाई 2008 को हुए सीरियल बम धमाके में 57 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि सैकड़ों अन्‍य घायल हो गए थे. इंडियन मुजाहिदीन ने इन धमाकों की जिम्‍मेदारी ली थी. (फोटो: Reuters)

Ahmedabad 2008 Blast Case: गुजरात की आर्थिक राजधानी अहमदाबाद में आज से तकरीबन 18 साल पहले सीरिल बम ब्‍लास्‍ट हुआ था. एक घंटे के अंतराल में ताबड़तोड़ 20 धमाके हुए थे. अस्‍पताल, पाब्लिक ट्रांसपोर्ट, मार्केट जैसे भीड़-भाड़ वाले इलाकों में बम फटने से 57 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि सैकड़ों की तादाद में लोग घायल हुए थे. इस मामले में अहमदाबाद की अदालत ने 49 लोगों को दोषी करार देते हुए उन्‍हें सजा सुनाई थी. कोर्ट ने 38 को फांसी और 11 को आजीवन कारावास की सजा दी थी. गुजरात हाईकोर्ट ने 7 जुलाई 2026 को इन सभी की सजा को बरकरार रखने का फैसला सुनाया है. बता दें कि 26 जुलाई 2008 को हुए अहमदाबाद ब्‍लास्‍ट धमाके की जिम्‍मेदारी इंडियन मुजाहिदीन ने ली थी. इस आतंकवादी हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था.

26 जुलाई 2008 को गुजरात के अहमदाबाद में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों को देश के सबसे बड़े आतंकी हमलों में से एक माना जाता है, जिसमें शहर के रिहायशी इलाकों, बाजारों, सार्वजनिक परिवहन और अस्पतालों समेत कई स्थानों पर करीब एक घंटे के भीतर 20 बम धमाके हुए थे. इसके अलावा कई जिंदा बम भी बरामद किए गए थे, जिन्हें समय रहते निष्क्रिय कर दिया गया था. धमाकों की जिम्मेदारी उस समय अपेक्षाकृत गुमनाम आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने कुछ मीडिया संस्थानों को ई-मेल भेजकर ली थी. बाद में संगठन पर कई आतंकी घटनाओं में शामिल होने के आरोप लगे. वर्ष 2010 में पुणे के जर्मन बेकरी विस्फोट के बाद (जिसमें 17 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे) केंद्र सरकार ने इंडियन मुजाहिदीन को प्रतिबंधित आतंकी संगठन घोषित कर दिया था.

78 आरोपियों पर चला था केस

अहमदाबाद ब्लास्ट मामले में कुल 78 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाया गया था. इनमें से एक आरोपी अयाज सैयद बाद में जांच एजेंसियों का सहयोगी बन गया था. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए 1,163 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए, जिससे यह देश के सबसे बड़े आपराधिक मुकदमों में से एक बन गया. अहमदाबाद की विशेष अदालत के स्‍पेशल जज एआर पटेल ने अपने फैसले में 28 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था. साथ ही अदालत ने धमाकों में जान गंवाने वाले पीड़ितों के परिजनों को एक-एक लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया.

सुरंग बनाकर फरार होने की साजिश

इस मामले की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण घटनाएं भी सामने आई थीं. वर्ष 2013 में अधिकारियों ने दावा किया था कि जेल में बंद कुछ आरोपियों ने सुरंग बनाकर फरार होने की साजिश रची थी, जिसे समय रहते विफल कर दिया गया था. अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामला भारतीय न्यायिक और जांच प्रणाली के सबसे लंबे और जटिल आतंकी मामलों में गिना जाता है, जिसकी सुनवाई और जांच कई वर्षों तक चली. इस मामले में अब हाईकोर्ट का फैसला आया है.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

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