एक भाषा की सुपरहिट फिल्म को अक्सर दूसरी भाषा में रीमेक किया जाता है, लेकिन सिर्फ 3 साल के अंदर एक ही कहानी पर आधारित दो ब्लॉकबस्टर फिल्में बनाना और दोनों का बॉक्स ऑफिस पर राज करना एक दुर्लभ रिकॉर्ड है. हम बात कर रहे हैं 2005 में रिलीज हुई तमिल फिल्म ‘गजनी’ और 2008 में रिलीज हुई इसी नाम की हिंदी फिल्म ‘गजनी’ की. इस अनोखे संयोग की सबसे दिलचस्प बात यह थी कि न सिर्फ दोनों फिल्मों की कहानी, बल्कि लीड एक्ट्रेस और मेन विलेन भी बिल्कुल एक जैसे थे, जिन्होंने दोनों बार दर्शकों को हैरान कर दिया.
नई दिल्ली. फिल्म इंडस्ट्री में रीमेक का ट्रेंड दशकों पुराना है, लेकिन 2005 से 2008 के बीच ‘गजनी’ ने जो इतिहास रचा, उसे आज भी याद किया जाता है. 2005 में डायरेक्टर एआर मुरुगादॉस ने तमिल सिनेमा में सूर्या के साथ मिलकर कल्ट थ्रिलर ‘गजनी’ बनाई. शॉर्ट-टर्म मेमोरी लॉस से परेशान एक बिजनेसमैन की यह कहानी, जो अपनी गर्लफ्रेंड की मौत का बदला लेना चाहता है, साउथ में ब्लॉकबस्टर बन गई.
इस कहानी की ताकत और नएपन को समझते हुए बॉलीवुड के ‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’ आमिर खान ने सिर्फ तीन साल बाद, 2008 में इसका हिंदी रीमेक बनाने का फैसला किया. डायरेक्टर मुरुगादॉस ने खुद हिंदी वर्जन का काम संभाला. जब फिल्म दिसंबर 2008 में रिलीज हुई, तो इसने पूरे देश में तहलका मचा दिया. सिर्फ तीन साल के छोटे से समय में, एक ही डायरेक्टर ने एक ही कहानी को दो अलग-अलग भाषाओं में पेश किया, जिससे दोनों बार बॉक्स ऑफिस पर तहलका मच गया.
इस रीमेक हिस्ट्री की सबसे अनोखी और दिलचस्प बात यह थी कि लीड रोल (सूर्या और आमिर खान) बदल गए, लेकिन फिल्म की जान माने जाने वाले दो सबसे जरूरी किरदार वैसे ही रहे. वे दो चेहरे थे लीड एक्ट्रेस असिन और मेन विलेन प्रदीप रावत. असिन ने ‘गजनी’ के तमिल वर्शन में कल्पना के चुलबुले और मासूम किरदार को जिंदा कर दिया. उनकी एक्टिंग और स्क्रीन प्रेजेंस इतनी पॉपुलर हुई कि आमिर खान ने हिंदी रीमेक के लिए किसी बॉलीवुड एक्ट्रेस के बजाय असिन को साइन करने पर जोर दिया. असिन ने अपने बॉलीवुड डेब्यू में ही इसी रोल से हिंदी दर्शकों का दिल जीत लिया.
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प्रदीप रावत ने फिल्म के खतरनाक विलेन ‘गजनी धर्मात्मा’ का रोल किया. उनके गुस्से और दमदार आवाज ने तमिल और हिंदी दोनों वर्शन में दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए. एक ही विलेन ने तीन साल के अंदर थिएटर में दो अलग-अलग सुपरस्टार्स का सामना किया और दोनों बार उसे बहुत अच्छे रिव्यू मिले. 2005 में रिलीज हुई तमिल फिल्म ‘गजनी’ सूर्या के करियर में एक बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुई. क्रिस्टोफर नोलन की हॉलीवुड फिल्म ‘मेमेंटो’ से प्रेरित होकर, फिल्म के इंडियन अडैप्टेशन को दर्शकों ने खूब पसंद किया. संजय रामासामी के रोल के लिए सूर्या ने शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की मुश्किलें झेलीं.
तमिल वर्जन में हैरिस जयराज का म्यूजिक था, जिसमें ‘सुट्टाम विली’ और ‘ओरु मलाई’ जैसे गाने उस जमाने के चार्टबस्टर बन गए थे. फिल्म ने न सिर्फ तमिलनाडु में बल्कि आंध्र प्रदेश और केरल में भी जबरदस्त कमाई की. असिन और सूर्या की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री आज भी साउथ इंडियन सिनेमा में सबसे अच्छी केमिस्ट्री में से एक मानी जाती है. फिल्म की जबरदस्त सफलता ने इसके हिंदी रीमेक का रास्ता बनाया.
अगर 2005 की फिल्म ने सूर्या को स्टार बनाया, तो 2008 की हिंदी ‘गजनी’ ने इंडियन बॉक्स ऑफिस का समीकरण हमेशा के लिए बदल दिया. आमिर खान का 8 पैक एब्स लुक और फिल्म के लिए उनका ‘गजनी कट’ हेयरस्टाइल उस दौर का एक बड़ा ट्रेंड-सेटर बन गया.
25 दिसंबर 2008 को रिलीज हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सुनामी ला दी थी. एआर रहमान के जादुई म्यूजिक (जैसे ‘गुजारिश’ और ‘बेहका’) ने फिल्म की पॉपुलैरिटी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया. इस फिल्म ने इंडियन सिनेमा के इतिहास में पहली बार ₹100 करोड़ का नेट बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पार किया, जिससे ‘100 करोड़ क्लब’ की शुरुआत हुई. आज बॉलीवुड में जो 100 करोड़, 200 करोड़ का खेल चलता है, उसकी नींव इसी फिल्म ने रखी थी.
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