Jodhpur News: जोधपुर के एमडीएम अस्पताल ने चिकित्सा सेवा के साथ मानवता का भी शानदार उदाहरण पेश किया है. अस्पताल की संवेदनशील पहल से एक बुजुर्ग व्यक्ति, जो करीब 28 वर्षों से अपने परिवार से बिछड़ा हुआ था, आखिरकार अपने परिजनों से मिल सका. अस्पताल में इलाज के दौरान जब बुजुर्ग की पहचान और पारिवारिक जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया, तो चिकित्सकों और स्टाफ ने लगातार प्रयास कर उसके परिवार का पता लगाया. लंबे समय बाद अपने परिजनों से मिलते ही भावुक माहौल बन गया और परिवार की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े. एमडीएम अस्पताल की इस पहल की हर ओर सराहना हो रही है. यह घटना साबित करती है कि अस्पताल केवल इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि इंसानियत और संवेदनशीलता का भी प्रतीक है.
जोधपुर: कभी-कभी अस्पताल सिर्फ इलाज का केंद्र नहीं होता, बल्कि बिछड़े रिश्तों को फिर से जोड़ने की उम्मीद भी बन जाता है. जोधपुर के एमडीएम अस्पताल के वृद्धजन वार्ड में ऐसा ही एक भावुक पल देखने को मिला, जब 28 साल पहले घर छोड़कर निकले इंदौर (मध्यप्रदेश) निवासी मदन सिंह वर्मा आखिरकार अपने परिवार से मिल गए. पिछले महीने तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पाली से एमडीएम अस्पताल रेफर किया गया, जहां अस्पताल अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित के निर्देशन में डॉ. नवीन किशोरिया की यूनिट तथा डॉ. हरीश अग्रवाल और डॉ. प्रतिमा चौहान की देखरेख में उनका निशुल्क उपचार शुरू किया गया. इलाज के साथ-साथ अस्पताल प्रशासन ने उनकी पहचान और परिजनों की तलाश का जिम्मा भी उठाय.
एमडीएम अस्पताल में भर्ती होने के बाद डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने केवल इलाज तक ही अपनी जिम्मेदारी सीमित नहीं रखी. अस्पताल अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित के निर्देशन में डॉ. नवीन किशोरिया की यूनिट, डॉ. हरीश अग्रवाल, डॉ. प्रतिमा चौहान तथा वृद्धजन वार्ड के स्टाफ ने मरीज की पहचान और उनके परिवार तक पहुंचने का बीड़ा उठाया. वार्ड इंचार्ज अरशद कुरैशी और नर्सिंग कर्मियों ने लगातार प्रयास करते हुए मदन सिंह वर्मा के पुत्र का पता लगाया और उनसे संपर्क कर जोधपुर बुलाया. आखिरकार 28 साल से बिछड़े बुजुर्ग को उनके परिवार से मिलाने का सपना साकार हो गया.
28 साल बाद पिता-पुत्र का मिलन, पहली बार देखा अपना पौत्र
‘इंसानियत ही सबसे बड़ी सेवा’ परिवार ने जताया आभार अपने पिता को सकुशल वापस पाकर परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मदन सिंह वर्मा के पुत्र ने अस्पताल अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित, डॉ. प्रतिमा चौहान, वार्ड इंचार्ज अरशद कुरैशी सहित सभी डॉक्टरों, नर्सिंग कर्मियों और अस्पताल स्टाफ का भावुक होकर धन्यवाद व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि इलाज तो कई जगह मिलता है, लेकिन इंसानियत और संवेदनशीलता हर किसी के हिस्से में नहीं होती. एमडीएम अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों की बदौलत आज उनका परिवार 28 साल बाद फिर से एक हो सका. उन्होंने इसे भगवान की कृपा और अस्पताल की मानवीय सेवा का सबसे बड़ा उदाहरण बताया.
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