Success story: अमित वर्मा बताते हैं कि उनके पिता कई वर्षों से दशहरी आम की बागवानी करते थे. उनके निधन के बाद उन्होंने बाग की पूरी जिम्मेदारी संभाली. शुरुआत में कई चुनौतियां आईं, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने बागवानी की बारीकियां सीखीं और आधुनिक तरीके अपनाए. आज उनके बाग में हजारों आम के पेड़ हैं, जो हर साल बेहतर उत्पादन देते हैं. किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी अपनाने के लिए उद्यान विभाग लगातार प्रोत्साहित कर रहा है विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत पौधरोपण, सिंचाई और रखरखाव के लिए अनुदान भी दिया जा रहा है इसका सकारात्मक असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है.
लखीमपुर खीरी: जिले में केवल गन्ने की खेती के लिए ही नहीं, बल्कि अब बागवानी के क्षेत्र में भी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है. किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी अपनाने के लिए उद्यान विभाग लगातार प्रोत्साहित कर रहा है विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत पौधरोपण, सिंचाई और रखरखाव के लिए अनुदान भी दिया जा रहा है इसका सकारात्मक असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है. जिले के कई किसान आम, अमरूद, नींबू, आंवला और अन्य फलदार पौधों की खेती कर अच्छी आय अर्जित कर रहे है.
इन्हीं किसानों में शामिल हैं लखीमपुर खीरी के प्रगतिशील किसान अमित वर्मा, जिन्होंने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए आम की बागवानी को ही अपना मुख्य व्यवसाय बना लिया है उनके पास लगभग 9 एकड़ में दशहरी आम का बाग है पिता के निधन के बाद उन्होंने पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली और आज मेहनत व आधुनिक तकनीकों के दम पर लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं.
पिता की विरासत को बनाया सफलता की कहानी
अमित वर्मा बताते हैं कि उनके पिता कई वर्षों से दशहरी आम की बागवानी करते थे. उनके निधन के बाद उन्होंने बाग की पूरी जिम्मेदारी संभाली. शुरुआत में कई चुनौतियां आईं, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने बागवानी की बारीकियां सीखीं और आधुनिक तरीके अपनाए. आज उनके बाग में हजारों आम के पेड़ हैं, जो हर साल बेहतर उत्पादन देते हैं. अमित वर्मा के अनुसार दशहरी आम अपनी मिठास, खुशबू और स्वाद के कारण देशभर में काफी पसंद किया जाता है. गर्मियों के मौसम में इसकी मांग लगातार बनी रहती है. स्थानीय मंडियों के अलावा व्यापारी सीधे बाग पर आकर आम खरीद लेते हैं, जिससे किसानों को बाजार खोजने की परेशानी भी नहीं होती है.
बागवानी के लिए प्रोत्साहित कर रही सरकार
उत्तर प्रदेश सरकार का उद्यान विभाग किसानों को बागवानी के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है. विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत फलदार पौधों के रोपण पर अनुदान, ड्रिप सिंचाई, पौध संरक्षण और तकनीकी सलाह उपलब्ध कराई जाती है। विभाग समय-समय पर प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित करता है, जिससे किसान नई तकनीकों की जानकारी प्राप्त कर सकें. खीरी में पिछले कुछ वर्षों में बागवानी का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है. आम, अमरूद, पपीता, केला और आंवला जैसी फसलों की खेती किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही है. उद्यान विभाग भी किसानों को नई तकनीकों और उन्नत पौध सामग्री उपलब्ध कराकर उत्पादन बढ़ाने का प्रयास कर रहा है
रोजगार का भी बन रहा साधन
बागवानी केवल किसानों की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का बड़ा माध्यम भी बन रही है। आम के बागों में पौधरोपण, सिंचाई, निराई-गुड़ाई, छंटाई, दवा का छिड़काव और तुड़ाई जैसे कार्यों में बड़ी संख्या में मजदूरों को रोजगार मिलता है. आम की पैकिंग और परिवहन में भी स्थानीय लोगों को काम मिलता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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