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गाजीपुर के किसानों में एक अलग ही होड़ देखने को मिल रही है. यहां कोई एक यूरिया बैग डाल रहा हैं खेत में तो कोई दो-दो. ये बिना जांच किए कि क्या यह सही है खेतों के लिए. ऐसे में मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंच रहा है. मगर, अब कृषि वैज्ञानिकों ने कमर कस ली है. खेत बचाओ अभियान चलाया जा रहा है.

गाजीपुर: खेतों की घटती उर्वरता और रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए गाजीपुर में ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जा रहा है. इस अभियान का उद्देश्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक करना है, ताकि मिट्टी की सेहत सुधरे और भविष्य की खेती सुरक्षित रह सके.

अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिक गांव-गांव पहुंचकर किसानों को बता रहे हैं कि अधिक मात्रा में यूरिया, डीएपी और रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग उत्पादन बढ़ाने की गारंटी नहीं है. इसके उलट, इनका लगातार अत्यधिक उपयोग मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचाता है और उसमें मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीवों की संख्या घटा देता है.

किसानों में लगी है ज्यादा खाद डालने की होड़
कृषि विशेषज्ञों डॉ. ओमकार सिंह का कहना है कि गांवों में अक्सर यह धारणा देखने को मिलती है कि यदि एक किसान एक बोरी यूरिया या डीएपी डाल रहा है, तो दूसरा किसान उससे अधिक डालने की कोशिश करता है. कई किसान मानते हैं कि ज्यादा खाद डालने से पैदावार बढ़ेगी, जबकि वैज्ञानिकों के अनुसार इसका उल्टा असर भी हो सकता है.

70 से अधिक गांवों में पहुंचा अभियान
अब तक अभियान की टीम करीब 70 गांवों में पहुंचकर कृषि गोष्ठियों का आयोजन कर चुकी है. इन कार्यक्रमों में किसानों को संतुलित पोषण प्रबंधन, मृदा परीक्षण, जैविक विकल्प और रसायनों के विवेकपूर्ण उपयोग की जानकारी दी जा रही है. इस अभियान में कृषि विज्ञान केंद्र, पीजी कॉलेज कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र आंकुशपुर, उद्यान विभाग और मत्स्य विभाग सहित कई संस्थान मिलकर काम कर रहे हैं.

मिट्टी के साथ इंसानी स्वास्थ्य भी चिंता का विषय
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि खेतों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग केवल मिट्टी ही नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है. फलों, सब्जियों और अनाज में रासायनिक अवशेष बढ़ने से लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए संतुलित खेती और मृदा संरक्षण समय की आवश्यकता है

किसानों ने दिखाई रुचि
अभियान के दौरान बड़ी संख्या में किसान गोष्ठियों में शामिल हो रहे हैं और वैज्ञानिकों की सलाह ध्यान से सुन रहे हैं. किसानों का कहना है कि अब उन्हें भी समझ में आने लगा है कि मिट्टी की सेहत ही खेती और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तय करेगी.

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काव्‍या मिश्रा

Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें

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