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Azamgarh News: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए जिला प्रशासन ने एक अनोखी और बेहद मुनाफे वाली स्कीम शुरू की है. इसके तहत महिलाएं गौशालाओं से सिर्फ 50 पैसे प्रति किलो में गोबर खरीदकर वैज्ञानिक तरीके से केंचुआ खाद तैयार कर रही हैं, जिसे ग्राम पंचायतें 10 रुपये प्रति किलो की दर से खरीद रही हैं. खास बात यह है कि इस साल जिले में होने वाले बड़े वृक्षारोपण अभियान के लिए करीब 27 लाख किलो खाद की जरूरत है, जिसकी सप्लाई का पूरा जिम्मा इन महिलाओं को मिला है. इससे महिलाओं को करीब 2.37 करोड़ रुपये की बंपर कमाई होने की उम्मीद है.

आजमगढ़: सरकार द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके स्वावलंबन के लिए कई तरह की योजनाओं का संचालन किया जा रहा है. इसी के अंतर्गत आजमगढ़ जिला प्रशासन के द्वारा एक नई पहल शुरू की गई है, जिसमें स्वयं सहायता समूह (SHG) महिलाओं की नई सफलता की कहानी लिख रहा है और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रहा है.

स्वयं सहायता समूह की मदद से महिलाएं विभिन्न तरह के स्वरोजगार से जुड़कर अपने साथ-साथ अपने परिवार को भी आर्थिक रूप से मजबूत कर रही हैं. इसी के तहत आजमगढ़ जिले में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं गोबर का इस्तेमाल करते हुए अपने घर में ही वर्मी कंपोस्ट तैयार कर रही हैं और उन्हें ग्राम पंचायत में बेचकर अच्छा मुनाफा भी कमा रही हैं.

प्रशासन दे रहा ट्रेनिंग और मार्केट सपोर्ट
उपायुक्त स्वतः रोजगार (ग्रामीण आजीविका मिशन) आजमगढ़, डॉ. आराधना त्रिपाठी ने बताया कि जिला प्रशासन के द्वारा जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को स्वयं सहायता समूह के माध्यम से गोबर का इस्तेमाल करते हुए वर्मी कंपोस्ट तैयार करने की ट्रेनिंग उपलब्ध कराई जा रही है. प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये महिलाएं अपने घरों या गांवों में ही रहकर इस जैविक खाद का निर्माण कर रही हैं.

सबसे खास बात यह है कि इस उत्पाद को बनाने के लिए उनकी लागत भी बेहद कम आ रही है और प्रशासन के द्वारा उन्हें इसे बेचने के लिए मार्केट भी उपलब्ध कराया जा रहा है. वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के लिए महिलाओं को ग्राम पंचायत की अस्थाई और स्थाई गौशालाओं से सीधे तौर पर जोड़ा जा रहा है. इन महिलाओं को मात्र 50 पैसे प्रति किलोग्राम के हिसाब से इन गौशालाओं से गोबर उपलब्ध कराया जाता है.

खाद की बिक्री का पैसा सीधे बैंक खाते में
इस गोबर की मदद से वैज्ञानिक तरीके को अपनाते हुए वर्मी कंपोस्ट तैयार किया जाता है. पूरी तरह से तैयार होने के बाद यह वर्मी कंपोस्ट उसी ग्राम पंचायत को ₹10 प्रति किलो की दर से बेच दिया जाता है. इसके बदले में ग्राम पंचायत के द्वारा खाद की बिक्री का पैसा सीधे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के बैंक खाते में भेजा जाता है, जिससे भुगतान में पारदर्शिता भी बनी रहती है और इसका सीधा लाभ समूह से जुड़ी महिलाओं को प्राप्त हो रहा है. वहीं महिलाओं के द्वारा तैयार किए गए इस वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल विभिन्न विभागों के द्वारा रोपे जाने वाले पौधों में किया जाएगा.

महिलाओं और गौशालाओं को होगा मुनाफा 
आजमगढ़ जनपद में इस बार कुल 27 लाख 13 हजार 713 पौधे लगाए जाने हैं, जिसके लिए हर पौधे के लिए 1 किलो खाद की आवश्यकता होगी. ऐसे में जनपद को कुल 27 लाख किलोग्राम खाद की जरूरत होगी, जिसकी पूर्ति करने का जिम्मा जनपद की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को सौंपा गया है. इससे न केवल पर्यावरण को फायदा होगा, बल्कि यह समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट के तहत वर्मी कंपोस्ट उत्पादन और ग्राम पंचायत को इसकी आपूर्ति करने से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को लगभग 2.37 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त होगी. वहीं दूसरी ओर, इससे गौशालाओं को भी आर्थिक रूप से लाभ पहुंचेगा. गोबर की बिक्री से गौशालाओं को भी लगभग 32.30 लाख रुपये की अतिरिक्त आय मिलेगी.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें

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