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सिर्फ दो हफ्ते पहले, भारत को अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट में नंबर-3 के लिए पडिक्कल और साई सुदर्शन में से किसी एक को चुनना था. गर्मियों में बेहतर फॉर्म में होने के बावजूद टीम मैनेजमेंट ने सुदर्शन पर भरोसा जताया. गौतम गंभीर ने साफ किया कि खराब शुरुआत के बाद सुदर्शन को लंबा मौका मिलना चाहिए
श्रीलंका ए के खिलाफ साई सुदर्शन ने खेली शतकीय पारी, फेल हो गए देवदत्त पड्डीकल
सिर्फ दो हफ्ते पहले, भारत को अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट में नंबर-3 के लिए पडिक्कल और साई सुदर्शन में से किसी एक को चुनना था. गर्मियों में बेहतर फॉर्म में होने के बावजूद टीम मैनेजमेंट ने सुदर्शन पर भरोसा जताया. गौतम गंभीर ने साफ किया कि खराब शुरुआत के बाद सुदर्शन को लंबा मौका मिलना चाहिए. सुदर्शन ने इस भरोसे को सही साबित करते हुए संयमित 81 रन बनाए. भले ही वह शतक से चूक गए, लेकिन इस पारी ने उन्हें नंबर-3 पर और मौके दिला दिए एक ऐसी पोजिशन जो चेतेश्वर पुजारा के बाहर होने के बाद से भारत के लिए चुनौतीपूर्ण रही है. अब श्रीलंका के खिलाफ शतकीय पारी ने उनकी जगह को मजबूत कर दिया है.
साई सुदर्शन की जगह पक्की होती नजर आ रही है
पडिक्कल के मुकाबले साई सुदर्शन पहले से ही चयन की कतार में आगे थे भले ही पडिक्कल शतक या बड़ा स्कोर बना लेते, तब भी सुदर्शन उनसे आगे ही रहते लेकिन इस शतकीय पारी ने पडिक्कल को और पीछे धकेल दिया है. साई सुदर्शन इस मैच में ओपनर के रूप में खेले, वहीं पडिक्कल को नंबर-3 की भूमिका मिली फिर भी वह असफल रहे. दूसरी ओर, सुदर्शन ने गॉल में इसी मैच में शानदार शतक जड़ दिया. अब जब भारत श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज (WTC चक्र) के लिए जाएगा, तो सुदर्शन ने अपनी जगह लगभग पक्की कर ली है. अब उनके पास आत्मविश्वास भी होगा कि टीम मैनेजमेंट ने उन पर निवेश किया है . साई ने 113 गेंदों पर अपना शतक पूरा किया और अपना दावा भी मजबूत किया.
पडिक्कल पिछड़ते जा रहे है.
गॉल में पड्डीकल ने आक्रामक शुरुआत की पहली ही गेंद पर चौका और अगले ओवर में शानदार छक्का लगाया लेकिन जैसे ही लग रहा था कि वह सेट हो रहे हैं, उन्होंने अपनी पारी फेंक दी और सिर्फ 7 गेंदों में 12 रन बनाकर लौट गए. इस आउट होने का दर्द इसलिए और ज्यादा है क्योंकि पिछले आठ महीनों में पडिक्कल ने जो प्रदर्शन किया था, वह शानदार रहा है. बहुत कम भारतीय बल्लेबाज ऐसे थे जिन्होंने इस दौर में उनसे बेहतर प्रदर्शन किया हो. रणजी ट्रॉफी में वह कर्नाटक के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज रहे, जहाँ उन्होंने 54.30 की औसत से 543 रन बनाए, जिसमें सेमीफाइनल में दोहरा शतक भी शामिल था लेकिन विजय हजारे ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन असाधारण रहा, जहाँ उन्होंने सिर्फ नौ पारियों में 90.63 की औसत से 725 रन बनाए. आरसीबी के लिए खेलते हुए पडिक्कल ने अपने खेल में जबरदस्त बदलाव किया और इस साल के सबसे ज्यादा सुधरे हुए खिलाड़ियों में शामिल रहे। उन्होंने 464 रन बनाए, वह भी करीब 170 के स्ट्राइक रेट से. ऐसी निरंतरता आमतौर पर मौके दिलाती है लेकिन भारतीय क्रिकेट हमेशा सिर्फ फॉर्म के आधार पर फैसले नहीं लेता कई बार यह उस खिलाड़ी को तरजीह देता है, जिस पर मैनेजमेंट का भरोसा ज्यादा होता है और फिलहाल सुदर्शन इसी स्थिति में हैं.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें
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