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आयुर्वेद बीमारियों के इलाज के साथ आयु का संरक्षण, पंचकर्म से मिल रहा नया जीवन, जीवनशैली और बढ़ती बीमारियों के बीच आज लोग फिर से आयुर्वेद की ओर रुख कर रहे हैं. बरेली के श्री विश्वहरि आयुर्वेदीय चिकित्सालय एवं पंचकर्म केंद्र की वैद्य डॉ. मनीषा कनौजिया ने बताया कि आयुर्वेद केवल रोगों का उपचार नहीं, बल्कि स्वस्थ और दीर्घायु जीवन जीने की संपूर्ण विज्ञान प्रणाली है.

बरेली: आयुर्वेद बीमारियों के इलाज के साथ आयु का संरक्षण, पंचकर्म से मिल रहा नया जीवन, जीवनशैली और बढ़ती बीमारियों के बीच आज लोग फिर से आयुर्वेद की ओर रुख कर रहे हैं. बरेली के श्री विश्वहरि आयुर्वेदीय चिकित्सालय एवं पंचकर्म केंद्र की वैद्य डॉ. मनीषा कनौजिया ने बताया कि आयुर्वेद केवल रोगों का उपचार नहीं, बल्कि स्वस्थ और दीर्घायु जीवन जीने की संपूर्ण विज्ञान प्रणाली है.

आयुर्वेद के अनुसार शरीर में वात, पित्त और कफ तीन दोष होते हैं. इनके असंतुलन से बीमारियां उत्पन्न होती हैं. इन्हें संतुलित करने के लिए पंचकर्म चिकित्सा को सबसे प्रभावी माना जाता है. पंचकर्म की पांच प्रमुख क्रियाएं वमन, विरेचन, बस्ती, नस्य और रक्तमोक्षण शरीर की गहन शुद्धि कर रोगों की जड़ तक पहुंचने का कार्य करती हैं.

इन बीमारियों में मिलती है राहत

विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण भारत, खासकर केरल, पंचकर्म चिकित्सा का प्रमुख केंद्र माना जाता है. उपचार से पहले स्नेहन और स्वेदन जैसी प्रक्रियाओं द्वारा शरीर को तैयार किया जाता है. जिसके बाद रोग और प्रकृति के अनुसार पंचकर्म किया जाता है. वैद्य डॉ. मनीषा कनौजिया ने लोकल 18 को बताया कि बस्ती चिकित्सा कमर दर्द, घुटनों के दर्द, गठिया, साइटिका और अन्य वात रोगों में विशेष रूप से लाभकारी है.वर्षा ऋतु में बस्ती कराने को सबसे उपयुक्त माना जाता है. क्योंकि यह शरीर में जमा विकारों को दूर कर कई बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद करती है.

लोगों के बीच लोकप्रिय हो रही आयुर्वेदिक थेरेपी

वैद्य डॉ. मनीषा बताती है आयुर्वेद में जोड़ों और हड्डियों के रोग, पाचन संबंधी समस्याएं, तनाव, अनिद्रा, त्वचा रोग, मोटापा, मधुमेह और महिलाओं की हार्मोनल समस्याओं जैसी अनेक पुरानी बीमारियों के प्रबंधन पर विशेष कार्य किया जाता है. वहीं शिरोधारा, पिझिचिल और किझि जैसी पारंपरिक आयुर्वेदिक थेरेपी भी लोगों के बीच लोकप्रिय हो रही हैं. वैद्य मनीषा का कहना है कि आयुर्वेद व्यक्ति की प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार उपचार देता है. इसलिए किसी भी रोग में स्वयं दवा लेने के बजाय योग्य आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श और नाड़ी परीक्षण कराना आवश्यक है.

गीता देवी बताती हैं कि पहले उन्हें चलने-फिरने और पैर उठाने में काफी परेशानी होती थी. लेकिन आयुर्वेदिक उपचार के बाद उनकी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है.उनका कहना है कि अब वह पहले की तुलना में आसानी से चल-फिर पा रही हैं और उन्हें काफी राहत महसूस हो रही है. उन्होंने लोगों से आयुर्वेदिक चिकित्सा पर भरोसा करने और विशेषज्ञ वैद्य की सलाह लेने की अपील भी की.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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