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NCERT Class 6 Textbook Controversy: छठी क्लास की नई कन्नड़ किताब पर विवाद छिड़ा हुआ है. इसे लेकर सोशल मीडिया पर कई दावे किए जा रहे थे. अब इस मामले पर NCERT ने सफाई जारी की है. किताब से ‘कृष्णा’ नाम और नॉन-वेज खाने का जिक्र हटाने के आरोप लगे थे. बोर्ड ने इन दावों को भ्रामक बताया है.

कन्नड़ किताब पर क्यों मचा बवाल? 'कृष्णा' और नॉन-वेज पर NCERT ने दी सफाईZoom

NCERT Class 6 Kannada Book Controversy: एनसीईआरटी की नई किताबों को लेकर विवाद जारी है

नई दिल्ली (NCERT Class 6 Textbook Controversy). स्कूली किताबों के सिलेबस और उनमें छपने वाले कंटेंट को लेकर अक्सर बहस छिड़ जाती है. इस बार विवाद के केंद्र में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 6 की नई कन्नड़ किताब है. सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जाने लगा कि नई किताब में ‘कृष्णा’ नाम को लेकर कुछ बदलाव किए गए हैं. साथ ही खान-पान की आदतों में मांसाहारी भोजन का जिक्र जानबूझकर हटा दिया गया या शामिल नहीं किया गया.

कन्नड़ किताबों को लेकर विवाद बढ़ते ही NCERT ने इस मामले पर संज्ञान लिया. बोर्ड ने सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को खारिज करते हुए अपनी ऑफिशियल सफाई जारी की. शिक्षा बोर्ड ने इन सभी आरोपों को गलत और भ्रामक बताया है. बोर्ड का कहना है कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर तथ्यों की जांच किए बिना ही अफवाहें फैला रहे हैं. स्कूली किताबों के कंटेंट को लेकर जानबूझकर भ्रम पैदा करने की कोशिश की जा रही है. NCERT ने साफ किया है कि नई किताबों को नियमों के तहत ही तैयार किया गया है.

‘कृष्णा’ नाम को लेकर क्या था दावा और क्या है सच?

इस विवाद में सबसे पहला और बड़ा मुद्दा ‘कृष्णा’ नाम को लेकर था. सोशल मीडिया पर आरोप लगाया गया कि नई कन्नड़ किताब में बदलाव किए गए हैं. इस पर सफाई देते हुए NCERT ने साफ किया कि जिस चैप्टर या रेफरेंस की बात की जा रही है, वह भूगोल (Geography) का हिस्सा है, जहां भारत की प्रमुख नदियों का जिक्र है. बोर्ड ने स्पष्ट किया कि किताब में ‘कृष्णा नदी’ का नाम वैसा ही है. इसमें कोई छेड़छाड़ या नाम हटाने जैसी बात गलत है. भौगोलिक और ऐतिहासिक तथ्यों को प्रामाणिकता के साथ रखा गया है.

नॉन-वेज खाने के जिक्र पर क्या बोली NCERT?

दूसरा विवाद खान-पान की आदतों से जुड़ा हुआ था. सोशल मीडिया पर यह बात तेजी से फैली कि कक्षा 6 की नई कन्नड़ किताब में भारत की विविध खान-पान संस्कृति को दिखाते समय मांसाहारी भोजन का जिक्र छोड़ दिया गया है. इस पर बोर्ड ने कहा कि NCERT भारत की सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करता है. नई किताबें तैयार करते समय देश के सभी हिस्सों के रहन-सहन और खान-पान को बैलेंस्ड तरीके से शामिल किया गया है. किसी खास तरह के भोजन को जानबूझकर नजरअंदाज करने का आरोप बेबुनियाद है.

अनुवाद और नए सिलेबस का रेफरेंस

NCERT ने समझाया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तैयार की गईं नई किताबें रटने के बजाय प्रैक्टिकल ज्ञान देने के उद्देश्य से बनाई गई हैं. कई बार जब मूल अंग्रेजी या हिंदी भाषा की किताबों का क्षेत्रीय भाषाओं (जैसे कन्नड़) में अनुवाद किया जाता है तो संदर्भों को लोकल परिवेश के हिसाब से समझाने की कोशिश की जाती है. बोर्ड ने साफ किया कि अगर कहीं कोई तकनीकी या भाषाई भ्रम हुआ भी है तो उसे एक्सपर्ट की समिति की देखरेख में सुधारा जाता है. इसे छिपे हुए एजेंडे या बड़े बदलाव के रूप में देखना गलत है.

अफवाहों से दूर रहने की अपील

एनसीईआरटी ने सभी शिक्षकों, अभिभावकों और स्टूडेंट्स से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी अपुष्ट और भ्रामक खबरों पर भरोसा न करें. बोर्ड ने कहा कि उनकी ऑफिशियल वेबसाइट पर सभी नई किताबें और उनका डिजिटल कंटेंट ट्रांसपेरेंसी के साथ उपलब्ध है, जहां जाकर कोई भी व्यक्ति खुद सच देख सकता है. शिक्षा की शुचिता और तथ्यों की सत्यता बनाए रखने के लिए बोर्ड कमिटेड है.

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Deepali PorwalSenior Sub EditorDeepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें

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