बालाघाट जिले के कान्हा नेशनल पार्क में इस पक्षी को आसानी से देखा जा सकता है. वही, शहरों और गांवों में पेड़ों पर आसानी से यह पक्षी दिख जाता है. इस ग्रामीण अंचल में कोतवाल भी कहते हैं. उसका नाम है ब्लैक ड्रोंगो. इस पक्षी का जियोलॉजिकल नाम डिक्रूरस मैक्रोसेर्कस है. यह काफी आकर्षक पक्षी है.
जानिए कौन सा है ये खास पक्षीबालाघाट जिले के कान्हा नेशनल पार्क में इस पक्षी को आसानी से देखा जा सकता है. वही, शहरों और गांवों में पेड़ों पर आसानी से यह पक्षी दिख जाता है. इस ग्रामीण अंचल में कोतवाल भी कहते हैं. उसका नाम है ब्लैक ड्रोंगो. इस पक्षी का जियोलॉजिकल नाम डिक्रूरस मैक्रोसेर्कस है. यह काफी आकर्षक पक्षी है.
पक्षी अपनी आवाज से करता है सावधान
इस पक्षी को कोतवाल भी कहते हैं. वहीं, स्थानीय भाषा में भुजंगा और चाटू भी कहते हैं. लेकिन इसका असल नाम ब्लैक ड्रोंगो है. ये दिखने में छोटा होता है. इसका रंग चमकीला काला होता है. खास बात ये हैं कि यह एक रंग तक सीमित नहीं है. यह बार-बार रंग बदल लेता है. इसकी आवाज इतनी बुलंद होती है कि यह इलाके में अपनी मौजूदगी दर्ज करवा ही लेता है. यह एक नहीं कई तरह की आवाज निकाल लेता है.
आखिर क्यों कहते हैं जंगल का कोतवाल
ब्लैक ड्रोंगो को जंगल का कोतवाल इसलिए भी कहते हैं. क्योंकि यह जंगल में शिकारी पक्षियों को भटकने भी नहीं देता है. इस दौरान चील, बाज और कौए जैसे शिकारी पक्षियों पर तेजी से झपट्टा भी मारता है. यह सिर्फ अपनी ही रक्षा नहीं करता बल्कि दूसरे पक्षियों के लिए मददगार साबित होता है. दरअसल, शिकारी पक्षियों के दिखने पर वह जंगल के दूसरे पक्षियों को अलर्ट करता है. इसके लिए वह अपनी बुलंद आवाज का इस्तेमाल करता है. ऐसे में दूसरे पक्षी भी इसे अपना बॉडीगार्ड भी मानते हैं. दूसरे पक्षी भी ब्लैक ड्रोंगो के घोंसले के आसपास ही अंडे देते हैं, जिसकी वजह से इस पक्षी को कोतवाल कहते हैं.
ब्लैक ड्रोंगो का असल रंग काला
कांच के जैसे पंख, इसलिए बदलता रंगएक्सपर्ट्स का मानना है कि ब्लैक ड्रोंगो का असल रंग काला ही है. लेकिन जब इसके पंखों पर धूप पड़ती है, तब इसका रंग नीला हो जाता है. यह छोटे कीटों के भक्षण का भी काम करता है. मवेशी के शरीर पर बैठ कर शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों का भक्षण करता है.
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