Who is singer Parastoo Ahmadi: ईरान की चर्चित सिंगर परस्तू अहमदी इन दिनों दुनियभर की सुर्खियों में हैं. उन्हें बिना हिजाब गाना गाने और सरकारी नियमों का उल्लंघन करने के मामले में 74 कोड़ों की सजा सुनाई गई है. परस्तू लंबे समय से महिलाओं की आजादी, अभिव्यक्ति के अधिकार और अनिवार्य हिजाब कानून के खिलाफ मुखर रही हैं. यही वजह है कि उनका ईरानी प्रशासन से अक्सर टकराव होता रहा है. कौन हैं परस्तू अहमदी? क्या किया उन्होंने गुनाह, क्यों सरकार से रहता है 36 का आंकड़ा चलिए बताते हैं…
नई दिल्ली. संगीत की दुनिया में अपनी आवाज से पहचान बनाने वाली एक सिंगर आज पूरी दुनिया में बहस का विषय बन गई है. वजह कोई नया गाना नहीं, बल्कि वह सजा है जिसने मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की आजादी पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ईरान की चर्चित सिंगर परस्तू अहमदी को गाने और सार्वजनिक मंच पर अपनी पसंद से पेश आने के कारण 74 कोड़ों की सजा सुनाए जाने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बटोरी हैं. फोटो साभार- फेसबुक
परस्तू पहले भी कई बार विवादों और चर्चाओं के केंद्र में रह चुकी हैं. 2024 में उन्होंने ऐसे कदम उठाए थे, जिन्हें ईरानी सरकार की सख्त नीतियों को खुली चुनौती माना गया. महिलाओं की आजादी, अभिव्यक्ति के अधिकार और सामाजिक बंदिशों के खिलाफ मुखर रहने वाली परस्तू को उनके समर्थक साहसी आवाज मानते हैं. अब एक बार फिर उनका नाम दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है. फोटो साभार- फेसबुक
दरअसल, ईरान की एक अदालत ने परस्तू अहमदी को 74 कोड़ों की सजा, दो साल का यात्रा प्रतिबंध और दो साल तक कलात्मक गतिविधियों पर रोक लगाने का आदेश दिया है. यह कार्रवाई उनके उस ऑनलाइन कॉन्सर्ट को लेकर की गई, जिसमें वह बिना हिजाब के नजर आई थीं. फोटो साभार- फेसबुक
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29 साल की परस्तू अहमदी का जन्म ईरान के माजंदरान प्रांत में हुआ था. उन्होंने फिल्म निर्देशन की पढ़ाई की और बाद में संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई. परस्तू पारंपरिक ईरानी संगीत और लोकधुनों को आधुनिक अंदाज में पेश करने के लिए जानी जाती हैं. फोटो साभार- फेसबुक
हालांकि, उनका नाम केवल संगीत की वजह से नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक प्रतिबंधों के खिलाफ मुखर रुख के कारण भी चर्चा में रहा है. 2022 में ईरान में महिलाओं के अधिकारों और अनिवार्य हिजाब के खिलाफ हुए ‘महिला, जीवन, आजादी’ आंदोलन के दौरान भी परस्तू का नाम सामने आया था. उन्होंने अपने गीतों और सार्वजनिक बयानों के जरिए महिलाओं की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार का समर्थन किया था. फोटो साभार- फेसबुक
यह पूरा विवाद दिसंबर 2024 में शुरू हुआ था. परस्तू अहमदी ने ईरान की एक ऐतिहासिक धरोहर ‘दैर-ए गचिन कारवां सराय’ में एक वर्चुअल/लाइव कॉन्सर्ट किया था और इसे अपने यूट्यूब चैनल पर लाइव स्ट्रीम किया था. इस 15 मिनट के कॉन्सर्ट में परस्तू ने बिना हिजाब पहने और एक स्लीवलेस काले रंग की ड्रेस में 8 अन्य संगीतकारों के साथ परफॉर्म किया था. ईरान के कड़े शरिया और हिजाब कानून के मुताबिक, महिलाओं का सार्वजनिक रूप से बिना हिजाब के दिखना और अकेले गाना गाना पूरी तरह प्रतिबंधित है. फोटो साभार- फेसबुक
परस्तू अहमदी ने लाइव-स्ट्रीम कॉन्सर्ट से एक दिन पहले यूट्यूब पर अपना कॉन्सर्ट पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने कहा था- ‘मैं परस्तू हूं, एक लड़की जो अपने प्रियजनों के लिए गाना चाहती है. यह एक ऐसा अधिकार है जिसे मैं अनदेखा नहीं कर सकती, उस भूमि के लिए गाना जिसे मैं दिल से प्यार करती हूं.’ फोटो साभार- फेसबुक
इस कॉन्सर्ट में उन्होंने ‘अज खूने जवानाने वतन लाले दमीदा’ (Az Khoon-e Javanan-e Vatan) गीत गाया, जिसका अर्थ है ‘मातृभूमि के युवाओं के रक्त से वतन की जमीन पर लाल फूल खिले हैं’. इस गीत को ईरान में विरोध और देशभक्ति का प्रतीक माना जाता है. ईरान में यूट्यूब और सोशल मीडिया पर कड़े प्रतिबंधों के बावजूद, परस्तू का यह वीडियो रातों-रात इंटरनेट पर वायरल हो गया और इसे लाखों व्यूज मिले. फोटो साभार- फेसबुक
1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति के बाद महिलाओं को पहले पूरी तरह से गाने से प्रतिबंधित कर दिया गया था. लेकिन धीरे-धीरे बदलाव हुआ और फिर सभी दर्शकों के सामने सोलो परफॉर्मेंस करने की अनुमति मिली. लेकिन महिला सिंगर केवल कोरस के लिए पुरुष के साथ परफॉर्म कर सकती थीं. ईरानी और इस्लामी कानून के मुताबिक, महिलाओं को उन पुरुषों के सामने बिना हिजाब के आने की अनुमति नहीं है जो उनके रिश्तेदार नहीं हैं. फोटो साभार- फेसबुक
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