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भारत अपनी सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों पर मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है. इसमें सीमा सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी ढांचा, रणनीतिक बुनियादी ढांचा, रक्षा निर्माण और सुरक्षा संस्थाओं की क्षमता बढ़ाने जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं. हाल के वर्षों में देश ने सुरक्षा से जुड़े कई मोर्चों पर नई पहल की है. सीमा पर निगरानी बढ़ाने से लेकर स्वदेशी रक्षा उत्पादन को प्रोत्साहन देने तक, सुरक्षा ढांचे को अधिक सक्षम बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं.

सुरक्षा ढांचा क्या होता है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
किसी भी देश का सुरक्षा ढांचा केवल सेना तक सीमित नहीं होता. इसमें सीमाओं की सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी अभियान, रणनीतिक सड़क नेटवर्क, खुफिया तंत्र, रक्षा उद्योग और सुरक्षा एजेंसियों की क्षमता भी शामिल होती है. भारत जैसे बड़े और विविध भौगोलिक क्षेत्र वाले देश के लिए यह ढांचा राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

दुनिया का सबसे बड़ा सीमा सुरक्षा बल
भारत की सीमा सुरक्षा व्यवस्था का एक प्रमुख आधार सीमा सुरक्षा बल (BSF) है. यह बल अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की निगरानी और सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाता है. सीमा क्षेत्रों में तैनाती, घुसपैठ रोकने और सीमा प्रबंधन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. BSF  में 2,55,663 सीमा प्रहरी हैं. भारत-पाकिस्तान सीमा पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) लगभग 2,289 किलोमीटर लंबे सीमाक्षेत्र की निगरानी करता है. यह सीमा पंजाब, राजस्थान, गुजरात और जम्मू के रेगिस्तानी, मैदानी तथा पर्वतीय क्षेत्रों से होकर गुजरती है. वहीं, भारत-बांग्लादेश सीमा की कुल लंबाई लगभग 4,096 किलोमीटर है, जिसकी सुरक्षा भी BSF के जिम्मे है.

व्यापक सीमा बाड़बंदी कार्यक्रम
भारत ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बाड़बंदी और निगरानी ढांचे के विकास पर भी काम किया है. देश दुनिया के सबसे व्यापक सीमा बाड़बंदी कार्यक्रमों में से एक को आगे बढ़ा रहा है. इसका उद्देश्य संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी क्षमता बढ़ाना और सीमा प्रबंधन को मजबूत करना है. भारत-पाकिस्तान सीमा का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा अब बाड़बंदी (फेंसिंग) के दायरे में आ चुका है, भारत-बांग्लादेश सीमा का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा भी फेंस किया जा चुका है. पूर्वोत्तर भारत में उग्रवादी गतिविधियों में 82 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है.

रणनीतिक क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क का विस्तार
सीमावर्ती और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सड़क संपर्क किसी भी सुरक्षा ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. भारत दुनिया के सबसे बड़े उच्च-ऊंचाई वाले रणनीतिक सड़क नेटवर्क का विकास कर रहा है. ऐसे सड़क नेटवर्क सैन्य रसद, सैनिकों की आवाजाही और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. पिछले 12 सालों में 6,800 किमी सीमा क्षेत्र की सड़कों का निर्माण किया गया है.

वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच पांच वर्षों में रक्षा मंत्रालय ने जनरल स्टाफ (GS) सड़कों के निर्माण के लिए सीमा सड़क संगठन (BRO) को लगभग 23,625 करोड़ रुपये आवंटित किए. इस वित्तीय सहायता के माध्यम से अग्रिम और सीमावर्ती क्षेत्रों में लगभग 4,595 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया है. केवल वित्त वर्ष 2024-25 में ही लगभग 769 किलोमीटर नई सड़कों का निर्माण पूरा किया गया, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य और नागरिक आवाजाही को बेहतर बनाने में मदद मिली है.

आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ कार्रवाई
भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में आतंकवाद और उग्रवाद से निपटना एक प्रमुख प्राथमिकता रहा है. पिछले वर्षों में सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ कई स्तरों पर कार्रवाई की है. सीमा पार से संचालित आतंकी ढांचे को निशाना बनाने के लिए “ऑपरेशन सिन्दूर 2025” जैसे आवश्यक सटीक सैन्य कार्रवाई भी की गई. जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति में सुधार के दावों के बीच वर्ष 2023 के बाद से पत्थरबाजी की कोई घटना दर्ज नहीं हुई है. इसके साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित प्रतिक्रिया के लिए ‘प्रहार’ (PRAHAAR) नामक पहली राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी रणनीति भी शुरू की गई है.

24 अगस्त 2024 को देश को नक्सलवाद-मुक्त भारत बनाने का संकल्प लिया गया था. यह लक्ष्य निर्धारित समयसीमा 31 मार्च 2026 से पहले ही हासिल कर लिया गया. नक्सलवाद के खिलाफ चले अभियान को दुनिया के सबसे व्यापक उग्रवाद-निरोधी प्रयासों में से एक बताया गया है. इसका उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और प्रशासनिक पहुंच को मजबूत करना है. सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ पुनर्वास पर भी जोर दिया गया. इस दौरान करीब 3,000 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनके पुनर्वास की व्यवस्था की गई है. इसके अलावा, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कौशल विकास (स्किल ट्रेनिंग) उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जा रही है.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी की भूमिका
आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के आंकड़ों के अनुसार, अब तक एजेंसी ने 690 मामलों को दर्ज कर उनकी जांच की है. इनमें से 169 मामलों में अदालतों द्वारा फैसला सुनाया जा चुका है, जबकि 156 मामलों में दोषसिद्धि (Conviction) हुई है. इस आधार पर NIA की दोषसिद्धि दर (Conviction Rate) 92.31 प्रतिशत रही है, जो जांच एजेंसी द्वारा अदालतों में मामलों को सफलतापूर्वक साबित करने की उच्च दर को दर्शाती है.

‘सुदर्शन चक्र’ और बहु-स्तरीय सुरक्षा दृष्टिकोण
मिशन सुदर्शन चक्र’ की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने संबोधन के दौरान की थी. भारत की सुरक्षा रणनीति केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है. आधुनिक निगरानी प्रणालियां, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और बहु-स्तरीय सुरक्षा उपाय भी इसका हिस्सा हैं. सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए तकनीक, निगरानी नेटवर्क और समन्वित प्रतिक्रिया क्षमता पर भी ध्यान दिया जा रहा है.

इस मिशन के तहत वर्ष 2035 तक भारत के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रतिष्ठानों और रणनीतिक ठिकानों को अत्याधुनिक तकनीक और उन्नत हथियार प्रणालियों से लैस करने का लक्ष्य रखा गया है. मिशन का उद्देश्य केवल दुश्मन के हमलों को रोकना ही नहीं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर प्रभावी जवाबी प्रहार करने की क्षमता विकसित करना भी है, ठीक वैसे ही जैसे पौराणिक सुदर्शन चक्र अपने लक्ष्य को भेदने के लिए जाना जाता है.

स्वदेशी रक्षा निर्माण का बढ़ता महत्व
भारत की सुरक्षा संरचना में रक्षा विनिर्माण क्षेत्र की भूमिका लगातार बढ़ रही है. भारत का रक्षा निर्माण Ecosystem तेजी से विस्तार कर रहा है. स्वदेशी उत्पादन पर बढ़ता जोर रक्षा आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ औद्योगिक क्षमता को भी मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. भारत के रक्षा उत्पादन क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2025-26 में नया रिकॉर्ड बनाया है. देश का वार्षिक रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 1.54 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 15.6 प्रतिशत अधिक है. आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में रक्षा उत्पादन में लगातार वृद्धि हुई है. वित्त वर्ष 2020-21 में यह आंकड़ा 84,643 करोड़ रुपये था, जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में स्वदेशी रक्षा उत्पादन 43,746 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था.

वैश्विक स्तर पर बढ़ती सुरक्षा भागीदारी
ऑपरेशन सिंदूर के बाद संसदीय पहुंच प्रयासों किये जा रहे हैं. यह संकेत देता है कि सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर भारत की भागीदारी केवल घरेलू स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संवाद और सहयोग भी इसका हिस्सा है. उदाहरण के तौर पर, ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने विभिन्न देशों में संसदीय प्रतिनिधिमंडल भेजकर अपनी सुरक्षा चिंताओं से अवगत कराया. वहीं, संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत आतंकवाद विरोधी सहयोग तथा क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर लगातार संवाद करता रहा है. इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र, जी-20 और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी भारत लगातार सीमा पार आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाता रहा है.

एक नजर में प्रमुख आंकड़े
– 93% भारत-पाकिस्तान सीमा फेंसिंग
– 80% भारत-बांग्लादेश सीमा फेंसिंग
– 82% पूर्वोत्तर उग्रवाद में कमी
– 6,800 किमी सीमा क्षेत्र की सड़कें
– 2.19 लाख करोड़ रुपये रक्षा आधुनिकीकरण बजट
– 27,000 करोड़ रुपये रक्षा उपग्रह परियोजना
– 48,000 करोड़ रुपये का तेजस Mk1A सौदा
– 5,200 करोड़ रुपये ब्रह्मोस एयरोस्पेस राजस्व

भारत का सुरक्षा ढांचा कई स्तरों पर विकसित हो रहा है. सीमा सुरक्षा बलों की क्षमता, सीमा प्रबंधन, रणनीतिक बुनियादी ढांचे का विस्तार, आतंकवाद-रोधी तंत्र और स्वदेशी रक्षा निर्माण जैसे क्षेत्र इस प्रक्रिया के प्रमुख हिस्से हैं. उपलब्ध आधिकारिक दावों के अनुसार, इन क्षेत्रों में चल रहे प्रयास देश की समग्र सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में केंद्रित हैं.

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