Image Slider

Last Updated:

Ram Mandir Daan Chori News : राम मंदिर ट्रस्ट के कैंप कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने लोकल18 से बात में यह स्पष्ट किया कि मंदिर परिसर में रखे बड़े दान पात्रों से धन निकाला जाता था. नोटों की गड्डियां बनाई जाती थीं और फिर उनकी गणना होती थी. लेकिन ये सारा खेल कहां पर कैसे हुआ.. उन्‍होंने और क्‍या-क्‍या कहा, आइये जानते हैंण्‍ण्‍

अयोध्या: अयोध्या में राम मंदिर के दान पात्र से जुड़े कथित धन हेराफेरी मामले को लेकर राम मंदिर ट्रस्ट के कैंप कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता अहम जानकारी साझा की है. उनका कहना है कि ट्रस्ट ने खुद सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया था, क्योंकि इस प्रकरण से ट्रस्ट की छवि प्रभावित हो रही थी. तभी सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो पूरे मामले की जांच कर रही है… साथ ही गुप्ता ने राम मंदिर दान में आए पैसों की हेराफेरी पर भी बड़ी बात कह दी है.

प्रकाश गुप्ता ने लोकल18 से बात करते हुए साफ किया कि ‘कथित गड़बड़ी या चोरी का संबंध बाहरी व्यक्तियों से नहीं, बल्कि दान पात्र की गणना करने वाले कुछ कर्मचारियों से जुड़ा बताया जा रहा है.’ उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर संदेह जताया जा रहा है, वे वही कर्मचारी थे जो दान पात्र से निकली राशि की गिनती का काम करते थे. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हेराफेरी उसी प्रक्रिया के दौरान हुई है.

उन्होंने बताया कि ये कर्मचारी किसी बैंक के स्थायी कर्मचारी नहीं थे, बल्कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत कार्य कर रहे थे. पहले मंदिर में आने वाले दान और दान पात्र से प्राप्त धनराशि की गिनती ट्रस्ट परिसर में ही की जाती थी. दान पात्र भर जाने पर उसे खोला जाता था और नोटों को मूल्य के आधार पर अलग-अलग करके गिना जाता था. इसके बाद बैंक के कर्मचारी आकर राशि अपने साथ ले जाते थे. प्रकाश गुप्ता ने कहा कि समय के साथ बैंक ने मंदिर परिसर में अपना अलग काउंटर स्थापित कर दिया था. इसके बाद अधिकांश धनराशि सीधे बैंक कर्मचारियों को सौंप दी जाती थी और ट्रस्ट की भूमिका सीमित हो गई थी. उन्होंने कहा कि ट्रस्ट को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि कुछ लोग इतनी सफाई से धन की हेराफेरी कर सकते हैं.

पहले दो जगहों पर चलते थे काउंटर
महिपाल सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रकाश गुप्ता ने बताया कि ‘महिपाल सिंह पहले ट्रस्ट के सहयोगी के रूप में कार्य करते थे. बाद में उन्हें दान राशि की गणना से संबंधित कार्यों में लगाया गया था.’ उन्होंने कहा कि ‘पहले ट्रस्ट कार्यालय और मंदिर परिसर दोनों स्थानों पर दान काउंटर संचालित होते थे, जहां श्रद्धालुओं को रसीद देकर दान स्वीकार किया जाता था.’

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा विवाद दान काउंटर पर प्राप्त धनराशि से नहीं, बल्कि दान पात्रों की गिनती प्रक्रिया से जुड़ा है. मंदिर परिसर में रखे बड़े दान पात्रों से धन निकाला जाता था, नोटों की गड्डियां बनाई जाती थीं और फिर उनकी गणना होती थी. यह पूरा काम संबंधित कर्मचारियों द्वारा किया जाता था, जबकि ट्रस्ट की ओर से निगरानी के लिए एक प्रतिनिधि मौजूद रहता था.’ प्रकाश गुप्ता ने कहा कि ‘ट्रस्ट जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रहा है और सत्य सामने आने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.’

About the Author

authorimg

Sandeep KumarSenior Assistant Editor

I currently serve as a Senior Assistant Editor at News18 Hindi, leading State & Local18 operations across Uttar Pradesh, Uttarakhand, Delhi, Himachal Pradesh and Haryana. With over 17 years of experience in jou…और पढ़ें

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||