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नई दिल्ली. क्रिकेट के मैदान पर बड़े-बड़े गेंदबाजों ने बल्लेबाजों को भद्दी-भद्दी गालियां दीं, लेकिन शायद ही ऐसा देखने को मिला कि किसी ने पलट कर धक्का-मुक्की की हो, लेकिन ये 2026 है जनाब. मैदान पर खेल रहे नए लड़कों (Gen-Z) का उबलता हुआ खून यह सब नहीं देखता. अगर कोई स्लेज कर देता है तो उसका जवाब उसी की भाषा में दिए जाने की कोशिश रहती है, जोकि खेल भावना के लिहाज से बिल्कुल भी सही नहीं. 15 साल के उभरते भारतीय क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी भी इसी की चपेट में आ गए. श्रीलंका-ए और इंडिया-ए मैच के बाद हुए बवाल के दृश्य सबने देखे. हो सकता है वैभव के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया हो, उन्हें उकसाने के लिए गालियां दी गई हों, लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं कि वह मैदान पर ही धक्का दे देंगे. जितनी तेजी से वैभव का बल्ला सुर्खियां बटोर रहा है, उतनी ही तेजी से उनका आक्रामक व्यवहार भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है.

दरअसल, श्रीलंका में चल रही ट्राई सीरीज के दौरान इंडिया-ए और श्रीलंका-ए के मुकाबले के बाद जो दृश्य देखने को मिला, उसने कई सवाल खड़े कर दिए. सुपर ओवर में हार के बाद वैभव श्रीलंकाई खिलाड़ियों के साथ तीखी बहस में उलझ गए और मामला धक्का-मुक्की तक पहुंच गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक श्रीलंकाई खिलाड़ियों की टिप्पणी के बाद वैभव अपना आपा खो बैठे और स्थिति को संभालने के लिए दोनों टीमों के खिलाड़ियों को बीच-बचाव करना पड़ा. यह कोई पहली घटना नहीं है. इससे पहले अंडर-19 एशिया कप में पाकिस्तान के तेज गेंदबाज अली रजा द्वारा आउट किए जाने पर वैभव ने आक्रामक अंदाज में अपना जूता दिखाकर प्रतिक्रिया दी थी. मैदान पर लगातार सामने आ रहा यह रवैया यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या इस युवा स्टार का अति-उत्साह है या फिर एक ओवर-अग्रेशन जो उनके करियर के लिए लिए नुकसानदायक हो सकता है.

वैभव सूर्यवंशी का श्रीलंकाई खिलाड़ियों से हुआ विवाद.

क्रिकेट में आक्रामकता कोई नई बात नहीं. विराट कोहली, रिकी पोंटिंग और सौरव गांगुली जैसे खिलाड़ियों ने भी अपने करियर में आक्रामक रवैया दिखाया है, लेकिन इन खिलाड़ियों ने कभी हद पार नहीं की. हर चीज का जवाब उन्होंने अपने खेल से दिया है. वैभव अभी अपने करियर की शुरुआती सीढ़ियों पर हैं. ऐसे समय में यदि भावनाएं उन पर हावी होने लगें, तो यह उनके खेल और करियर दोनों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है.

आक्रामक होना और अनुशासन को देने में फर्क
दरअसल, मैदान पर आक्रामक होना और अनुशासन खो देना, दोनों अलग-अलग बातें हैं. आक्रामकता आपको मुकाबला जीतने की भूख देती है, लेकिन अनुशासनहीनता आपको गलत फैसले लेने पर मजबूर कर सकती है. श्रीलंका-ए के खिलाफ घटना में सबसे चिंताजनक बात यही थी कि वैभव हार के बाद अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं रख सके. युवा खिलाड़ियों के लिए यह एक खतरनाक संकेत है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में विपक्षी टीम अक्सर मानसिक दबाव बनाकर खिलाड़ी की एकाग्रता तोड़ने की कोशिश करती है.

खेल पर पड़ सकता है असर
अगर वैभव इसी तरह भावनात्मक प्रतिक्रियाएं देते रहे, तो इसका असर केवल उनकी छवि पर नहीं पड़ेगा, बल्कि उनके खेल पर भी दिख सकता है. विरोधी खिलाड़ी उन्हें उकसाने की रणनीति अपनाएंगे. अंपायर और मैच रेफरी भी उनके व्यवहार पर अतिरिक्त नजर रखेंगे. आईसीसी के नियमों के तहत ऐसे मामलों में चेतावनी, जुर्माना या डिमेरिट अंक तक मिल सकते हैं, जो भविष्य में प्रतिबंध का कारण बन सकते हैं. यह भी याद रखना चाहिए कि भारतीय क्रिकेट में प्रतिभा की कभी कमी नहीं रही. कई खिलाड़ी शानदार कौशल के बावजूद अपने व्यवहार, अनुशासन या मानसिक कमजोरी के कारण अपेक्षित ऊंचाइयों तक नहीं पहुंच सके. दूसरी ओर, जिन खिलाड़ियों ने दबाव में खुद को नियंत्रित करना सीखा, वे लंबे समय तक सफल रहे. महान बल्लेबाजों की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ उनका खेल नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में शांत रहने की क्षमता भी रही है.

वैभव सूर्यवंशी.

गलतियों से सीखना होगा
वैभव के लिए अच्छी बात यह है कि वह अभी बहुत युवा हैं. गलतियों से सीखने और खुद को बेहतर बनाने के लिए उनके पास भरपूर समय है. उनके भीतर जो जज्बा और जीतने की भूख दिखती है, वही उन्हें भविष्य का बड़ा खिलाड़ी बना सकती है, लेकिन उस ऊर्जा को सही दिशा देना जरूरी है. उन्हें यह समझना होगा कि विपक्षी खिलाड़ी को जवाब बल्ले से देना ज्यादा प्रभावी होता है, शब्दों या धक्कों से नहीं. भारतीय क्रिकेट के लिए वैभव सूर्यवंशी एक उभरता हुआ सितारा हैं. उनकी प्रतिभा पर किसी को संदेह नहीं है. मुद्दा यह है कि उन्हें अपने गुस्से और आक्रामकता को नियंत्रित करना सीखना होगा, लेकिन अगर यह आक्रामकता अनुशासनहीनता में बदलती रही, तो वही रवैया उनके सुनहरे भविष्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है.

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