बॉलीवुड के लीजेंड सिंगर किशोर कुमार 60 के दशक में सिर्फ देवानंद के लिए प्लेबैक सिंगिंग किया करते थे. बहुत ही मूडी इंसान थे. संगीतकार एसडी बर्मन उन्हें बहुत चाहते थे. एक बार किशोर दा ने एसडी बर्मन के जटिल गाने की स्टाइल बदल दी. ऐसी सुरीली ट्यून बनाई कि गाना अमर हो गया. गाना इतना पॉप्युलर हुआ कि सरकारी विज्ञापनों में खूब दिखाया गया. गान प्रेम-प्यार का प्रतीक बन गया. फिल्म ने इतिहास रच दिया. मूवी हिंदी सिनेमा के लिए मील का पत्थर साबित हुई. खुद किशोर कुमार रातोंरात इस फिल्म की वजह से स्टार बने. इस फिल्म की कहानी एक रात में फाइनल हुई थी. उस रात एक और फिल्म फाइनल हुई थी.
Rajesh khanna Hit Movies : कुछ फिल्में दर्शकों के दिल में बस जाती हैं. कहानी इतनी मर्मस्पर्शी होती है कि बार-बार देखने पर भी दिल नहीं भरता. ऐसी फिल्में हर बार नई फीलिंग देती हैं. 57 साल ऐसी ही एक फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. इस फिल्म का एक ब्लॉकबस्टर गाना किशोर कुमार ने अपनी ही स्टाइल में गाया था. संगीतकार एसडी बर्मन ने जो धुन बनाई थी, उसे बदलकर अनोखे अंदाज में गाया. किशोर कुमार ने इतनी सुरीली धुन बनाई कि गाना अमर हो गया. वो गाना था ‘रूप तेरा मस्ताना, प्यार मेरा दीवाना’. गाना 7 नवंबर 1969 को रिलीज ‘आराधना’ फिल्म का था. इसी फिल्म ने किशोर कुमार को रातोंरात स्टार बनाया. इसी फिल्म से हिंदी सिनेमा को सही मायने में अपना पहला सुपरस्टार राजेश खन्ना के रूप मिला.
‘आराधना’ फिल्म का डायरेक्शन-प्रोडक्शन शक्ति सामंत ने किया था. फिल्म में राजेश खन्ना-शर्मिला टैगोर लीड रोल में थे. इसके अलावा, सुजीत कुमार, फरीदा जलाल और किशोर कुमार के बड़े भाई अशोक कुमार अहम भूमिकाओं में थे. फिल्म की कहानी सचिन भौमिक ने लिखी थी. यह कहानी 1946 में आई अमेरिकन फिल्म टू ईच हिज ओन (To Each His Own) से इंस्पायर्ड थी. सचिन ने यह कहानी सबसे पहले ऋषिकेश मुखर्जी को सुनाई थी. जब ऋषिकेश दा इस फिल्म को नहीं बना पाए तो सचिन ने यही कहानी शक्ति सामंत को सुनाई. पहले इस फिल्म का टाइटल ‘सुबह प्यार की’ था. एसडी बर्मन के कहने पर टाइटल बदला गया.
फिल्म का म्यूजिक एसडी बर्मन ने दिया था और गीतकार आनंद बख्शी थे. आरडी बर्मन ने म्यूजिक बनाने में बहुत मदद की थी. फिल्म में कुल 7 गाने थे. हर गाना सुपरहिट था. फिल्म का म्यूजिक उस दशक का सबसे ज्यादा बिकने वाला संगीत था. फिल्म के पॉप्युलर गाने थे : रूप तेरा मस्ताना, मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू, कोरा कागज था ये मन मेरा, चंदा है तू मेरा सूरज है तू, सफल होगी तेरी आराधना, गुन गुना रहे हैं भंवरे और बागों में बहार है. ‘रूप तेरा मस्ताना’ गाने की सुरीली धुन बनाने में किशोर कुमार ने अहम भूमिका निभाई थी.
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किशोर कुमार के बेटे अमित कुमार ने एक स्टेज शो ‘रूप तेरा मस्ताना’ गाने का किस्सा सुनाया था. उन्होंने बताया था पहले इस गाने की धुन बहुत ही अजीब सी थी. गाना बहुत ही कठिन था. जब संगीतकार एसडी बर्मन इस गाने की धुन सिखा रहे थे तो किशोर दा को ट्यून पसंद नहीं आई. गाना बहुत ही धीमा था. किशोर कुमार को उसी समय एसडी बर्मन का पुराना गाना याद आया जो इसी धुन से मिलता-जुलता था. किशोर कुमार ने एसडी बर्मन को उनका बंगाली गाना याद दिलाया. यह गाना था ‘एतो कछे दूजने, प्रेम भरा जो बूने, होथट भूले भूल ना होय जाए.’ गाना सुनते ही बर्मन दा खुश हो गए.
‘आराधना’ फिल्म का निर्माण कैसे हुआ, इसकी कहानी भी बहुत दिलचस्प है. आखिरी समय में इस फिल्म की कहानी बदलनी पड़ी थी. दरअसल, डायरेक्टर-प्रोड्यूसर शक्ति सामंत, लेखक गुलशन नंदा और मधुसूदन कालेलकर के साथ फेमस स्टूडियो में बैठे थे. इसी दौरान अनिल कपूर के पिता प्रोड्यूसर सुरेंद्र कपूर वहां पहुंचे और अपनी फिल्म ‘एक श्रीमान, एक श्रीमती’ की आखिरी रील देखने का अनुरोध किया. इस फिल्म का आखिरी हिस्सा देखकर शक्ति सामंत के होश उड़ गए. दरअसल ‘एक श्रीमान, एक श्रीमती’ का आखिरी हिस्सा ‘आराधना’ की कहानी से हूबहू मेल खाता था. दोनों फिल्मों के राइटर सचिन भौमिक ही थे. शक्ति सामंत सचिन भौमिक से बहुत नाराज हुए और परेशान भी हुए.
उन्होंने गुलशन नंदा से मदद मांगी. ‘आराधना’ की कहानी सुनने के बाद हीरो का डबल रोल करने का सुझाव दिया. शक्ति सामंत को सुझाव पसंद आया. फिल्म का क्लाइमैक्स फिर से कई बदलाव के साथ लिखा गया. गुलशन नंदा ने ‘कटी पतंग’ की कहानी भी शक्ति सामंत को सुनाई थी. इस तरह से एक ही रात में दोनों फिल्मों की स्क्रिप्ट फाइनल हुई. दोनों फिल्में दो साल के अंतराल में बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुईं. आराधना 7 नवंबर 1969 को रिलीज हुई थी जबकि 29 जनवरी 1971 को सिनेमाघरों में आई थी. आराधना ने रिलीज होते ही इतिहास रच दिया. कटी पतंग को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया. यह हिट फिल्म साबित हुई.
‘मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू’ गाने का किस्सा भी दिलचस्प है. दरअसल, इस गाने के रिद्म एक गिटारिस्ट नहीं बजा पाया. उधर, शक्ति सामंत पूरी टीम के साथ दार्जलिंग में थे. गाने का इंतजार था. ऐसे में आरडी बर्मन ने गिटार की जगह माउथ ऑर्गन बजाया था. गाना तो सुपरहिट बना ही, इसका हर म्यूजिक पीस पॉप्युलर हुआ. ‘आराधना’ शक्ति सामंत के साथ राजेश खन्ना की पहली फिल्म थी. इस फिल्म से ही राजेश खन्ना रातोंरात सुपरहिट बने. राजेश खन्ना-शर्मिला टैगोर की साथ में यह पहली फिल्म थी. फिल्म का नेट कलेक्शन 3.5 करोड़ रुपये के आसपास था. फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. यह 1969 की सबसे ज्यादा पैसे कमाने वाली फिल्म थी. फिल्म को तीन फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे. बेस्ट फिल्म शक्ति सामंत, बेस्ट एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर और बेस्ट प्लेबैक मेल सिंगर किशोर कुमार ‘रूप तेरा मस्ताना’ के फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे.
उधर, ‘कटी पतंग’ की बात करें तो इस फिल्म ने राजेश खन्ना के स्टारडम को एक अलग मुकाम दिया. ‘कटी पतंग’ नायिका प्रधान फिल्म थी. राजेश खन्ना, आशा पारेख, प्रेम चोपड़ा, बिंदु और नाजिर हुसैन जैसे सितारों ने अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरा था. कहानी गुलशन नंदा की थी. वृजेंद्र गौड़ ने डायलॉग लिखे थे. फिल्म की कहानी 1948 में आए कॉर्निल वूलरिच के उपन्यास ‘आई मैरिड ए डेड मैन’ से इंस्पायर्ड थी. म्यूजिक आरडी बर्मन का था. इस फिल्म का म्यूजिक भी ब्लॉकबस्टर रहा था. इस फिल्म के सुपरहिट गाने ‘प्यार दीवाना होता है, मस्ताना होता है’, ‘ये शाम मस्तानी, मदहोश किए जा’, ‘ये जो मुहब्बत है, उनका है काम’ ‘ना कोई उमंग है, ना कोई तरंग है’ थे. गीतकार आनंद बख्शी थे. फिल्म मैसिव हिट साबित हुई थी.
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