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होमताजा खबरकृषिमुरादाबाद का किसान कटहल की ऑर्गेनिक खेती से कर रहा छप्परफाड़ कमाई

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Agriculture News: कटहल तो आपने खूब खाया होगा और अमूमन इसका साइज 2 से 5 किलो तक का होता है. लेकिन उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक किसान ऐसे हैं, जो अपनी खास तकनीक से 50 किलो से लेकर पूरे 1 क्विंटल (100 किलो) तक का भारी-भरकम कटहल तैयार कर रहे हैं. किसान चंद्र प्रकाश सिंह अपने बाग में पूरी तरह प्राकृतिक और जैविक तरीके से इसकी खेती कर रहे हैं. इस बड़े-बड़े कटहल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इतना बड़ा होने के बाद भी यह अंदर से पकता नहीं है, बल्कि एकदम कच्चा और सब्जी बनाने के लिए परफेक्ट रहता है.

मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में इन दिनों पारंपरिक खेती को छोड़कर किसान प्राकृतिक और आधुनिक खेती की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं. इसी कड़ी में यहां के एक प्रगतिशील किसान कटहल की खेती करके हर साल बंपर मुनाफा कमा रहे हैं. इनके बाग में छोटे से लेकर बड़े, हर साइज के कटहल पेड़ पर लदते हैं. लेकिन इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये विशेष रूप से 50 किलो से लेकर एक क्विंटल तक का भारी-भरकम कटहल तैयार करके मार्केट में बेचते हैं. इस अनोखे और विशालकाय कटहल को खरीदने के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं.

परदादा के जमाने से हो रही है खेती, बाग में हैं 25 पेड़
इन कटहल को उगाने वाले किसान चंद्र प्रकाश सिंह ने बताया कि वे कोई आज से यह काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनके परिवार में यह काम पीढ़ियों से चलता आ रहा है. उनके दादा और परदादा के जमाने से ही इस खास कटहल की खेती की जा रही है, जिसे अब वे आगे बढ़ा रहे हैं. चंद्र प्रकाश के बाग में इस समय कटहल के कुल 25 पेड़ हैं. इन सभी 25 पेड़ों पर हर सीजन में भारी तादाद में कटहल आते हैं, जिससे उन्हें हर साल बढ़िया आमदनी हो जाती है.

1 क्विंटल का होने के बाद भी रहता है एकदम कच्चा
इस कटहल की सबसे बढ़िया खूबी इसके वजन और इसके स्वाद में छिपी है. चंद्र प्रकाश ने बताया कि आमतौर पर बड़े आकार के फल पक जाते हैं, लेकिन उनके बाग का कटहल 50 किलो से लेकर 1 कुंटल का होने के बाद भी बिल्कुल पकता नहीं है. यह अंदर से पूरी तरह कच्चा, कड़ा और सब्जी बनाने या अचार डालने के लिए एकदम उत्तम रहता है. इसकी इसी खूबी की वजह से बाजार में इसकी डिमांड हमेशा बनी रहती है.

लागत कम, पूरा मुनाफा सीधे जेब में
खेती के तरीके के बारे में बात करते हुए किसान ने बताया कि वे इस कटहल को उगाने के लिए किसी भी तरह के केमिकल, यूरिया या कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल नहीं करते हैं. यह पूरी तरह से सौ प्रतिशत प्राकृतिक और जैविक खेती है. वे पेड़ों के पोषण के लिए सिर्फ और सिर्फ देसी गोबर की खाद का प्रयोग करते हैं. प्राकृतिक रूप से उगाने की वजह से इस खेती में लागत न के बराबर यानी बिल्कुल जीरो आती है और जो भी कमाई होती है, वह पूरी तरह शुद्ध मुनाफा होती है.

लोकल मार्केट से लेकर बड़ी मंडियों तक है भारी डिमांड
चंद्र प्रकाश इन विशालकाय कटहलों को अपने क्षेत्र के लोकल बाजारों के साथ-साथ बड़ी मंडियों में भी सप्लाई करते हैं. मंडी में थोक भाव अच्छे मिल जाने के कारण उन्हें इस खेती से बहुत शानदार बचत हो रही है. कम मेहनत, बिना लागत और पीढ़ियों पुराने इस प्राकृतिक तरीके को अपनाकर वे आज के दौर में भी खेती से एक बेहतरीन मुनाफा कमाकर दूसरे किसानों के लिए मिसाल बन रहे हैं.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें

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