साल 2026 के जून महीने का आधा सफर तय हो चुका है और मौसम में बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र और खगोलीय गणनाओं के अनुसार, इस बार ग्रहों की चाल झमाझम बारिश के योग बना रही है। जून से लेकर जुलाई 2026 के दौरान हमें मौसम के तीन बिल्कुल अलग रंग देखने को मिलेंगे- कहीं बाढ़ जैसी मूसलाधार बारिश, कहीं सूखा तो कहीं सामान्य वर्षा। ग्रहों और नक्षत्रों के गोचर के आधार पर पूरे समय को श्रेणियों में बांटकर मौसम का नया अंदाज़ नीचे समझाया गया है।
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1. प्रचंड गर्मी और भीषण लू (1 से 7 जून)
जून के शुरुआती हफ्ते में जैसा कि अंदेशा था, सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में रहे। इस वजह से उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत में सूरज की तपिश अपने चरम पर रही। राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में तापमान ने रिकॉर्ड तोड़े और दोपहर के समय झुलसाने वाली गर्म हवाएं (लू) चलीं।
2. आंधी-तूफान और प्री-मानसून की दस्तक (8 से 15 जून)
जून के दूसरे हफ्ते में बृहस्पति सहित अन्य ग्रह-नक्षत्रों ने करवट ली। सूर्य देव रोहिणी से निकलकर 'आर्द्रा नक्षत्र' में आ गए, जिसे ज्योतिष में जल और नमी का कारक माना जाता है। साथ ही शुक्र और चंद्रमा जैसी जलीय प्रवृत्ति के ग्रहों की राशि बदली।
<strong>असर: </strong>वायुमंडल में अचानक बदलाव आया। उत्तर और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में तेज धूल भरी आंधियां चलीं और आसमान में बादल छाए।
<strong>नतीजा: </strong>बिजली कड़कने के साथ प्री-मानसून की बौछारें पड़ीं। इससे तापमान तो थोड़ा गिरा, लेकिन उमस और चिपचिपी गर्मी काफी बढ़ गई।
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3. मानसून का धमाकेदार आगमन (22 जून से 30 जून)
जून का उत्तरार्ध देश के किसानों और आम जनता के लिए बड़ी राहत लेकर आ रहा है। सूर्य ने मिथुन राशि में गोचर किया है और कर्क, वृश्चिक व मीन जैसी जलीय राशियों में शुभ और बलवान ग्रहों का प्रभाव शुरू हो चुका है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ का महीना 29 जून को समाप्त होगा और उसके बाद आषाढ़ लगेगा।
<strong>बड़ा बदलाव: </strong>22 जून के आसपास ग्रहों का एक बेहद खास संयोग बन रहा है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून को पूरी तरह एक्टिव (सक्रिय) कर देगा।
<strong>असर: </strong>22 जून के बाद मानसून की हवाएं तेजी से आगे बढ़ेंगी। जून के आखिरी 10 दिनों में देश के पूर्वी, मध्य और दक्षिणी राज्यों में मूसलाधार बारिश के प्रबल योग हैं। जेठ की तपती गर्मी शांत होगी और खरीफ की फसलों की बुआई के लिए यह पानी अमृत समान साबित होगा।
4. जुलाई 2026: भारी बारिश और बाढ़ के योग
मानसून की यह रफ्तार जुलाई में और विकराल रूप ले सकती है। ग्रहों की स्थिति इशारा कर रही है कि जुलाई महीने में मुंबई सहित महाराष्ट्र के तटीय इलाकों, गुजरात, मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों और दक्षिण भारत में भारी से बहुत भारी वर्षा होगी। इस दौरान नदी-नाले उफान पर आ सकते हैं और कुछ इलाकों में बाढ़ जैसे हालात भी बन सकते हैं।<br />
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