Kota Division Wildlife Sanctuary: राजस्थान का कोटा संभाग वन्यजीव और प्राकृतिक सौंदर्य का महत्वपूर्ण केंद्र है. यहां घने वन, पहाड़ी क्षेत्र और घासभूमियां विविध वन्यजीवों का आश्रय स्थल हैं. दर्रा, रामगढ़ विषधारी और सोरसन जैसे अभयारण्य तेंदुआ, बाघ, भालू, हिरण, चिंकारा और सैकड़ों पक्षी प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास प्रदान करते हैं. सोरसन अभयारण्य प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है, जबकि रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व बाघ संरक्षण का प्रमुख केंद्र है. ये सभी क्षेत्र न केवल जैव विविधता को बढ़ावा देते हैं, बल्कि पर्यटन, शोध और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं.
कोटा संभाग राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है, जिसमें कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ जिले शामिल हैं. प्राकृतिक संपदा और जैव विविधता से समृद्ध इस संभाग में तीन प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य स्थित है. जिसमें दर्रा वन्यजीव अभयारण्य, जवाहर सागर वन्यजीव अभयारण्य और राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य शामिल है. ये अभयारण्य वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.दर्रा वन्यजीव अभयारण्य जिसे अब मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व के नाम से जाना जाता है दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में कोटा और झालावाड़ जिलों में फैला एक प्रमुख संरक्षित क्षेत्र है. मूल रूप से 1955 में स्थापित यह अभयारण्य कोटा के शाही परिवारों का शिकारगाह हुआ करता था.
दर्रा वन्यजीव अभयारण्य राजस्थान के कोटा जिले से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित एक प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य है. लगभग 250 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह अभयारण्य कभी कोटा रियासत के महाराजाओं और शाही परिवार का शिकार क्षेत्र हुआ करता था. वर्ष 1955 में इसे वन्यजीव अभयारण्य का दर्जा प्रदान किया गया. यह क्षेत्र अपनी घनी वनस्पति, पहाड़ी भू-भाग और विविध वन्यजीवों के लिए जाना जाता है. यहां तेंदुआ, भालू, हिरण, जंगली सूअर और कई प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं. दर्रा अभयारण्य जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र भी है.
घने वनों और पहाड़ी भू-भाग से आच्छादित यह क्षेत्र प्राकृतिक संपदा से भरपूर है. यहां चिंकारा, सांभर, नीलगाय, भेड़िया, तेंदुआ, रीछ, चित्तीदार हिरण तथा जंगली सूअर जैसे अनेक वन्यजीव पाए जाते हैं. इसके अतिरिक्त यहां कई दुर्लभ और औषधीय गुणों वाले वृक्ष एवं वनस्पतियाँ भी मौजूद हैं, जो इसकी जैव विविधता को समृद्ध बनाती हैं. अभयारण्य में कोटा के पूर्व शासकों द्वारा निर्मित पुराने शिकार विश्रामगृह आज भी मौजूद हैं, जो इसके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं. प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीवों की विविधता और शाही विरासत के कारण दर्रा वन्यजीव अभयारण्य राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है.
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रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व राजस्थान के बूंदी जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण वन्यजीव अभयारण्य है. वर्ष 2022 में इसे भारत का 52वाँ बाघ अभयारण्य घोषित किया गया. लगभग 1500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह अभयारण्य रणथम्भौर और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के बीच वन्यजीवों के आवागमन के लिए एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर का कार्य करता है. यहां घने वन, पहाड़ी क्षेत्र और विविध जैव विविधता पाई जाती है. इस क्षेत्र में तेंदुआ, भालू, हिरण और अन्य वन्यजीवों की अच्छी संख्या मौजूद है. यह अभयारण्य पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और बाघ संरक्षण में अहम भूमिका निभाता है तथा पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र भी है.
यह क्षेत्र कभी हाड़ा चौहान शासकों के संरक्षण में था और अपनी समृद्ध प्राकृतिक तथा ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है. यहाँ बाघ, तेंदुआ, भालू, कैराकल, धारीदार लकड़बग्घा तथा 200 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं. धोक और सालर के घने वन इस क्षेत्र की जैव विविधता को समृद्ध बनाते हैं. यह इलाका वन्यजीवों के लिए अनुकूल आवास प्रदान करता है और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. अपनी प्राकृतिक सुंदरता, दुर्लभ वन्यजीवों और ऐतिहासिक महत्व के कारण यह क्षेत्र पर्यटन और शोधकर्ताओं के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यह संरक्षण और जैव विविधता का महत्वपूर्ण उदाहरण है.
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक आकर्षक पर्यटन स्थल है. यह स्थान वन संरक्षण, जैव विविधता और बूंदी की शाही विरासत का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है. यहां आने वाले पर्यटक घने जंगलों, पहाड़ी भू-भाग और विविध वन्यजीवों को नजदीक से देखने का अनुभव प्राप्त करते हैं. यह क्षेत्र न केवल बाघ संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है. प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण इसे विशेष बनाते हैं. रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व पर्यटकों को वन्य जीवन और प्रकृति का अनूठा, रोमांचक और यादगार अनुभव प्रदान करता है.
राजस्थान के बारां जिले की अंता तहसील में स्थित यह एक प्रमुख और संरक्षित पारिस्थितिक पर्यटन स्थल है. यह मुख्य रूप से घास के मैदानों, सुंदर झीलों और विविध वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध है. सोरसन वन्यजीव अभयारण्य राजस्थान का एक प्रसिद्ध पक्षी एवं वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र है, जिसे सोरसन घासभूमि के नाम से भी जाना जाता है. लगभग 41 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह अभयारण्य प्राकृतिक घासभूमियों, तालाबों, झीलों और झाड़ीदार वनस्पतियों से सुसज्जित है.
यह अभयारण्य पक्षी प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है. यहां ओरिओल, बटेर, तीतर, बया, रॉबिन तथा विभिन्न प्रकार के जलपक्षी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं. इसके अलावा चिंकारा और काला हिरण जैसे वन्यजीव भी यहां आसानी से देखे जा सकते हैं. शीत ऋतु के दौरान सोरसन घासभूमि प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आश्रय स्थल बन जाती है. इस मौसम में वार्बलर, फ्लाईकैचर, लार्क, स्टार्लिंग और रोज़ी पास्टर जैसे अनेक प्रवासी पक्षी यहां आते हैं, जिससे इसकी जैव विविधता और भी समृद्ध हो जाती है. अपनी समृद्ध पक्षी संपदा, प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण के कारण सोरसन वन्यजीव अभयारण्य राजस्थान के महत्वपूर्ण प्रकृति पर्यटन स्थलों में गिना जाता है.
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