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महराजगंज जिले के ठूठीबारी क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध पंचमुखी शिव मंदिर तक पहुंचने का रास्ता अब आसान होने जा रहा है. लालपुर से इटहिया संपर्क मार्ग पर करीब एक करोड़ रुपये की लागत से पक्की सड़क का निर्माण शुरू हो गया है. लगभग 2200 मीटर लंबी इस सड़क के बनने से मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और आसपास के किसानों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी.

महराजगंज: उत्तर प्रदेश का महराजगंज जिला पड़ोसी देश नेपाल के साथ सीमा साझा करता है. देश के आखिरी छोर पर बसे होने की वजह से भी जिला काफी खास है. महराजगंज जिले के भारत नेपाल बॉर्डर एरिया में मौजूद प्राचीन पंचमुखी शिव मंदिर जिले का एक बड़ा धार्मिक स्थल है. भारत और नेपाल दोनों ही देश के लोग सावन के महीने में और शिवरात्रि के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में यहां पर पहुंचते हैं. यहां पर आने-जाने के लिए प्रमुख रोड काफी पहले से तैयार है लेकिन इसके साथ ही कुछ छोटे रास्ते ऐसे थे जो कच्चे थे उनकी वजह से यहां आने वाले श्रद्धालुओं को काफी समस्या होती थी. यहां की स्थिति ऐसी थी कि श्रद्धालु कच्ची सड़कों से होते हुए हैं या फिर एक लंबी दूरी से दूसरे रास्ते घूमते हुए यहां पहुंचते थे लेकिन अब इन स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए एक अच्छी खबर है.

पंचमुखी शिव मंदिर पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को एक बड़ी राहत मिलने वाली है. लालपुर से इटहिया आने वाली कच्ची सड़क को अब पक्की सड़क के रूप में बनाया जा रहा है जो एक लंबे समय से इसी स्थिति में था. लालपुर से इटहिया रोड से जोड़ने वाली सड़क का निर्माण कार्य शुरू हो गया है जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को इसका लाभ मिलने वाला है. इसके साथ ही इस क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों के लिए यातायात की सुविधा काफी सुगम होने वाली है.

एक करोड़ की लागत से हो रहा रोड का निर्माण

बाईस सौ मीटर लंबी इस सड़क का निर्माण कराया जा रहा है जिससे लालपुर से होते हुए इटहिया रोड में जोड़ दिया जाएगा. पहले इस रास्ते बरसात के समय में होकर गुजरना एक मुश्किल भरा काम था लेकिन सड़क के बन जाने के बाद स्थिति में काफी परिवर्तन देखने को मिलेगा.

इटहिया शिव मंदिर की बात करें तो यह जिले के एक प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है जहां सावन और शिवरात्रि के अवसर पर महराजगंज जिले के साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार और पड़ोसी देश नेपाल के अलग-अलग क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पर पहुंचते हैं. इटहिया शिव मंदिर से थोड़ी ही दूरी पर प्राचीन काली माता का मंदिर भी मौजूद है जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था का एक बड़ा केंद्र है. पहले यहां पहुंचने के लिए लोगों को कच्चे रास्तों से होते हुए गुजरना होता था जिसकी वजह से उन्हें काफी परेशानी होती थी. पहले लोग लालपुर गांव के बगल से गुजरने वाली नहर के किनारे से मंदिर पहुंचने थे और उन्हें बरसात के समय में काफी मशक्कत करनी पड़ती थी. अब पक्की सड़क बन जाने के बाद उनका मंदिर तक पहुंचना और मुख्य मार्ग तक जाना उनके लिए काफी आसान हो जाएगा.

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को होगी सुविधा

इस सड़क के बन जाने के बाद आसपास के गांव के लोगों को भी आने जाने में सुविधा होगी और इस मार्ग से लालपुर, लक्ष्मीपुर खुर्द, चटियां, भरवलियां, ठूठीबारी, रामनगर, मरचहवा, राजाबारी और अन्य दूसरे कई गांवों को इसका सीधा लाभ मिलने वाला है. इस रोड में से ही एक लिंक रोड प्राचीन काली मंदिर तक जाता है जिससे होकर श्रद्धालु प्राचीन काली माता मंदिर भी जा सकते हैं.

सही सड़क न होने की वजह से और पर्याप्त जानकारी न होने की वजह से पहले प्राचीन काली माता मंदिर श्रद्धालुओं का आना-जाना कम होता था लेकिन अब सड़क के बन जाने के बाद श्रद्धालुओं की आवागमन बढ़ने की संभावना है. इस सड़क के बन जाने के बाद स्थानीय लोगों के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटकों के लिए भी काफी सुविधा होगी जिसकी मदद से वह सीधा पंचमुखी शिव मंदिर आ सकते हैं.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

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