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जमशेदपुर की पुनीता कुमारी की कहानी जुनून और बदलाव की मिसाल है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कंप्यूटर शिक्षा से की और बाद में शेयर मार्केट व शिक्षण क्षेत्र में भी काम किया. वर्ष 2009 के बाद झारखंड के गांवों में मिट्टी की दीवारों पर बनी सोहराय चित्रकला ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया. उन्होंने इस पारंपरिक कला का प्रशिक्षण लिया और इसे अपना जुनून बना लिया. आज पुनीता “कलर एंड ब्रश” के माध्यम से सोहराय कला को बढ़ावा दे रही हैं. वे जूट बैग, फाइल फोल्डर और अन्य उत्पादों पर यह कला उकेरकर झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिला रही हैं.

जमशेदपुर : जिंदगी में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं जो इंसान की पूरी दिशा बदल देते है. जमशेदपुर की पुनीता कुमारी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिसकी यात्रा किसी रोलर कोस्टर राइड से कम नहीं रही. कभी बच्चों को कंप्यूटर की बेसिक शिक्षा देने वाली पुनीता आज झारखंड की पारंपरिक सोहराय कला को देश-दुनिया तक पहुंचाने का काम कर रही हैं.

करियर की शुरुआत कंप्यूटर शिक्षा से की
उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि अगर किसी काम के प्रति जुनून हो तो नई पहचान बनाना कभी भी संभव है. पुनीता कुमारी ने अपने करियर की शुरुआत कंप्यूटर शिक्षा से की थी. शुरुआती दिनों में वे बच्चों को बेसिक कंप्यूटर कोर्स सिखाती थीं और तकनीकी ज्ञान के क्षेत्र में सक्रिय थीं. शादी के बाद वे कुछ समय के लिए पंजाब में रहीं, जहां उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ जीवन का नया अध्याय शुरू किया.

इसके बाद वर्ष 2001 से 2009 तक वे दिल्ली में रहीं और इस दौरान शेयर मार्केट की दुनिया में भी काफी सक्रिय रहीं. लगातार नए क्षेत्रों में सीखने और खुद को ढालने की उनकी क्षमता ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. दिल्ली के बाद उनका सफर देवघर पहुंचा, जहां उन्होंने ट्यूशन पढ़ाने के साथ-साथ स्कूल में शिक्षक के रूप में भी काम किया.

झारखंड की पारंपरिक सोहराय कला की ओर बढ़ने लगी
हालांकि, उनकी जिंदगी में सबसे बड़ा बदलाव वर्ष 2009 के बाद आया. इसी दौरान उनकी रुचि झारखंड की पारंपरिक सोहराय कला की ओर बढ़ने लगी. जब वे झारखंड के विभिन्न गांवों में घूमने लगीं तो उन्होंने देखा कि गांवों की मिट्टी की दीवारों पर बेहद खूबसूरत चित्रकारी की गई है. यह सिर्फ सजावट नहीं थी, बल्कि झारखंड की संस्कृति, प्रकृति और परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति थी. यही दृश्य उनके मन को छू गया और उन्होंने इस कला को गहराई से समझने का फैसला किया.

सोहराय पेंटिंग को सीखने के लिए पुनीता ने कई प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और इस कला की बारीकियों को समझा. धीरे-धीरे यह रुचि उनका जुनून बन गई. आज वे न केवल खुद सोहराय पेंटिंग बनाती हैं, बल्कि विभिन्न कार्यशालाओं के माध्यम से बच्चों और युवाओं को भी इस कला के प्रति जागरूक कर रही हैं.

उनका मानना है कि झारखंड की यह अनमोल विरासत नई पीढ़ी तक पहुंचनी चाहिए ताकि इसकी पहचान और मजबूत हो सके. पुनीता कुमारी का अपना एक रचनात्मक प्लेटफॉर्म “कलर एंड ब्रश” है, जिसके माध्यम से वे सोहराय कला को नए स्वरूप में प्रस्तुत कर रही हैं. उनकी कला सिर्फ कैनवास तक सीमित नहीं है. वे जूट बैग, फाइल फोल्डर, हैंडमेड गिफ्टिंग प्रोडक्ट्स और कई उपयोगी वस्तुओं पर सोहराय पेंटिंग की खूबसूरत झलक उतारती हैं. उनके बनाए उत्पादों में झारखंड की संस्कृति, प्रकृति और लोककला की आत्मा दिखाई देती है.

आज पुनीता अपनी कला के जरिए न सिर्फ खुद की पहचान बना रही हैं, बल्कि झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम कर रही हैं. उनकी कहानी बताती है कि जुनून, मेहनत और अपनी जड़ों से जुड़ाव किसी भी व्यक्ति को एक नई पहचान दे सकता है.

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Amit Singh

8 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. क्राइम, खेल, …और पढ़ें

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