आयुर्वेद में कई ऐसे पौधों का वर्णन मिलता है जिनका उपयोग वर्षों से विभिन्न बीमारियों के उपचार में किया जाता रहा है. इन्हीं औषधीय पौधों में से एक है कंटकारी. यह पौधा अपने औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में विशेष महत्व रखता है. ग्रामीण क्षेत्रों में यह अक्सर खेतों के किनारे और खाली स्थानों पर उगा हुआ दिखाई देता है. आयुर्वेद विशेषज्ञ जमुना प्रसाद यादव के अनुसार कंटकारी का उपयोग खासतौर पर सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार और श्वसन संबंधी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है.
गोंडा: आयुर्वेद में कई ऐसे पौधों का वर्णन मिलता है जिनका उपयोग वर्षों से विभिन्न बीमारियों के उपचार में किया जाता रहा है. इन्हीं औषधीय पौधों में से एक है कंटकारी. यह पौधा अपने औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में विशेष महत्व रखता है. ग्रामीण क्षेत्रों में यह अक्सर खेतों के किनारे और खाली स्थानों पर उगा हुआ दिखाई देता है. आयुर्वेद विशेषज्ञ जमुना प्रसाद यादव के अनुसार कंटकारी का उपयोग खासतौर पर सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार और श्वसन संबंधी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है.
लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि कंटकारी का पौधा छोटे कांटों वाला होता है और इसके फल छोटे गोल आकार के होते हैं. आयुर्वेद में इसके फल, जड़, पत्तियां और फूल तक का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है. यह पौधा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मददगार माना जाता है.
सर्दी जुकाम बुखार में लाभकारी
जमुना प्रसाद यादव के अनुसार कंटकारी में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कफ को कम करने और श्वसन तंत्र को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं. सर्दी-जुकाम होने पर कंटकारी का काढ़ा बनाकर सेवन किया जाता है. इससे गले की खराश, बंद नाक और खांसी में राहत मिल सकती है. बुखार के दौरान भी इसका उपयोग पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है. कंटकारी का काढ़ा बनाने के लिए इसकी जड़ या पत्तियों को पानी में उबालकर तैयार किया जाता है. कुछ लोग इसमें तुलसी, अदरक और काली मिर्च भी मिलाते हैं. हालांकि किसी भी औषधीय पौधे का सेवन करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है.
पाचन तंत्र को रखता है दुरुस्त
जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि कंटकारी का उपयोग केवल सर्दी-जुकाम तक ही सीमित नहीं है. आयुर्वेद में इसे अस्थमा, सांस फूलने और कफ से जुड़ी अन्य समस्याओं में भी उपयोगी माना गया है. इसके अलावा यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकती है. कुछ पारंपरिक उपचारों में इसका प्रयोग पेट संबंधी समस्याओं के लिए भी किया जाता है. प्राकृतिक औषधियां लाभकारी हो सकती हैं, लेकिन इनका सही मात्रा में और उचित तरीके से उपयोग करना आवश्यक है. बिना जानकारी के किसी भी जड़ी-बूटी का अधिक सेवन नुकसानदायक भी हो सकता है. इसलिए किसी भी बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लेनी चाहिए.
जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि कंटकारी एक ऐसा औषधीय पौधा है जो आयुर्वेद में लंबे समय से उपयोग किया जा रहा है. सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार जैसी सामान्य समस्याओं में इसे लाभकारी माना जाता है. इसके औषधीय गुणों के कारण आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसका उपयोग घरेलू उपचार के रूप में करते हैं. हालांकि बेहतर स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार, स्वच्छ जीवनशैली और विशेषज्ञ की सलाह भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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