सुल्तानपुर के मिश्रपुर पुरैना गांव के रहने वाले श्याम बहादुरयादव लोकल 18 से बताते हैं कि उनके घर पर लगी गन्ना पेराई की यह मशीन उनके पिता द्वारा खरीदी गई थी जो आज के लगभग 30 साल पहले 20000 की थी. उन्होंने बताया कि यह मशीन पहले बैल से चलाई जाती थी लेकिन अब इसको मॉडिफाई कर दिया गया है और इसमें विद्युत संयंत्र का इस्तेमाल करके इसे बिजली के माध्यम से चलाया जाता है. वहीं अगर इसके वजन की बात करें तो यह सामान्य और वर्तमान की गन्ना पेराई के कोल्हू से लगभग 5 गुना अधिक वजन की हैं यानी कि इस कोल्हू का वजन 2 कुंतल से अधिक है और वर्तमान में इसका दाम 50000 से अधिक है हालांकि इस तरह का कोल्हू मिलना दुर्लभ है.
सुल्तानपुरः देश की आजादी के बाद से भारत में कृषि के क्षेत्र में निरंतर प्रगति की है और यही वजह रही है कि मशीनों के आविष्कार और कृषि के क्षेत्र में वैज्ञानिक और आधुनिक शोध और अनुसंधान ने गन्ना की खेती को आसान बनाया है. दरअसल आज हम बात करने वाले हैं आज के 30 वर्ष पहले गन्ने की पेराई करने वाली उस मशीन के बारे में जिसको पुराने समय के लोग बैल के माध्यम से चलाया करते थे, आज यह मशीन विलुप्त सी हो गई हैं. सुल्तानपुर के एक गांव में एक व्यक्ति के यहां यह मशीन अभी भी है और इसे मॉडिफाई करके किसान द्वारा संचालित किया जाता है.
दरअसल आज के समय में जो गन्ना पेराई की मशीन आ रही हैं उसका वजन बहुत कम होता है. यही वजह है कि लोग उसे एक जगह से दूसरी जगह पर आसानी से ले जा पाते हैं, लेकिन पुराने गन्ना की मशीन दो कुंतल से अधिक वजन की होती हैं, जिसकी वजह से उसको ले जाना आसान नहीं होता.
तीस साल पहले भी 20000 कीमत
सुल्तानपुर के मिश्रपुर पुरैना गांव के रहने वाले श्याम बहादुरयादव लोकल 18 से बताते हैं कि उनके घर पर लगी गन्ना पेराई की यह मशीन उनके पिता द्वारा खरीदी गई थी जो आज के लगभग 30 साल पहले 20000 की थी. उन्होंने बताया कि यह मशीन पहले बैल से चलाई जाती थी लेकिन अब इसको मॉडिफाई कर दिया गया है और इसमें विद्युत संयंत्र का इस्तेमाल करके इसे बिजली के माध्यम से चलाया जाता है. वहीं अगर इसके वजन की बात करें तो यह सामान्य और वर्तमान की गन्ना पेराई के कोल्हू से लगभग 5 गुना अधिक वजन की हैं यानी कि इस कोल्हू का वजन 2 कुंतल से अधिक है और वर्तमान में इसका दाम 50000 से अधिक है हालांकि इस तरह का कोल्हू मिलना दुर्लभ है.
श्याम बहादुर यादव आगे कहते हैं कि यह कोल्हू सुल्तानपुर जनपद में कुछ ही गांव में देखने को मिलेगा क्योंकि गन्ने की पेराई अब आधुनिक मशीनों के माध्यम से की जाती है.0यही वजह है कि लोगों ने इस तरह के कोल्हू को बेच दिया लेकिन यह मशीन आज भी लोग देखते हैं तो इसे ग्रामीण परंपरा की अमूल्य धरोहर के रूप में मानते हैं . बुजुर्ग लोग बताते हैं कि इन मशीनों को देखकर उन्हें उनका बीता हुआ जीवन याद आने लगता है.
होते थे वजनदार रोलर
पुराने समय की गन्ना पेराई की इस कोल्हू मशीन में दो बड़े-बड़े और वजनदार रोलर हुआ करते थे. जिसके बीच में छोटी सी जगह होती थी और उस छोटी सी जगह में दो से तीन गन्ना एक बार में डाला जाता था और उसे रोलर को बैल के माध्यम से वृत्ताकार तरीके से घुमाया जाता था. जैसे-जैसे रोलर घूमता था वैसे-वैसे गन्ना रोलर के बीच जाकर पिसता था और उससे रस निकलता था. रोलर के नीचे एक त्रिभुजाकार पनारा लोहे का होता था और इस पनारा के माध्यम से रस को किसी बर्तन में इकट्ठा किया जाता था लेकिन समय के साथ और इसकी उपयोगिता कम होने की वजह से आज यह मशीन विलुप्त होने की कगार पर है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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