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नीम की छाल एक प्राचीन आयुर्वेदिक उपचार है, जिसे फोड़े-फुंसी और पुराने घावों को ठीक करने के लिए बेहद प्रभावी माना जाता है. इसके औषधीय गुण त्वचा संक्रमण को कम करते हैं और घाव भरने की प्रक्रिया को तेज करते हैं. स्थानीय लोगों और आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, नीम की छाल का लेप बनाकर लगाने से लंबे समय से चले आ रहे जख्म भी ठीक हो सकते हैं.

भारत में प्राचीन काल से ही आयुर्वेद, जड़ी बूटियों को लेकर काफी लोगों का विश्वास रहा है. औषधीय में जड़ी बूटियां लोगों के स्वास्थ्य को काफी प्रभावित करती थी. ऐसे में आज हम बताने वाले हैं यदि आपके भी शरीर में किसी प्रकार का कोई फोड़ा फुंसी हो गया है या फिर कोई ऐसा जख्म हो गया है जो काफी दवाइयां करने के बाद भी नहीं ठीक हो रहा तो नीम के पेड़ की छाल आपके लिए यह एक अद्भुत और रामबाण इलाज साबित हो सकती है तो इस पर आइए जानते हैं किस तरह से नीम के पेड़ की छाल लोगों के घाव को ठीक करने में मदद करती है.

काफी पुराना है यह घरेलू नुस्खा 

स्थानीय निवासी गीता देवी बताती हैं कि यह नुस्खा काफी पुराना है. गांव में खेतों में काम करने वाले लोगों को जब पैर में फावड़ा लग जाता था या फिर अन्य किसी तरह की चोट लग जाती थी तो उस समय दवाइयां उपलब्ध नहीं हुआ करती थी. ऐसे में नीम की छाल को पत्थर पर रगड़कर उसका लेप बनाया जाता था और उसे घाव पर लगा दिया जाता था. जिससे पुराने से पुराना घाव भी कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता था.

पुराने घाव को भी कर देता है ठीक 

मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर में कार्यरत आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव ने लोकल 18 से बताया कि नीम की सूखी हुई छाल में कई तरह के औषधीय गुण पाए जाते हैं. सूखी हुई छाल को जिस जगह पर घाव हुआ होता है उस जगह पर लगाने से वह घाव ठीक हो जाता है. इस छाल की सबसे अच्छी खासियत है कि यह पुराने से पुराने घाव को भी ठीक कर देता है.

इस तरह बनाएं लेप 

घरेलू नुस्खे के लिए जाने जाने वाले स्थानीय योगेश कुमार पांडेय बताते हैं कि अगर आप भी इस घरेलू नुस्खे को आजमा कर अपने घाव को ठीक करना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले इसका लेप बनाना पड़ेगा इसका लेप बनाने के लिए सबसे पहले आप नीम के छाल को नीम के पेड़ से तोड़ कर ले आएं और उसके बाद किसी पत्थर पर 5-6 बूंद पानी डालकर नीम की छाल को अच्छे से रगड़ें. जब वह लेप की तरह बन जाए तो उसे घाव वाली जगह पर लगा लेना चाहिए.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

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