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प्रणित मोरे के शो में 370 रुपए की बिरयानी वाले कमेंट का वीडियो वायरल होने के बाद विवाद बढ़ता जा रहा है. वहीं, राम चरण स्टारर ‘पेद्दी’ में जाह्नवी कपूर के ऑब्जेटिफिकेशन को लेकर भी खूब विवाद हुआ. अब इन सब पर एक्ट्रेस मधु ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने फिल्मों को समाज का आईना बताया. उन्होंने कहा कि फिल्मों में पहले आसानी रेप सीन होते थे. रंजीत सर को रेप स्पेशलिस्ट कहा जाता था.

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मधु ने फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के बारे में बदलते ट्रेंड के बारे में बात की.

मुंबई. पिछले कुछ दिनों से सोसाइटी और फिल्मों में महिलाओं की इमेज को लेकर बहस चल रही है. 370 रुपए बिरयानी और ‘पेद्दी’ विवाद पर दिग्गज एक्ट्रेस मधु ने खुलकर बात की है. उन्होंने बताया कि फिल्मों में महिलाओं की छेड़खानी का गुणगान किया जाता है. इतना ही नहीं, उन्होंने पहले और अब की फिल्मों में महिलाओं के किरदारों में तुलना की है. उन्होंने कहा कि दिग्गज एक्टर रंजीत को रेप स्पेशलिस्ट होने का टैग भी मिला था. फिल्मों में आसानी रेप सीन को डाला जाता था. लेकिन अब ऐसा रेप सीन कम कर दिए गए हैं.

आईएएनएस के मुताबिक, मधु ने बताया कि साल 1991 में आई उनकी बॉलीवुड फिल्म ‘फूल और कांटे’ में छेड़छाड़ को महिमामंडित किया गया था. उन्होंने यह भी कहा कि अगर आज वही कंटेंट रिलीज होता, तो वह सामाजिक और कानूनी रूप से एक्सेप्ट नहीं किया जाता. मधु ने रेप सीन और बदलती दर्शकों की सोच पर भी बात की. मधु ने बताया कि सिनेमा के नियम बहुत बदल गए हैं.

मधु ने कहा,”पहले के समय में रेप सीन को बहुत आसानी से स्वीकार कर लिया जाता था, इसलिए लगभग हर फिल्म में ऐसे सीन होते थे. किसी ने इस पर सवाल नहीं उठाया. यहां तक कि रंजीत सर को ‘रेप स्पेशलिस्ट’ कहा जाता था. ऐसे सीन में खींचना, संघर्ष करना और हमला दिखाया जाता था. मैं भी ऐसे एक सीन का हिस्सा रही हूं.”

अब फिल्मों में कम हुए रेप सीन

मधु ने आज के माहौल से तुलना करते हुए कहा, “आज फिल्मों में रेप सीन बहुत कम दिखाए जाते हैं. अगर दिखाए भी जाते हैं तो बहुत छोटे तरीके से पेश किए जाते हैं.” उन्होंने कहा कि उनकी सुपरहिट फिल्म में छेड़छाड़ को रोमांस की तरह दिखाया गया था, जिसे आज के नजरिए से सही नहीं ठहराया जा सकता. इस सुपरहिट फिल्म का नाम ‘फूल और कांटे’ हैं, जिसमें अजय देवगन लीड हीरो थे.

जैसे-जैसे समाज बदला-फिल्में वैसे-वैसे फिल्में को भी वही दिखाना चाहिएः मधु

मधु ने सिनेमा और समाज के रिश्ते पर अपनी बात खत्म करते हुए कहा, “मैं यही कहना चाहती हूं कि हमारा सिनेमा हमारे समाज का आईना है. जैसे-जैसे समाज बदलता है, बातचीत का तरीका बदलता है, वैसे-वैसे फिल्मों को भी वही दिखाना चाहिए.”

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रमेश कुमारSenior Sub Editor

रमेश कुमार, सितंबर 2021 से बतौर सीनियर सब एडिटर न्यूज18 हिंदी डिजिटल से जुड़े हैं. एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रहे हैं. समय-समय पर विधानसभा-लोकसभा चुनाव पर भी काम करते हैं. इससे पहले हिंदीरश (पिंकविला) में एंटर…और पढ़ें

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