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Kanpur News: कहते हैं कि तंबाकू की तलब जिसे लग जाती है, उससे जल्दी छूटती नहीं है. इसके लिए CSJMU की औषधीय वाटिका उम्मीद की नई राह दिखा रही है, जिससे चुटकियों में तंबाकू की तलब से छुटकारा मिल जाता है.

कानपुर: तंबाकू और सिगरेट की लत से परेशान लोगों के लिए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) की औषधीय वाटिका उम्मीद की नई राह दिखा रही है. यहां मौजूद दहिपलाश (दहीमन) नाम का पौधा अपनी अनोखी खूबियों के कारण सबसे ज्यादा चर्चा में है. माना जाता है कि इस पौधे का स्पर्श तंबाकू की तलब को कम करने में सहायक होता है. यही वजह है कि विश्वविद्यालय की इस औषधीय वाटिका में आने वाले लोगों की नजर सबसे पहले इसी पौधे पर जाती है. खास बात यह है कि दहिपलाश के साथ यहां कई अन्य दुर्लभ और औषधीय गुणों वाले पौधों पर भी शोध किया जा रहा है.

दहिपलाश बना आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र
विश्वविद्यालय परिसर में विकसित की गई औषधीय वाटिका आज छात्रों और शोधार्थियों के लिए जीवंत प्रयोगशाला बन चुकी है. फार्मेसी, बायोटेक्नोलॉजी और केमेस्ट्री विभाग के छात्र यहां विभिन्न पौधों के औषधीय गुणों का अध्ययन कर रहे हैं. इन पौधों में दहिपलाश सबसे ज्यादा चर्चा में है. इसके गुणों को लेकर लगातार शोध कार्य किए जा रहे हैं और छात्र इसके औषधीय प्रभावों को समझने में जुटे हैं.

तंबाकू की तलब कम करने की मानी जाती है क्षमता
विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रो. सुधीर अवस्थी ने बताया कि दहिपलाश में ऐसे सक्रिय तत्व पाए जाते हैं, जिन्हें एंटी-टोबैको गुणों वाला माना जाता है. उन्होंने बताया कि तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों के लिए यह पौधा विशेष महत्व रखता है. इसकी टहनी को स्पर्श करने या इसकी लकड़ी को धारण करने को लाभकारी माना जाता है. इसी विशेषता के कारण यह पौधा औषधीय वाटिका का सबसे चर्चित पौधा बन गया है.

चूहों पर सफल रहे प्रारंभिक परीक्षण
प्रो. अवस्थी के अनुसार विश्वविद्यालय में औषधीय पौधों से तैयार विभिन्न उत्पादों और उनके गुणों पर लगातार अध्ययन किया जा रहा है. इनसे संबंधित कुछ परीक्षण चूहों पर किए गए, जिनके परिणाम सकारात्मक रहे. अब शोध को और आगे बढ़ाने की दिशा में काम चल रहा है. विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं में छात्र और वैज्ञानिक नई संभावनाओं पर अध्ययन कर रहे हैं.

दुर्लभ पौधों का अनोखा संसार
औषधीय वाटिका में दहिपलाश के अलावा इलायची, सुदर्शन, काली मिर्च समेत कई दुर्लभ और उपयोगी पौधे मौजूद हैं. इन पौधों का उपयोग औषधीय गुणों के अध्ययन और विभिन्न शोध परियोजनाओं में किया जा रहा है. यही वजह है कि यह वाटिका शोधकर्ताओं के लिए खास महत्व रखती है. यहां मौजूद पौधे न केवल जैव विविधता को समृद्ध कर रहे हैं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़े नए शोधों का आधार भी बन रहे हैं.

टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार हो रहे पौधे
विश्वविद्यालय पौधों के संरक्षण और तेजी से उत्पादन के लिए टिश्यू कल्चर तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है. इस तकनीक की मदद से कम समय में बड़ी संख्या में पौधे तैयार किए जा सकते हैं. इससे दुर्लभ प्रजातियों को संरक्षित करने के साथ-साथ उनके औषधीय उपयोगों पर भी तेजी से काम किया जा रहा है.

आम लोगों तक भी पहुंचाए जाएंगे पौधे
विश्वविद्यालय की योजना भविष्य में इन औषधीय पौधों को आमजन तक पहुंचाने की है. इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. इससे लोगों को अपने घरों में औषधीय महत्व वाले पौधे लगाने का अवसर मिलेगा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी. साथ ही विश्वविद्यालय को भी आय का एक नया स्रोत प्राप्त होगा.

कानपुर के CSJMU की यह औषधीय वाटिका आज शोध, स्वास्थ्य और प्रकृति का अनूठा संगम बन चुकी है. दहिपलाश जैसे पौधों की वजह से यह वाटिका लोगों के बीच तेजी से पहचान बना रही है और आने वाले समय में औषधीय शोध के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकती है.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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