मैक्सिको में 12 जून से फीफा विश्व फुटबॉल चैंपियनशिप का आयोजन हो रहा है। इसको लेकर देश में फुटबॉल प्रेमियों में उत्साह का माहौल है। हालांकि, दिल्ली के कई खिलाड़ियों और कोच ने भारतीय फुटबॉल की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि भारत में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते।
खिलाड़ियों का कहना है कि फीफा जैसे बड़े टूर्नामेंट में हिस्सा लेने का सपना देखने वाले अनेक भारतीय खिलाड़ी बेहतर अवसरों और सुविधाओं की तलाश में दूसरे देशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। उनका कहना है कि यदि भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रशिक्षण सुविधाएं और मजबूत प्रतियोगी ढांचा तैयार हो तो भारतीय खिलाड़ी भी विश्व फुटबॉल में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। दिल्ली के फुटबॉल प्रशिक्षकों ने कहा कि जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की खोज और उनके विकास के लिए अधिक प्रयास किए जाने चाहिए।
उनका कहना है कि केवल बड़े शहरों ही नहीं, बल्कि छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी फुटबॉल प्रतिभाओं की भरमार है, जिन्हें सही मार्गदर्शन और संसाधनों की जरूरत है। खिलाड़ियों और कोचों ने खेल मंत्रालय तथा संबंधित खेल संस्थाओं से भारतीय फुटबॉल के विकास के लिए विशेष नीति बनाने की मांग की है। फीफा वर्ल्ड कप में भारत की मौजदूगी बनाने के लिए एक नई रणनीति बनाने और नाम दर्ज कराने की अनुमति भी मांगी है।
1950 में विश्व क्वालीफाई कर इतिहास रचा था
फीफा विश्व कप के इतिहास में भारत ने 1950 में विश्व कप के लिए क्वालीफाई कर इतिहास रचा था, लेकिन विभिन्न कारणों से टीम ने टूर्नामेंट से अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद आज तक भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम फीफा विश्व कप के मुख्य दौर में जगह नहीं बना सकी है।
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