-महापौर सुनीता दयाल और नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के नेतृत्व में 5567 करोड़ के बजट को मिली मंजूरी
-कार्यकारिणी सदस्यों के एक-एक करोड़ रुपये के प्रस्ताव को किया गया निरस्त, सदन में कई मुद्दों पर हुई तीखी बहस
-सफाई, सड़क, प्रकाश, जल निकासी और जनसुविधाओं पर फोकस; विकास कार्यों को मिली नई गति
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। नगर निगम गाजियाबाद की बोर्ड बैठक शुक्रवार को राजनीतिक गर्माहट, तीखी बहस और जोरदार हंगामे के बीच संपन्न हुई। हालांकि कई मुद्दों पर पार्षदों और अधिकारियों के बीच मतभेद सामने आए, लेकिन अंतत: शहर के विकास को नई दिशा देने वाले वित्तीय वर्ष 2026-27 के 5567.42 करोड़ रुपये के महत्वाकांक्षी बजट पर सदन की मुहर लग गई। नगर निगम प्रशासन ने इसे गाजियाबाद के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। नगर निगम सभागार में महापौर सुनीता दयाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक की शुरुआत वंदे मातरम् के साथ हुई। बैठक में नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक, अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार, सहायक नगर आयुक्त पल्लवी सिंह, अपर नगर आयुक्त जंग बहादुर यादव, मुख्य अभियंता एन.के. चौधरी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार, उद्यान प्रभारी डॉ. अनुज कुमार सिंह, जलकल महाप्रबंधक के.पी. आनंद सहित बड़ी संख्या में पार्षद और अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान सबसे अधिक चर्चा नगर निगम कार्यकारिणी सदस्यों को एक-एक करोड़ रुपये के विकास बजट आवंटन को लेकर हुई। कई पार्षदों ने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए विरोध दर्ज कराया। सदन में तीखी बहस और हंगामे के बाद महापौर सुनीता दयाल ने स्वयं पहल करते हुए इस प्रस्ताव को निरस्त करने का निर्णय लिया। उन्होंने सदन से समर्थन मांगा, जिस पर अधिकांश पार्षदों ने हाथ उठाकर प्रस्ताव रद्द करने के पक्ष में मतदान किया।
इस निर्णय के बाद विकास कार्यों के लिए बजट को अधिक व्यापक और संतुलित तरीके से उपयोग करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि सभी वार्डों में समान रूप से विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि किसी क्षेत्र के साथ भेदभाव की स्थिति न बने। बैठक के दौरान भाजपा पार्षद राजीव शर्मा ने कूड़ा उठाने वाली जीरोन कंपनी को भुगतान और पूर्व में दर्ज एफआईआर का मुद्दा उठाया। इस पर नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने स्पष्ट किया कि कंपनी को निर्धारित कार्यों के आधार पर भुगतान किया गया है तथा एफआईआर से संबंधित मामला पूर्व का है, जिस पर विधिक प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की गई है। नगर आयुक्त ने कहा कि निगम प्रशासन पारदर्शिता और नियमों के अनुरूप कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।
महापौर सुनीता दयाल ने भी स्पष्ट शब्दों में कहा कि नगर निगम की प्राथमिकता शहर का विकास और जनहित है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में नगर निगम ने बड़े पैमाने पर सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया है और जनहित के मुद्दों पर हमेशा दृढ़ता से निर्णय लिए गए हैं। सदन में कई पार्षदों ने उनकी कार्यशैली और विकास कार्यों की सराहना भी की। नगर निगम बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल 3510.74 करोड़ रुपये की आय और लगभग 2954 करोड़ रुपये के विकास एवं जनहित कार्यों पर व्यय के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस बजट में सड़क निर्माण, जल निकासी, सीवर व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था, सफाई व्यवस्था, उद्यान विकास, खेल सुविधाएं, शिक्षा, पुस्तकालय और अन्य नागरिक सुविधाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई है।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि शहर में हैंडपंप लगाने की योजना को फिलहाल आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और आवश्यकता अनुसार आधुनिक जल आपूर्ति व्यवस्था एवं सबमर्सिबल प्रणाली को प्राथमिकता दी जाएगी। पथ प्रकाश व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए विशेष बजट स्वीकृत किया गया। नगर आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खराब स्ट्रीट लाइटों को समयबद्ध तरीके से ठीक कराया जाए। शहर की सफाई व्यवस्था पर भी गंभीर चर्चा हुई। रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बाद नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने संबंधित ठेके को निरस्त करने की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सफाई व्यवस्था में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जनहित सर्वोपरि रहेगा।
बैठक में लगभग 80 प्रस्तावों पर विचार किया गया, जिनमें से अधिकांश विकास कार्यों से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई। आरडीसी क्षेत्र की व्यावसायिक संपत्तियों पर कर निर्धारण, एलआईयू के लिए भूमि आवंटन, बाजारों के चौकीदारी शुल्क निर्धारण तथा अवैध रूप से सड़क किनारे निर्माण सामग्री रखने वालों पर कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने कहा कि नगर निगम का लक्ष्य गाजियाबाद को आधुनिक, स्वच्छ और सुव्यवस्थित शहर के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि बजट का प्रत्येक रुपया नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर खर्च किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। करीब चार घंटे तक चली इस बोर्ड बैठक में भले ही कई मुद्दों पर तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला, लेकिन अंतत: विकास कार्यों के लिए बड़ी वित्तीय स्वीकृति मिलने से आने वाले समय में शहर के बुनियादी ढांचे और जनसुविधाओं को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। नगर निगम प्रशासन का मानना है कि यह बजट गाजियाबाद को बेहतर और विकसित शहर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
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