मुल्लांपुर के मैदान पर मानव सुथार ने जिस तरह के पारंपरिक स्पिन गेंदबाजी उसने फिर उन बाएं हाथ के उन स्पिन गेंदबाजों की तस्वीर सामने ला दी जिन्होंने अपने बॉलिंग एक्शन, स्पिन कराने की कला और बल्लेबाजों को हवा में बीट करने की कला ने उनको ना सिर्फ अपने कप्तान का फेवरेट बनाया साथ ही वर्ल्ड क्रिकेट का ध्यान भी अपनी तरफ खीचा.
दिलीप दोषी का जलवा
बिशन सिंह बेदी के बाद उस दौर में सबसे बेहतरीन बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज के रूप में दिलीप दोशी ने इंट्री की. 1979 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ डेब्यू करते हुए दोशी ने 6 विकेट लेकर शानदार शुरुआत की. उनकी गेंदबाजी की खासियत थी क्लासिक लेफ्ट आर्म स्पिन, बेहतरीन फ्लाइट और लगातार एक ही लाइन पर गेंद डालने की क्षमता. उनका पहला टेस्ट शिकार था ऑस्ट्रेलिया के ओपनर ग्राहम यालोप. दिलीप दोषी का रिकॉर्ड मुल्लांपुर में मानव सुथार नेन तोड़ा.
प्रज्ञान ओझा की आंधी
इसके बाद आते हैं मौजूदा सेलेक्टर प्रज्ञान ओझा. 2009 में श्रीलंका के खिलाफ कानपुर टेस्ट में डेब्यू करते हुए ओझा ने 4 विकेट झटके. उनकी गेंदों में जबरदस्त टर्न और कंट्रोल था. ओझा की खासियत यह थी कि वह लंबी स्पेल में भी अपनी लाइन-लेंथ नहीं खोते थे. उनका पहला टेस्ट विकेट था उपुल थरंगा, जो उस समय श्रीलंका के भरोसेमंद बल्लेबाज थे. बाद में ससपेक्ट बॉलिंग एक्शन की वजह से उनका करियर छोटा रह गया.
अक्षर पटेल की पहेली
तीसरा नाम है अक्षर पटेल का 2021 में इंग्लैंड के खिलाफ चेन्नई में डेब्यू करते हुए अक्षर ने 7 विकेट लेकर तहलका मचा दिया. उनकी गेंदबाजी की सबसे बड़ी ताकत है सटीकता और तेज रफ्तार से आने वाली गेंदें, जो बल्लेबाज को सोचने का मौका ही नहीं देतीं. उनका पहला टेस्ट शिकार था इंग्लैंड के कप्तान जो रूट जो इस उपलब्धि को और भी खास बनाता है.
राजू की रंगबाजी
चौथे खिलाड़ी हैं वेंकटपति राजू 1989 में न्यूजीलैंड के खिलाफ डेब्यू करते हुए राजू ने 4 विकेट लिए. उनकी गेंदबाजी में पारंपरिक स्पिन के साथ-साथ चतुराई भी थी. उनका पहला विकेट था जॉन राइट, जो बाद में भारत के कोच भी बने.
मनिनंदर सिंह का मैजिक
पांचवें नाम के रूप में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. 1982 में पाकिस्तान के खिलाफ डेब्यू करते हुए मनींदर ने 3 विकेट लिए. उनकी गेंदबाजी में शानदार टर्न और फ्लाइट थी, जिससे बल्लेबाज अक्सर गलती कर बैठते थे. उनका पहला टेस्ट विकेट था मोहसिन खान. इन सभी गेंदबाजों में एक समानता थी पहले ही मैच में आत्मविश्वास और आक्रामक सोच. इन्होंने अपने डेब्यू को सिर्फ एक शुरुआत नहीं, बल्कि एक बयान बना दिया भारतीय क्रिकेट में लेफ्ट आर्म स्पिन की यह विरासत आज भी जारी है, और हर नई पीढ़ी इससे प्रेरणा लेती है.
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