बॉलीवुड में अब भारी बजट की फिल्में बनाने का चलन है. अब हर दूसरी-तीसरी फिल्म का बजट 100 करोड़ रुपये होता है. कुछ फिल्मों का बजट तो 200-300 करोड़ के आंकड़े को भी छू रहा है. फिल्म का कंटेट-विषय अच्छा हो और स्क्रीनप्ले-सिनेमेटोग्राफी अच्छी हो तो छोटे बजट की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच देती हैं. ऐसा कई बार देखने को मिल चुका है. 90 के दशक में पिद्दी से बजट में बनी दो फिल्मों ने जबरदस्त कमाई की थी. दोनों ही फिल्मों में सिर्फ एक एक्शन सीन था. दोनों फिल्मों की कहानी भी काफी-मिलती जुलती थी. एक मूवी ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर रही तो दूसरी फिल्म सुपरहिट साबित हुई.
90 के दशक में म्यूजिकल रोमांटिक फिल्मों का चलन बहुत ज्यादा था. फिर भी बीच-बीच में सनी देओल की ‘घायल’ और ‘घातक’ जैसी एक्शन फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार बिजनेस किया. कुछ म्यूजिक रोमांटिक फिल्मों में सिर्फ एक फाइट सीन देखने को मिला. पिद्दी से बजट में बनीं ऐसी ही दो फिल्में दो साल के अंतराल में रिलीज हुई थीं. दोनों में सिर्फ एक फाइट सीन था. दोनों फिल्मों का म्यूजिक ब्लॉकबस्टर था. दोनों फिल्मों की स्टोरी की बेसिक थीम मिलती-जुलती थी. दोनों फिल्मों का लीड हीरो सेम था. एक फिल्म ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर रही तो दूसरी सुपरहिट निकली. ये फिल्में थीं : दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे और परदेस.
यश चोपड़ा की 1993 में ‘डर’ फिल्म ब्लॉकबस्टर रही थी. वो अपनी फिल्म का जश्न मना ही रहे थे कि उनके बड़े बेटे आदित्य चोपड़ा ने डायरेक्टर बनने की ख्वाहिश जारी की. आदित्य की बात सुनकर यश चोपड़ा खुश हो गए. आदित्य ने छोटी सी कहानी सुनाई. पिता ने हौसला बढ़ाया. पूरे दो साल में फिल्म बनकर तैयार हुई. फिल्म की काफी शूटिंग यूरोप में हुई. मूवी ने रिलीज होते ही इतिहास रच दिया. हम बात कर रहे हैं 20 अक्टूबर 1995 को दीपावली के दिन रिलीज हुई ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ फिल्म की. इस फिल्म का नाम लिए बिना हिंदी सिनेमा अधूरा है. इसी फिल्म ने शाहरुख खान-काजोल को सुपरस्टार बनाया. मजेदार बात यह है कि फिल्म में एकमात्र फाइट सीन था जिसे शाहरुख खान ने अपनी जिद पर रखवाया था. आइए जानते हैं इस मूवी से जुड़े दिलचस्प फैक्ट्स..
‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ फिल्म का डायरेक्शन आदित्य चोपड़ा ने किया था. प्रोड्यूसर यश चोपड़ा थे. स्टोरी-स्क्रीन सबकुछ आदि ने ही लिखा था. शाहरुख खान, काजोल, अमरीश पुरी लीड रोल में नजर आए थे. इसके अलावा, फरीदा जलाल, अनुपम खेर, परमीत सेठी, मंदिरा बेदी, करण जौहर जैसे सितारे सपोर्टिंग रोल में थे. कहा जाता है कि हर किसी को अपनी जिंदगी में एक बार यह मूवी जरूर देखनी चाहिए. फिल्म का ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर म्यूजिक संगीतकार जतिन-ललित की जोड़ी ने कंपोज किया था. फिल्म में कुल 7 गाने थे. हर गाना सुपर-डुपर हिट था. मजेदार बात यह है कि जतिन-ललित ने ‘मेहंदी लगाके रखना’ गाने के डमी बोल ‘मेहंदी लगा के चलना, पायल बजा के चलना’ लिखे थे. बाद में गीतकार आनंद बख्शी ने इसे बदल दिया था. उन्होंने ही ‘ये कुड़ियां नशे की पुड़ियां, ये मुंडे, गुंडे के गली’ ओपनिंग लाइनें लिखी थीं. उसका म्यूजिक भी बनाया था.
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‘डीडीएलजे’ ऐसी मूवी के जिसका हर सीन, हर डायलॉग सिनेप्रेमियों के जेहन में बसा हुआ है. फिल्म की पूरी कहानी दिल-दिमाग में है. फिल्म में सिर्फ एक फाइट सीन था. मजेदार बात तो यह है कि डायरेक्टर आदित्य चोपड़ा फिल्म में एक भी फाइट सीन नहीं रखना चाहते थे. उधर, शाहरुख खान की इच्छा थी कि मूवी में कोई फाइट सीन हो. शाहरुख खान ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने कैमरामैन को लेकर फाइट सीन शूट कर लिया. जब आदित्य चोपड़ा-यश चोपड़ा को पता चला तो वो खासे नाराज हुए. खैर शाहरुख खान ने उन्हें किसी तरह मनाया. फिल्म का एक मात्र फाइट सीन मूवी में रख लिया गया. मूवी जब रिलीज हुई तो इतिहास ही रच दिया.
डीडीएलजे का हर सीन आइकॉनिक था. राज-सिमरन, करवा चौथ, सेनोरीटा जैसे शब्द आज भी सिनेप्रेमी भूले नहीं हैं. फिल्म के गाने तो अच्छे थे ही लेकिन उनका फिल्मांकन और प्लेसमेंट और भी जबर्दस्त था. बहुत कम लोग जानते होंगे आशा भोसले ने जतिन-ललित को यश चोपड़ा से मिलवाया था. ‘रुक जा ओ दिल दीवाने पूछूं तो मैं जरा’ गाने की शुरुआत में जो पियानो आपको सुनाई देता है, उसे आदित्य चोपड़ा ने ही बजाया था. आदित्य चोपड़ा ने ही ‘तुझे देखा तो ये जाना सनम’ गाने का मुखड़ा लिखा था.
‘फाइट सीन’ के बाद फिल्म के आइकॉनिक ट्रेन सीन को भला कौन भुला सकता है. फिर उस समय अमरीश पुरी साहब का कालजयी डायलॉग ‘जा सिमरन जा’ अमर हो गया. 4 करोड़ के बजट में बनी डीडीएलजे ने 103 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी. यह बॉलीवुड की सबसे बेस्ट फिल्मों में से एक है. डीडीएलजे ने एक नेशनल अवॉर्ड और 10 फिल्मफेयर अवॉर्ड समेत कुल 15 अवॉर्ड मिले थे. डीडीएलजे ने उस समय सभी बॉलीवुड फिल्मों का रिकॉर्ड तोड़ दिया था. सिनेमाघरों में सबसे ज्यादा दिन चलने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी डीडीएलजे के नाम है.
भारतीय संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों की खुशबू का संयोजन करके आदित्य चोपड़ा ने ‘डीडीएलजे’ बनाई थी. फिल्म की सफलता में इन्हीं एलिमेंट का हाथ रहा. शाहरुख खान ने अपने एक इंटरव्यू में फिल्म की सफलता की वजह का खुलासा करते हुए कहा था, ‘उन दिनों एक्शन फिल्में बनती थीं. डीडीएलजे फिल्म बहुत ही हटकर थी. उन दिनों हीरो-हीरोइन फिल्मों में घर से भागकर शादी कर लेते थे. डीडीएलजे में एक प्रोग्रेसिवनेस थी. राज-सिमरन मां-बाप की मर्जी से शादी करने की बात करते हैं. आदि-करण, काजोल और हम सब यंग थे और दोस्त थे. हंसते-खेलते फिल्म बन गई.’
‘डीडीएलजे’ से मिलती-जुलती थीम पर सुभाष घई की एक फिल्म ‘परदेस’ 1996 में रिलीज हुई थी. उनकी 1995 में ‘त्रिमूर्ति’ डिजास्टर साबित हुई. ऐसे में उन्होंने कम बजट की फिल्म’परदेस’ बनाई जिसमें शाहरुख खान-महिमा चौधरी लीड रोल में थे. महिमा चौधरी की यह डेब्यू फिल्म थी. इस फिल्म में भारतीय और पश्चिमी संस्कृति के अंतर को बखूबी दिखाया गया. म्यूजिक नदीम-श्रवण का था. फिल्म में अमरीश पुरी, आलोक नाथ, दीना पाठक और हिमानी शिवपुरी ने भी अहम रोल निभाए थे. अमरीश पुरी इस फिल्म में भी ‘डीडीएलजे’ की तरह लास्ट सीन में नजर आते है. वो गंगा (महिमा चौधरी’ को शाहरुख खान के साथ जाने की इजाजत दे देते हैं.
परदेस में शाहरुख खान ने अर्जुन नाम के लड़के का रोल निभाया था. जो विदेश में रहता जरूर है लेकिन भार तीय संस्कृति पर विश्वास करता है. फिल्म के म्यूजिक लॉन्च के मौके पर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी भी पहुंचे थे. फिल्म के दो गानों ‘यह दिल दीवाना’ और ‘मेरी महबूबा’ ने धूम मचा दी थी. नदीम-श्रवण ने अपने करियर का बेस्ट म्यूजिक इस फिल्म में दिया, जिसमें कुछ-कुछ एआर रहमान जैसी फीलिंग आती है. यह किस्सा भी मशहूर है कि नदीम-श्रवण ने म्यूजिक देने से पहले ब्रांडेड कार प्रोड्यूसर सुभाष घई से ली थी.
इस फिल्म में भी सिर्फ एक फाइट सीन देखने को मिला था. ठीक डीडीएलजे की तरह. उसी दौरान ‘नहीं होना था, नहीं होना था, लेकिन हो गया यार, हो गया है मुझे प्यार’ गाना बैकग्राउंड में चलता है. इस गाने को अलका याज्ञनिक, उदित नारायण, हेमा सरदेसाई और सबरी ब्रदर्स ने गाया है. परदेश फिल्म सुपरहिट रही थी. 8 करोड़ी फिल्म ने 40 करोड़ रुपये का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था.
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