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राजधानी में अग्नि सुरक्षा मानकों और भवन उपविधियों के उल्लंघन के खिलाफ दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग की ओर से चलाए जा रहे विशेष निरीक्षण अभियान के तहत रविवार को विभिन्न जिलों में व्यापक कार्रवाई हुई। संयुक्त निरीक्षण टीमों ने 130 से अधिक परिसरों की जांच की, जिनमें होटल, गेस्ट हाउस, बैंक्वेट हॉल, स्कूल, कोचिंग सेंटर, रेस्तरां, अस्पताल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल थे।

जांच के दौरान अनियमितताएं मिलने पर कई जगह नोटिस जारी किए गए, कुछ परिसरों को सील किया गया और अवैध निर्माण के मामलों में तोड़फोड़ की कार्रवाई भी की गई। राजस्व विभाग के अनुसार, सबसे अधिक 31 परिसरों का निरीक्षण पश्चिम जिले में किया गया, जहां सभी मामलों में नोटिस जारी किए गए।

उत्तर जिले में 16, पूर्वी जिले में 15, उत्तर-पश्चिम जिले में 13 और दक्षिण-पश्चिम जिले में 10 परिसरों पर कार्रवाई की गई। अधिकांश मामलों में अग्निशमन विभाग की एनओसी, भवन स्वीकृति योजना, सार्वजनिक लाइसेंस और सुरक्षा उपकरणों की कमी पाई गई है। 

इन परिसरों को किया गया सील 

निरीक्षण अभियान में गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर कई प्रतिष्ठानों के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई भी की गई। उत्तर-पश्चिम जिले के नांगलोई जाट क्षेत्र में स्थित द प्रैक्टिक होटल, मियांवाली नगर, रोहतक रोड को फायर एनओसी समाप्त होने, बेसमेंट के अवैध उपयोग और आपातकालीन निकास की अपर्याप्त व्यवस्था मिलने पर सील कर दिया गया। मध्य जिले में करोल बाग स्थित कैरोल गार्डन होटल को बिना फायर एनओसी संचालित पाए जाने पर परिसर सील करते हुए नोटिस जारी किया गया।

वहीं पटेल नगर क्षेत्र में अलमंड्ज होटल, जेपी इन होटल, राह हान होटल तथा मेट्रो व्यू इन होटल के खिलाफ भी सीलिंग आदेश जारी किए गए। इन परिसरों में आपातकालीन निकास अवरुद्ध मिलने, अग्निशमन उपकरण खराब होने तथा सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघन पाए गए। मध्य जिले में एक अन्य परिसर को भी सील किया गया और 11 निरीक्षणों में सीलिंग और नोटिस की संयुक्त कार्रवाई की गई।

अवैध निर्माण पर तोड़फोड़

राजस्व विभाग मध्य-उत्तर (सेंट्रल नॉर्थ) जिले में निरीक्षण के दौरान कुछ परिसरों के खिलाफ सीलिंग, तोड़फोड़ और कारण बताओ नोटिस की संयुक्त कार्रवाई की गई। दक्षिण-पूर्व जिले के मदनपुर खादर क्षेत्र में ओ-ज़ोन में किए जा रहे अवैध निर्माणों की पहचान की गई, जहां संबंधित संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी किए गए और आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण और भवन उपविधियों के उल्लंघन के मामलों में आवश्यकता पड़ने पर ध्वस्तीकरण कार्रवाई भी की जाएगी।

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