Pawan Singh: पावर स्टार पवन सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं. पवन सिंह भोजपुरी गायक और एक्टर से बहुत जल्द माननीय बन जाएंगे. लेकिन, लोकसभा चुनाव 2024 में आसनसोल से जिस शख्स को बीजेपी ने टिकट दिया, जिस शख्स ने बिहार चुनाव 2025 में ‘जोड़ी मोदी और नीतीश जी के हिट होई’ गाकर एनडीए को सत्ता में लाने में अहम रोल निभाया, क्या उस शख्स को एमएलसी बनाकर उसका कद कम नहीं किया गया? पवन सिंह को बीजेपी ने किस रणनीति के तहत एमएलसी का टिकट दिया है? क्या इसके पीछे बीजेपी का इंटरनल पॉलिटक्स या फिर इसके कुछ और मायने हैं?
पवन सिंह एमएलसी टिकट मिलने से खुश या निराश?
बीजेपी ने साल 2024 के लोकसभा चुनाव और 2026 के बंगाल चुनाव को ध्यान में रखकर फैसला किया था. बाद में वह बीते एक साल तक सीन से गायब रहे. लेकिन बिहार चुनाव से ठीक पहले उनको दोबारा से बीजेपी में लाया गया. पवन सिंह अचानक तब मीडिया में चर्चा में आ गए, जब वह दिल्ली में पार्टी के बड़े-बड़े नेताओं से मिलने लगे. उस समय के बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात हुई ही, नित्यानंद राय और उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेताओं के पैर छूकर आशीर्वाद लिया. बीजेपी सूत्रों की मानें तो पार्टी के बड़े नेता ने कहा कि वह उपेंद्र कुशवाहा से मिलें और काराकाट में उनके खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए माफी मांगे. पवन सिंह ने ठीक वैसा ही किया जैसे बीजेपी के बड़े नेता चाहते थे.
पवन सिंह एमएलसी का टिकट मिलने से खुश से या निराश?
बीजेपी में आते ही पवन सिंह को जेड प्लस कैटेगरी की सुरक्षा मिल गई. बिहार चुनाव 2025 में उन्होंने जमकर प्रचार किया. खासकर डेहरी-ऑन-सोन इलाके में बीजेपी के लिए जबरदस्त कैंपेन किया. बीजेपी ने उन्हें स्टार प्रचारक बनाकर पूरे बिहार में घुमाया. आरजेडी के खेसारी लाल यादव के मुकाबले बीजेपी को एक बड़ा भोजपुरी चेहरा मिल गया, जो आऱजेडी पर भारी पड़ा. बिहार चुनाव में उनका गाया गाना ‘जोड़ी मोदी-नीतीश की हिट’ काफी चर्चा में रहा.
बिहार विधान परिषद के लिए प्रत्याशी बनाए जाने के बाद पवन सिंह ने क्या कहा?
जेड प्लस सिक्योरिटी वाला लड़का एमएलसी बनेगा
बिहार चुनाव में कड़ी मेहनत के बाद पवन सिंह को लेकर तरह-तरह के कयास लगने शुरू हो गए. कहा गया का राज्यसभा की सीट खाली होने पर उन्हें बिहार से राज्यसभा भेजा जाएगा. लेकिन, इस साल बिहार की खाली हुई राज्यसभा की 5 सीटों में जब उनका नाम प्रत्याशी की लिस्ट में नहीं आया तो एक बार फिर से चर्चा शुरू हो गई पवन सिंह को क्यों नहीं भेजा गया? दरअसल, इस साल नीतीश कुमार, नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा औऱ शिवेश राम एनडीए प्रत्याशी के तौर पर जीत कर आए हैं. ऐसे में एनडीए के गणित में पवन सिंह फिट नहीं बैठे.
बीजेपी ने राज्यसभा क्यों नहीं भेजा?
लेकिन अब जब बिहार विधान परिषद की 4 सीटों पर बीजेपी ने अपने कैंडिडेट का ऐलान किया तो एक नाम पवन सिंह का भी था. पवन सिंह का एमएलसी टिकट मिलने पर उनको समर्थकों में नया उत्साह आ गया.सूत्रों की मानें तो पवन सिंह एमएलसी का टिकट मिलने से खुश नहीं नजर आए. पार्टी के बड़े नेताओं को इस भनक लगी तो पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन से लेकर प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और खुद सीएम सम्राट चौधरी ने पवन सिंह को फोनकर राजी किया. इसके बाद भरे मन से पवन सिंह शुक्रवार और शनिवार को पटना में नेताओं के यहां हाजिरी लगाते नजर आए.
पटना के भाजपा कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और पवन सिंह की मुलाकात.
बिहार में बीजेपी के लिए कितने अहम पवन सिंह
दरअसल, बीजेपी ने इस बार एमएलसी चुनाव के लिए जो सूची जारी की, उसमें पवन सिंह और संजय मयूख ही दो नेता हैं, जो सवर्ण समुदाय से आते हैं. पवन सिंह के अलावा बीजेपी के वरिष्ठ नेता संजय मयूख को तीसरी बार एमएलसी बनने का मौका दिया है. पवन सिंह राजपूत समाज और संजय मयूख कायस्थ समाज से आते हैं. बीजेपी की सूची में अनिल ठाकुर और शीला पंडित का भी नाम है. अनिल ठाकुर नाई समुदाय से आते हैं, जबकि शीला पंडित प्रजापति कुम्हार समाज से ताल्लुक रखती हैं. इन दोनों नामों के जरिए बीजेपी ने अति पिछड़ा वर्ग को साधने की कोशिश की है.
बिहार विधान परिषद के लिए प्रत्याशी बनाए जाने के बाद पवन सिंह ने कहा, ‘पार्टी मेरी मां है. मैं बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को धन्यवाद देता हूं. पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन और प्रदेश अध्यक्ष सरावगी जी मेरे अभिभावक हैं. पवन सिंह ने एक्स पर भी पोस्ट कर पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के अलावा सीएम सम्राट चौधरी और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी का आभार जताया.
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