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दिल्ली के मालवीय नगर में हाल ही में हुई दुखद घटना के बाद इलाके में अब भी डर और चिंता है। स्थानीय निवासी अब भी उस भयावह दृश्य को भुला नहीं पा रहे हैं। लोगों का कहना है कि उस दिन जो कुछ उन्होंने देखा, उसकी याद आज भी उन्हें झकझोर देती है। कई परिवार अब भी सदमे में हैं।

स्थानीय निवासियों के अनुसार हादसे के दौरान चारों ओर अफरा-तफरी थी। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि चीख-पुकार और मदद की गुहार का यह दृश्य बेहद भयावह था।




Delhi Fire News Fear and anxiety still linger in the area after the incident

दिल्ली के होटल में लगी आग
– फोटो : पीटीआई


लोगों ने भवनों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासन को सभी होटल, गेस्ट हाउस और अन्य बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच कराने के लिए अभियान चलाना चाहिए। लोगों का मानना है कि फायर सेफ्टी, आपातकालीन निकास मार्ग और सुरक्षा मानकों की नियमित जांच आवश्यक है।


Delhi Fire News Fear and anxiety still linger in the area after the incident

दिल्ली के होटल में लगी आग
– फोटो : पीटीआई


हादसे में घायल एक की हालत अब भी गंभीर

अग्निकांड में घायल लोगों का साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में इलाज चल रहा है। अस्पताल द्वारा शनिवार को जारी बुलेटिन के अनुसार 15 मरीज अब भी भर्ती हैं। इसमें 14 मरीज आईसीयू और वार्ड में भर्ती हैं। जबकि एक वेंटिलेटर सपोर्ट पर है। भर्ती मरीजों में से 13 विदेशी नागरिक हैं। 

 


Delhi Fire News Fear and anxiety still linger in the area after the incident

दिल्ली के होटल में लगी आग
– फोटो : अमर उजाला


पांच मरीजों की हालत में सुधार होने पर शनिवार को वेंटिलेटर सपोर्ट हटा लिया गया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार सभी मरीजों को चिकित्सा देखभाल, निरंतर निगरानी और विभिन्न विशेषज्ञों की टीम द्वारा उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। घटना वाले दिन बुधवार को अस्पताल में 39 लोगों को लाया गया था। इसमें 18 मृत अवस्था में लाए गए थे। 

 


Delhi Fire News Fear and anxiety still linger in the area after the incident

दिल्ली के होटल में लगी आग
– फोटो : अमर उजाला


हादसे के बाद इलाके में डर का माहौल है। उस दिन जो दृश्य देखने को मिला, उस मंजर को भूल पाना आसान नहीं है। लोगों की चीख-पुकार और अफरा-तफरी आज भी याद आती है तो मन विचलित हो जाता है। प्रशासन को सभी इमारतों की सुरक्षा जांच करानी चाहिए। – गौरव कुमार, स्थानीय


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