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मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत के बाद राजधानी के कई प्रमुख रेस्टोरेंट और नाइटलाइफ वाले इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस दर्दनाक घटना के बाद यह जांच और चिंता दोनों बढ़ गई है कि क्या दिल्ली के भीड़भाड़ वाले खाने पीने और मनोरंजन वाले इलाके किसी बड़े हादसे के लिए तैयार हैं। बृहस्पतिवार शाम को हुमायूंपुर, हौजखास गांव, शाहपुर जाट, मोती बाग, ग्रीन पार्क और यूसुफ सराय में जो स्थिति देखने को मिली, वह सुरक्षा मानकों की अनदेखी को दिखाती है। संकरी गलियां, भीड़, पुराने भवन और फायर सेफ्टी की कमी ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हुमायूंपुर: संकरी गलियों में भीड़ और कमजोर सुरक्षा व्यवस्था

शाम- 05:00 बजे

हुमायूंपुर में प्रवेश करते ही दोनों तरफ छोटे-छोटे रेस्तरां, कैफे और फास्ट फूड की दुकानें खुली नजर आईं। यह इलाका अब पूरी तरह से कमर्शियल हब बन चुका है, जबकि पहले यह एक रिहायशी इलाका था। शाम के समय यहां काफी भीड़ रहती है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर दिखी। कई दुकानों में फायर सेफ्टी उपकरण या तो मौजूद नहीं थे या फिर दिखाई ही नहीं दे रहे थे। कुछ जगहों पर छोटे अग्निशमन यंत्र रखे थे, लेकिन उनकी सर्विस कब हुई, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इमरजेंसी एग्जिट का कोई रास्ता भी नजर नहीं आया। हुमायूंपुर स्थित एक निजी कंपनी में कर्मचारी अंकित ने बताया कि अगर किसी एक रेस्तरां में आग लग जाए तो आसपास के इलाके को भी नुकसान पहुंच सकता है। गलियां इतनी संकरी हैं कि दो गाड़ियां भी ठीक से नहीं निकल पातीं। अगर आग लग जाए तो यहां दमकल की गाड़ी अंदर भी नहीं आ पाएगी।

हौजखास गांव: एक साथ सटी कई इमारतें बढ़ी रही खतरा

शाम- 06:00 बजे

हौज खास गांव में स्थिति और भी व्यस्त दिखी। यहां एक के बाद एक क्लब, बार और रेस्तरां चलते हैं। इमारतें पुरानी हैं और एक-दूसरे से सटी हुई हैं। कई जगह ऊपर जाने के लिए केवल संकरी सीढ़ियां ही दिखाई देती हैं। यहां रात के समय हजारों लोग आते हैं। भीड़ इतनी ज्यादा होती है कि कई बार चलना भी मुश्किल हो जाता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, अगर किसी इमारत में आग लग जाए तो लोगों के लिए बाहर निकलना बेहद कठिन होगा। कई बार में केवल एक ही मुख्य एग्जिट रास्ता है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है। एक रेस्तरां कर्मचारी प्रिंस ने बताया कि जगह की कमी के कारण अलग-अलग इमरजेंसी एग्जिट बनाना मुश्किल है। लेकिन भीड़ बढ़ने के साथ जोखिम भी बढ़ता जा रहा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, प्रशासन समय-समय पर निरीक्षण करता है, लेकिन नियमित निगरानी की कमी है।

शाहपुर जाट: रिहायशी इलाका व्यावसायिक इलाके में तब्दील

शाम-07:00 बजे

शाहपुर जाट इलाके में कई पुराने मकानों को बदलकर रेस्टोरेंट और बार बनाए गए हैं। यह इलाका मूल रूप से रिहायशी था, लेकिन अब यहां व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। कई इमारतें ऐसी हैं जो व्यावसायिक उपयोग के लिए बनी ही नहीं थीं, फिर भी उनमें रेस्तरां और कैफे चल रहे हैं। नीचे दुकानें और ऊपर लोग रह रहे हैं, जिससे सुरक्षा का खतरा और बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां गैस सिलिंडर खुले में रखे जाते हैं और कई जगह फायर सेफ्टी मानकों का पालन नहीं किया जाता। स्थानीय निवासी तरुणा ने बताया कि अगर आग लगती है तो ऊपर रहने वाले लोग फंस सकते हैं क्योंकि बाहर निकलने का सुरक्षित रास्ता नहीं है। वहीं, कुछ दुकानदारों के अनुसार, वह लाइसेंस प्रक्रिया में हैं, लेकिन जगह और ढांचे की सीमाओं के कारण सुरक्षा उपाय पूरे करना कठिन हो रहा है।

मोती बाग: छात्रों की भीड़, लेकिन सुरक्षा की अनदेखी

रात-08:00 बजे

मोती बाग इलाके में पहुंचते ही कॉलेज छात्रों की आवाजाही तेज दिखाई दी। यहां छोटे-छोटे रेस्तरां, ढाबे और कैफे लगातार भरे हुए थे। लेकिन सुरक्षा इंतजामों को लेकर स्थिति साफ नहीं दिखी। कई दुकानों में फायर सेफ्टी उपकरण या तो नहीं थे या कोने में रखे धूल खा रहे थे। कॉलेज छात्र दीपक जैन ने बताया कि हम रोज यहां आते हैं, लेकिन कभी ध्यान नहीं दिया कि बाहर निकलने का रास्ता कितना सुरक्षित है। फ्लोरिश स्टे होटल की खबर के बाद डर लगने लगा है। अगर यहां कुछ हो गया तो भीड़ में फंस जाएंगे। अभिभावक किरण ने बताया कि बच्चे यहां घंटों रहते हैं। यह सिर्फ खाने की जगह नहीं है, बल्कि सामाजिक जगह बन चुकी है। लेकिन अगर सुरक्षा नहीं है तो यह बहुत बड़ा जोखिम है। वहीं, स्थानीय दुकानदार प्रवीण ने बताया कि यहां रात तक भीड़ रहती है। अगर अचानक कोई हादसा हो जाए तो बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। यहां की सबसे बड़ी समस्या भीड़ प्रबंधन और संकरी एंट्री-एग्जिट है।

यूसुफ सराय: अवैध निर्माण और तंग गलियों का खतरा

रात- 09:00 बजे

यूसुफ सराय स्थित मंदिर वाली गली पहुंचते ही हालात और गंभीर दिखे। तंग गलियों के बीच छोटे होटल और लॉज संचालित हो रहे हैं। कई इमारतें अवैध निर्माण की श्रेणी में आती दिखीं। यहां पहुंचना और बाहर निकलना दोनों चुनौतीपूर्ण है। स्थानीय निवासी सौरभ ने बताया कि गली के अंदर तक कार भी नहीं आ सकती। वहीं, अगर यहां आग लग जाए तो एम्बुलेंस अंदर नहीं आ सकती। गलियां इतनी संकरी हैं कि लोग खुद ही फंस जाएंगे। राहगीर पंकज शर्मा ने बताया कि यहां बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। सुरक्षा नाम की कोई चीज नहीं दिखती। यहां सबसे बड़ा खतरा अवैध निर्माण है, जो किसी भी आपात स्थिति में नुकसान पहुंचा सकता है।

लोगों से बातचीत

अगर मंदिर वाली गली में आग लग गई तो दमकल की गाड़ी अंदर नहीं आ पाएगी। लोग बाहर कैसे निकलेंगे, यह सोचकर ही डर लगता है।- अनिकेत

रात में हुमायूंपुर हजारों लोग होते हैं। अंदर इतनी भीड़ होती है कि चलना मुश्किल हो जाता है। अगर आग लग जाए तो लोग एक-दूसरे पर गिर जाएंगे।- अंजलि

हम रोज हौज खास आते हैं, लेकिन कभी नहीं सोचा था कि अगर कुछ हुआ तो बाहर निकलना कितना मुश्किल होगा। – सचिन पांडेय

गली इतनी संकरी है कि एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड अंदर नहीं आ सकती। अगर आग लगी तो लोग फंस जाएंगे।- हर्ष

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