भारतीय संस्कृति में शादी के बंधन को सबसे पवित्र माना गया है. यह दो आत्माओं का मिलन है. शादी सात जन्मों का बंधन है. अगर कोई जोड़ा शादी के बंधन में बंध गया तो फिर यह मायने नहीं रखता कि उनका अतीत क्या था. ‘तलाक’ भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है. इन्हीं बातों को आधार बनाकर बॉलीवुड में कई फिल्में बनाई गई हैं. 45 साल पहले ऐसी ही एक फिल्म रिलीज हुई थी. इसी मूवी से मिलती-जुलती एक और फिल्म 16 साल बाद बनाई गई. दूसरी फिल्म और ज्यादा पॉप्युलर हुई. गीत-संगीत, कहानी की प्रस्तुति सबकुछ बेजोड़ था.
भारतीय समाज में आज भी अरेंज मैरिज का चलन है. शादी का बंधन अटूट होता है. ‘तलाक’ भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है. इसी मान्याता को आधार बनाकर 23 जून 1983 को एक फिल्म रिलीज हुई थी. यह एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी. यह अनिल कपूर की पहली ऐसी फिल्म थी जिसमें वो लीड रोल में थे. इसी फिल्म की कहानी को नए अंदाज में 16 साल बाद दर्शकों के सामने पेश किया गया. दूसरी मूवी मैसिव हिट रही. दोनों फिल्मों की गिनती आइकॉनिक मूवी में होती है. ये फिल्में थीं : वो सात दिन और हम दिल दे चुके सनम. दोनों फिल्मों का फ्लॉट एक जैसा था.
सबसे पहले बात करते हैं ‘वो सात दिन’ की जिसमें अनिल कपूर-पद्मिनी कोल्हापुरे लीड रोल में थे. फिल्म में नसीरुद्दीन सिद्दीकी ने भी अहम भूमिका निभाई थी. ‘वो सात दिन’ एक तमिल मूवी का रीमेक थी जिसका डायरेक्शन के. भाग्यराज ने किया था. जैनेंद्र जैन ने फिल्म के डायलॉग लिखे थे. डायरेक्टर बापू थे. प्रोड्यूसर बोनी कपूर-सुरेंद्र कपूर थे. सुरेंद्र कपूर अभिनेता अनिल कपूर के पिता थे. फिल्म में म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. गीतकार आनंद बख्शी थे.
फिल्म के दो गाने ‘मेरे दिल से दिल्लगी ना कर’ और ‘प्यार किया नहीं जाता हो जाता है’ खूब पॉप्युलर हुए थे. अनिल कपूर के पिता सुरेंद्र कपूर प्रोड्यूसर थे. हालांकि उन्हें फिल्मों में खूब घाटा ही हुआ. भाई बोनी कपूर हर हाल में अनिल कपूर को अभिनेता बनाना चाहते थे. बोनी और अनिल कपूर भाग्यराज की फिल्म के राइट्स खरीदने के लिए चेन्नई गए लेकिन पैसे कम पड़ गए. ऐसे में बोनी कपूर ने संजीव कुमार को फोन मिलाया. वो उन दिनों चेन्नई में एक शूटिंग के सिलसिले में थे. शबाना आजमी से भी पैसे उधार लिए. इस तरह से के. भाग्यराज की तमिल फिल्म के राइट्स खरीदकर उसे हिंदी में ‘वो सात दिन’ के नाम से बनाया गया. इस फिल्म ने अनिल कपूर की किस्मत चमका दी.
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मनमोहन देसाई ने तो अनिल कपूर से खुलकर कहा था वो कभी हीरो नहीं बन पाएंगे. उस समय की कई एक्ट्रेस ने अनिल कपूर के साथ काम करने से इनकार कर दिया था. पद्मिनी कोल्हापुरे को बोनी कपूर ने प्रेमरोग से पहले साइन किया था. वो रातोंरात स्टार बन गईं. मुश्किल से उन्होंने ‘वो सात दिन’ के लिए डेट्स निकालीं. अनिल कपूर ने उन्हें खूब मनाया. रोज घर से उनके लिए सेट पर टिफिन लेकर आते थे. फिल्म में बेबी सुचिता ने नसीरुद्दीन सिद्दीकी की बेटी का रोल निभाया था.
फिल्म में अनिल कपूर का नाम ‘प्रेम प्रताप सिंह पटियावाला वाले’ था. उनका यह नाम खूब पॉप्युलर हुआ. मजेदार बात यह है कि ‘वो सात दिन’ सावन कुमार की ‘लैला’ और यश चोपड़ा की ‘मशाल’ के बाद शुरू हुई थी लेकिन दोनों ही फिल्मों से पहले रिलीज हो गई थी. फिल्म में सतीश कौशिक ने भी एक रोल निभाया था. बोनी कपूर ने उन्हें 201 रुपये में साइन किया था. अनिल कपूर के कहने पर 300 रुपये सतीश कौशिक को और दिए गए थे. उनका मंदिर के पास एक सीन था. इस सीन को सतीश कौशिक अपने लिए लकी समझते थे. उनकी किस्मत भी इस मूवी से चमक उठी. फिल्म का टाइटल पलले ‘संजोग’ था जिसे बदलकर ‘वो सात दिन’ किया गया. 60 लाख के बजट में बनी इस फिल्म मे 1.8 करोड़ का बिजनेस किया था. यह उस साल की 24वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी.
‘वो सात दिन’ की रिलीज होने के 16 साल बाद 1999 में इसी फिल्म का रीमेक संजय लीला भंसाली ने बनाया. यह फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ थी. ‘हम दिल दे चुके सनम’ फिल्म का प्लॉट ‘वो सात दिन’ से इंस्पायर्ड था. यह भी एक संयोग ही है कि ‘वो सात दिन’ 23 जून 193 को रिलीज हुई थी तो सलमान खान-ऐश्वर्या राय और अजय देवगन स्टारर ‘हम दिल दे चुके सनम’ 18 जून 1999 को सिनेमाघरों में आई थी.
डायरेक्टर-प्रोड्यूसर संजय लीला भंसाली थे. म्यूजिक इस्माइल दरबार का था. गीतकर महबूब थे. स्क्रीनप्ले संजय लीला भंसाली ने जबकि डायलॉग अमरीक गिल ने लिखे थे.इस आइकॉनिक फिल्म की चर्चा इसलिए भी खूब होती है क्योंकि इसी मूवी की शूटिंग के दौरान ऐश्वर्या राय-सलमान खान के बीच नजदीकियां बढ़ीं. दोनों का प्यार परिवान चढ़ा. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त दर्शन किया.
फिल्म का म्यूजिक बेहतरीन था. फिल्म के पॉप्युलर गाने थे : चांद छुपा बादल में, निम्बूड़ा-निम्बूड़ा, आंखों की गुस्ताखियां माफ हो, ढोली तारो. डायरेक्टर भंसाली और इस्माइल दरबार ने पूरे दो साल की मेहनत के बाद म्यूजिक तैयार किया था. यह फिल्म ऐश्वर्या राय को कैसे मिली, इसका किस्सा भी दिलचस्प है. राजा हिंदुस्तानी (1996) की स्क्रीनिंग में हिस्सा लेने संजय लीला भंसाली पहुंचे थे. ऐश्वर्या राय भी इस ईवेंट में पहुंची थीं. उन्होंने भंसाली से कहा कि आपकी ‘खामोशी : द म्यूजिकल’ फिल्म अच्छी थी. भंसाली ऐश्वर्या से प्रभावित हुए और उन्हें नंदिनी का रोल दे दिया.
सलमान खान की इस फिल्म में उनकी सौतेली मां हेलेन भी नजर आई थीं. सिंगर केके ने फिल्म का सबसे दर्द भरा गाना ‘तड़प तड़प’ सुबह 4 बजे स्टूडियो में रिकॉर्ड किया था. ऐश्वर्या राय को इस फिल्म के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. फिल्म को चार नेशनल अवॉर्ड मिले थे. फिल्म ने बेस्ट मूवी, डायरेक्टर, एक्ट्रेस, प्लेबैक सिंगर मेल, आर्ट डायरेक्शन, सिनेमेटोग्राफर, कोरियोग्राफी, बैकग्राउंड स्कोर समेत 9 फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते थे. 16 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 51 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक मैसिस हिट फिल्म साबित हुई थी. फिल्म की गिनती आज बॉलीवुड की आइकॉनिक मूवी में होती है.
ऐश्वर्या राय और सलमान खान की लव स्टोरी स्क्रीन के अलावा रियल लाइफ में चल रही थी. ऐश्वर्या राय ने
सलमान खान को मोस्ट गॉर्जियस मैन भी बताया था. सार्वजनिक मंच से सलमान खान के सामने ‘मेरी सांसों में बसा है, एक तेरा ही नाम’ सॉन्ग भी गुनगुनाया था. फिर इस खूबसूरत जोड़ी को दुनिया की नजर लग गई. दोनों ने बीच ऐसे विवाद में जन्म लिया जो बॉलीवुड की सबसे बड़ी कंट्रोवर्सी बन गई. कहा जाता है कि ऐश्वर्या राय सलमान खान के पजेसिव नेचर से परेशान थीं. 2002 में एक इंटरव्यू में ऐश्वर्या ने पर मारपीट का आरोप भी लगाया था. सलमान खान से ब्रेकअप के बाद ऐश्वर्या राय का नम विवेक ओबेरॉय के साथ जोड़ा गया. बाद में ऐश्वर्या राय ने अभिषेक बच्चन से शादी रचा ली.
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