ऋतब्रत बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि बागी गुट ममता बनर्जी के वजूद को खत्म करना चाहता है. उन्होंने ममता बनर्जी के प्रति अपनी अटूट निष्ठा जताते हुए सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी को पार्टी और संगठन की इस दुर्दशा के लिए जिम्मेदार ठहराया. इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि बागी धड़ा अब कानूनी और राजनीतिक रूप से खुद को ‘असली तृणमूल’ स्थापित करने के बेहद करीब पहुंच चुका है, लेकिन वे ममता बनर्जी के बंगाली अस्मिता वाले चेहरे का नुकसान नहीं उठाना चाहते.
“ममता हमारी मार्गदर्शक, लेकिन अभिषेक से कोई लेना-देना नहीं”
पत्रकारों के तीखे सवालों का जवाब देते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने अपनी भावी रणनीति और पार्टी के नेतृत्व को लेकर एक बहुत ही दिलचस्प और दूरगामी बात कही. उन्होंने ममता और अभिषेक को लेकर बागी गुट के रुख को पूरी तरह शीशे की तरह साफ कर दिया. “मैं यह बात बिल्कुल स्पष्ट और दो टूक शब्दों में कह देना चाहता हूं कि हमारी नेता आज भी केवल और केवल ममता बनर्जी ही हैं. हम पूरे दिल से चाहते हैं कि वे हमारी मार्गदर्शक, गार्जियन और सलाहकार बनी रहें. वे हमारी संसदीय पार्टी को रास्ता दिखाएं, क्योंकि उनके संघर्ष से ही यह दल खड़ा हुआ है. लेकिन जहां तक अभिषेक बनर्जी का सवाल है, तो उनका इस 18वीं विधानसभा से अब कोई लेना-देना नहीं है.
58 विधायक, बहुत जल्द संख्या पहुंचेगी 60 के पार
अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने विधानसभा के भीतर अपने गुट के आंकड़ों का भी खुलासा किया. उन्होंने दावा किया कि सदन के भीतर ममता बनर्जी की बुलाई बैठकों से दूरी बनाने वाले विधायकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और उनके पास दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है.
वर्तमान ताकत: ऋतब्रत बनर्जी के मुताबिक, इस समय आधिकारिक तौर पर 58 निर्वाचित विधायक उनके साथ मजबूती से खड़े हैं, जिन्होंने उन्हें नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपना समर्थन दिया है.
आगामी रणनीति: उन्होंने दावा किया कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर दो और टीएमसी विधायक ममता खेमे को छोड़कर उनके साथ आने वाले हैं, जिससे यह संख्या बढ़कर 60 हो जाएगी.
सदन के भीतर अपनी भूमिका को लेकर ऋतब्रत ने कहा कि वे भाजपा की सुवेंदु अधिकारी सरकार के सामने एक कमजोर या बिकाऊ विपक्ष की तरह काम नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, “हम सदन के भीतर बेहद रचनात्मक और आक्रामक तरीके से सरकार की गलत नीतियों का विरोध करेंगे. तृणमूल कांग्रेस बंगाल की जनता के हक के लिए एक जिम्मेदार और मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएगी.”
क्या है ऋतब्रत के इस दांव के पीछे की असली क्रोनोलॉजी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऋतब्रत बनर्जी का यह बयान एक बेहद सोची-समझी कानूनी और राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है. खुद को ‘ममता समर्थक’ और ‘अभिषेक विरोधी’ बताकर वे टीएमसी के उन बचे हुए विधायकों को भी अपने पाले में खींचना चाहते हैं जो अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली से नाराज हैं, लेकिन ममता बनर्जी के डर या सम्मान के कारण अब तक खुलकर सामने नहीं आ पा रहे थे.
अब गेंद पूरी तरह से ममता बनर्जी के पाले में है. ममता बनर्जी के लिए यह स्थिति बेहद दर्दनाक है, जहां उनके अपने विधायक उनके भतीजे को ‘विलेन’ बनाकर उन्हीं को सलाहकार बनने का ऑफर दे रहे हैं. क्या ममता बनर्जी अपने भतीजे अभिषेक का राजनीतिक करियर बचाने के लिए इन 60 विधायकों को पूरी तरह छोड़ देंगी, या फिर वे पार्टी को बचाने के लिए कोई नया बीच का रास्ता निकालेंगी? बंगाल विधानसभा का यह सत्र बेहद हंगामेदार होने वाला है.
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