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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नोएडा में यूनीटेक ग्रुप के एक बड़े रियल्टी प्रोजेक्ट यूनीटेक गोल्फ एंड कंट्री क्लब (यूजीसीसी) की 634.12 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच कर ली है। जांच इस संपत्ति का वर्तमान बाजार मूल्य 8,115 करोड़ रुपये है।

यह कार्रवाई घर खरीदारों के साथ हुई धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पीएमएलए के तहत की गई है। ईडी के अनुसार जब्त संपत्तियों में नोएडा के सेक्टर 96, 97 और 98 में स्थित 347.83 एकड़ भूमि के लीजहोल्ड अधिकार और सनग्रेस प्रोडक्ट्स (यूफ्लेक्स ग्रुप) व सीआईजी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कंसोर्टियम/ एसपीसी ढांचे के शेयर शामिल हैं। केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि यह मामला दिल्ली पुलिस और सीबीआई की ओर से दर्ज 76 एफआईआर पर आधारित है।

सतिंदर पर कसा ईडी का शिकंजा

ग्रेटर नोएडा में ‘द ग्रैंड वेनिस मॉल’ के मालिक एवं भसीन इंफोटेक कंपनी के संचालक सतिंदर सिंह भसीन पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सतिंदर भसीन को ईडी ने जोनल कार्यालय में पूछताछ के लिए तलब किया था। देर रात तक उनसे गहन पूछताछ की जा रही थी। ईडी इस मामले में शनिवार को बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में है।

बता दें कि नोएडा के भसीन इंफोटेक एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. (बीआईआईपीएल), इसके निदेशक सतिंदर भसीन की 27.01 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को प्रवर्तन निदेशालय ने बीते वर्ष जून माह में जब्त किया था। इसमें पश्चिमी दिल्ली के राजौरी गार्डन का सतिंदर भसीन का आवास शामिल था, जिसकी कीमत करीब 44.06 करोड़ रुपये से अधिक है। ईडी ने नोएडा पुलिस की ओर से दर्ज कई एफआईआर के आधार पर मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की थी।

जांच में सामने आया कि भसीन इंफोटेक, ग्रैंड वेनिस समूह की संस्थाएं, सतिंदर सिंह भसीन, क्विंसी भसीन और अन्य आरोपियों ने वाणिज्यिक इकाइयों की समय पर डिलीवरी का वादा करके रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेशकों से सैकड़ों करोड़ जुटाए लेकिन रकम वापस नहीं की। उनकी रकम समूह की कंपनियों, सहयोगी संस्थाओं में डायवर्ट की गई, जिन्हें सतिंदर सिंह भसीन, हरप्रीत सिंह छाबड़ा, अजय धवन द्वारा नियंत्रित किया जाता था।

कैनविज ग्रुप पर मनी लांड्रिंग का केस 

ईडी ने बरेली के कैनविज ग्रुप के खिलाफ मनी लांड्रिंग का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ईडी ने ग्रुप के मुख्य संचालक कन्हैया गुलाटी समेत 12 लोगों को नोटिस भेजा है। कैनविज ग्रुप द्वारा लोगों को कई गुना अधिक ब्याज का लालच देकर करोड़ों रुपये जमा कराए गए थे, जिसके बाद एजेंटों को बेशकीमती तोहफे बांटे गए।

जब निवेशकों ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की तो कंपनी संचालक गायब हो गए। इस मामले में पुलिस में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर ईडी ने कंपनी के खिलाफ मनी लांड्रिंग का केस दर्ज कर कंपनी के निदेशकों, प्रमोटर्स आदि को पूछताछ के लिए तलब किया है। 

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