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Sultanpur News: उत्तर प्रदेश का सुलतानपुर जिला ऐतिहासिक दृष्टिकोण से जितना महत्वपूर्ण है, उतनी ही दिलचस्प यहां की देसी रियासतों की कहानी है. अवध गजेटियर में दर्ज सुलतानपुर की एक ऐसी ही ऐतिहासिक और बेहद समृद्ध रियासत हुआ करती थी ‘मनियारपुर रियासत’. कभी 109 गांवों पर राज करने वाली इस रियासत का इतिहास शौर्य, आपसी बंटवारे, धोखे और सत्ता के संघर्ष की ऐसी दास्तान है, जिसने इसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई. आइए जानते हैं कि सीमाओं के अतिक्रमण और आपसी समझौतों के दौर से गुजरते हुए आज यह रियासत किस मोड़ पर खड़ी है.

Sultanpur News: उत्तर प्रदेश का सुलतानपुर जिला ऐतिहासिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. इसका इतिहास अवध गजेटियर में भी दर्ज है. इसके साथ ही यहां की रियासतों में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने सुलतानपुर को वैश्विक पटल पर पहचान दिलाई. एक ऐसी ही रियासत सुलतानपुर की मनियारपुर हुआ करती थी, जिसके अंतर्गत 109 गांव आते थे. ऐसे में आज तक इसका क्या इतिहास रहा है और इस रियासत की सीमाएं कहां-कहां तक फैली हुई थीं, आइए हम आपको विस्तार से बताते हैं.

जब हसनपुर रियासत से अलग हुआ मनियारपुर
वरिष्ठ पत्रकार विक्रम बृजेंद्र सिंह लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताते हैं कि सुलतानपुर में तातार खां की पांचवीं पीढ़ी में खानम खां हुए, जिन्हें हसनपुर रियासत का जब बंटवारा हुआ, तब उस दरमियां 109 गांव हासिल हुए थे. इस खानदान के रोशन जमां की मृत्यु साल 1818 ईस्वी में हो गई और उनके भाई राज्य के उत्तराधिकारी हुए. फिर उनकी पत्नी रहमानी बीबी ने मनियारपुर ताल्लुके पर कब्जा कर लिया. उनके कार्यकाल में खपड़ा डीह के निहाल सिंह साल 1821 ईस्वी में प्रबंधक बने.

प्रबंधक निहाल सिंह का प्रभाव और रियासत का बंटवारा
निहाल सिंह के बारे में कहा जाता है कि वह इतने प्रभावशाली व्यक्ति सिद्ध हुए कि उन्होंने अपने सगोत्रियों की सहायता से मनियारपुर के बहुत बड़े भू-भाग पर अपना आधिपत्य जमा लिया. इसके साथ ही उन्होंने बीबी रहमानी को भी मनियारपुर से खदेड़ दिया. इसके बाद फिर से सुगरा बीवी मनियारपुर की गद्दी पर बैठीं, लेकिन हरपाल सिंह के सामने वे असमर्थ साबित हुईं. नाजिम के समझौते के मुताबिक मनियारपुर ताल्लुका, खपड़ा डीह और मनियारपुर में बंट गया, जिसमें मनियारपुर के पास सिर्फ 72 गांव ही बचे थे.

पुस्तक ‘सुलतानपुर इतिहास की झलक’ में मिलता है जिक्र
इतिहासकार राजेश्वर सिंह अपनी पुस्तक ‘सुलतानपुर इतिहास की झलक’ में लिखते हैं कि मनियारपुर एक समृद्धशाली ताल्लुका था, जो हसनपुर रियासत का हिस्सा हुआ करती थी. हसनपुर का जब बंटवारा हुआ, तब इस रियासत को अलग कर दिया गया और यह मनियारपुर 109 गांवों के साथ एक बड़ा और समृद्धशाली ताल्लुका माना जाता था.

राजशाही ठाट-बाट खत्म, पर इतिहास आज भी है जिंदा
सुलतानपुर में मनियारपुर गांव आज भी मौजूद है, लेकिन अब पहले की तरह वहां राजसी ठाट-बाट और राजा-रजवाड़ों जैसी कोई बात नहीं रह गई है. मनियारपुर गांव आज लोकतंत्र की दहलीज को पार कर रहा है और यहां पर मनियारपुर रियासत के कई ऐतिहासिक प्रमाण आज भी देखे जा सकते हैं.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें

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