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महाभारत में अर्जुन और द्रौपदी के संबंधों की चर्चा तो खूब होती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि द्रौपदी के अलावा भी अर्जुन की 3 और पत्नियां थीं. इन पत्नियों की कहानियां जितनी रोचक हैं, उतनी ही कम सुनी गई हैं. दिलचस्प बात यह है कि इन्हीं में से एक पत्नी के पुत्र ने युद्ध में एक अपने ही पिता धनुर्धारी अर्जुन को पराजित कर सबको चौंका दिया था.
महाभारत में अर्जुन और द्रौपदी की कहानी सबसे ज्यादा चर्चित रही, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अर्जुन की द्रौपदी के अलावा भी तीन और पत्नियां थीं. इनमें नागकन्या उलूपी, चित्रांगदा, और सुभद्रा का उल्लेख मिलता है. खास बात यह है कि इनमें से एक पत्नी के पुत्र ने युद्ध में अर्जुन जैसे महान धनुर्धारी को भी पराजित कर दिया था. अर्जुन के इन रिश्तों और उनके पुत्रों की कहानियां महाभारत के कई रोचक रहस्यों को उजागर करती हैं, जो आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं.
एक शांत नदी, जिसमें छुपा था राज – अपने वनवास के दौरान एक दिन अर्जुन पवित्र गंगा नदी के किनारे विश्राम कर रहे थे. चारों तरफ शांति और सुकून भरा पल था. लेकिन उस शांत सतह के नीचे कुछ अनोखा छुपा था. जैसे ही वे पानी में उतरे, एक अदृश्य शक्ति ने अचानक उन्हें गहराई में खींच लिया. जब अर्जुन ने आंखें खोलीं, वे अब नदी में नहीं थे. वे नागलोक में थे, जो पानी के नीचे बसी एक रहस्यमयी दुनिया थी. यह आम लोगों के लिए नहीं थी, फिर भी अर्जुन वहां बिना डरे खड़े थे. उनका साहस उन्हें अनजान जगहों का सामना करने की ताकत देता था.
राजकुमारी जिसने अर्जुन को चुना – नागलोक में अर्जुन की मुलाकात हुई उलूपी से, जो नागराज की राजकुमारी थी और उन्हें वहां लाई थी. वह अर्जुन की ताकत, अनुशासन और चरित्र से बहुत प्रभावित थी. उसने अपने दिल की बात साफ-साफ अर्जुन से कही और विवाह का प्रस्ताव रखा. अर्जुन ने उसकी सच्चाई को समझा और विवाह के लिए हां कर दी. यह पल शक्ति या अधिकार का नहीं, बल्कि जुड़ाव का था. यह याद दिलाता है कि कई बार सबसे अनोखे रिश्ते हमारी जिंदगी में किसी वजह से आते हैं.
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अर्जुन की पत्नियां – अधिकतर लोग अर्जुन के जीवन में सिर्फ द्रौपदी के बारे में जानते हैं. लेकिन उनका विवाह सुभद्रा से भी हुआ था, जो भगवान कृष्ण और बलराम की बहन, वसुदेव और रोहिणी की पुत्री थीं. द्रौपदी और सुभद्रा के साथ-साथ अर्जुन का विवाह उलूपी और चित्रांगदा से भी हुआ था. इन रिश्तों के बारे में बहुत कम चर्चा होती है, जबकि इनका उनकी यात्रा में अहम रोल रहा. ये दिखाते हैं कि जीवन एकतरफा नहीं होता.
पुत्र जिसने पिता को हराया – महाभारत युद्ध के बाद अर्जुन के जीवन में एक ऐसा पल आया, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी. उनकी मुलाकात अपने बेटे बभ्रुवाहन से हुई, जो चित्रांगदा से जन्मा था. हालात और कर्तव्य के कारण दोनों के बीच युद्ध हुआ. उस युद्ध में बभ्रुवाहन ने अर्जुन को हरा दिया. यह सिर्फ एक युद्ध नहीं था, बल्कि भावनाओं, किस्मत और सीखों से भरा एक पल था. सुभद्रा से अर्जुन को अभिमन्यु, उलूपी से इरावत और चित्रांगदा से वभ्रुवाहन नाम पुत्रों का जन्म हुआ था.
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