फिल्मों में सिचुएशन के हिसाब से गाने लिखे जाते हैं. इस काम को गीतकार अंजाम देता है. वो फिल्म के किरदार की भावनाओं को ऐसा रंग देता है जिससे दर्शक जुड़ जाते हैं. कई डायरेक्टर-प्रोड्यूसर फिल्मों में भजन को भी शामिल कर लेते हैं. बॉलीवुड इंडस्ट्री के एक मुस्लिम संगीतकार और मुस्लिम गीतकार ने दो फिल्मों में कृष्ण भगवान पर ऐसे भजन बनाए जिन्हें सुनकर पूरी दुनिया झूम उठी. मन भावविभोर हो उठा. सबसे दिलचस्प बात यह है कि दो फिल्में मैसिव हिट रहीं. आज भी स्कूल-कॉलेज के फंक्शन में, विपदा के समय लोग इन कृष्ण भजनों को गाते हैं.
‘यशोदा का नंदलाला, बृज का उजाला है’, ‘यशोमत मइया से बोले नंदलाला’ और ‘श्याम तेरी बंशी पुकारे राधा नाम, लोग करे मीरा को यूं ही बदनाम’ कृष्ण भजन सुनते ही मन खुश हो जाता है. इन भजनों को सुनते ही इंसान दुख-दर्द भूल जाता है. बॉलीवुड में समय-समय पर फिल्मों में कृष्ण भगवान के भजन सुनाई देते रहे हैं. बॉलीवुड के एक मुस्लिम संगीतकार और गीतकार ने अपनी दो फिल्मों में भगवान कृष्ण पर ऐसे गाने बनाए जिन्हें संकट के समय लोग आज भी सुनते हैं. हम संगीतकार एआर रहमान और गीतकार जावेद अख्तर की बात कर रहे हैं. दोनों ने ‘लगान’ और ‘जोधा अकबर’ फिल्म में भगवान कृष्ण पर भजन बनाए. दोनों ही फिल्में हिट रहीं. आइये जानते हैं इन फिल्मों से जुड़े दिलचस्प फैक्ट्स………
एआर रहमान का म्यूजिक रूह में उतर जाता है. 1992 में आई फिल्म ‘रोजा’ उनकी संगीतबद्ध की गई पहली हिंदी फिल्म थी. यह मूल रूप से तमिल फिल्म का हिंदी डब वर्जन था. इस फिल्म के गाने खूब पॉप्युलर हुए थे. खासकर ‘दिल है छोटा सा, छोटी सी आशा’ गाना तो आज भी फेमस है. फिर 1995 में रंगीला, 1999 में ‘ताल’ फिल्म से एआर रहमान ने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई. उनका म्यूजिक बहुत ही सुरीला था और हिंदी सिनेमा के बाकी संगीतकारों से हटकर था. एआर रहमान ने गीतकार जावेद अख्तर के साथ मिलकर फिल्मों के लिए कृष्ण भजन भी संगीतबद्ध किए. ये फिल्में थीं : लगान और जोधा अकबर.
गीतकार जावेद अख्तर खुद को नास्तिक कहते हैं लेकिन फिल्मों में उन्होंने एक से बढ़कर एक कृष्ण भजन लिखे हैं. 1993 में रिलीज हुई फिल्म फिल्म युगांधर में उन्होंने ‘ओह कृष्ण कन्हैया, मुरलीधर’ आरती लिखी थी. आरती में भगवान कृष्ण के कई रूपों (गोपाल, मनमोहन, कुंजबिहारी) का गुणगान है. उन्होंने भगवान कृष्ण के लगभग 20 अलग-अलग नामों का खूबसूरती से इस्तेमाल किया है. संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने इसे कंपोज किया था.
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जावेद अखतर की संगीतकार एआर रहमान से जोड़ी ऐसे ही नहीं बनी थी. ‘रोजा’ फिल्म के गाने सुनकर जावेद अख्तर हैरान रह गए थे. उन्होंने फिल्म के गाने बार-बार सुने. फिर खुद एआर रहमान के घर उनसे मिलने गए. साथ में काम करने की इच्छा जताई. जावेद साहब ने अपने एक इंटरव्यू में खुद इसका खुलासा किया था. एआर रहमान-जावेद अख्तर की जोड़ी ने ही ‘लगान’ फिल्म में कृष्ण भगवान से जुड़े दो गाने ‘ओ पालनहारे’ और ‘राधा कैसे ना जले’ बनाए थे. ‘ओ पालनहारे, निर्गुण और न्यारे’ भजन लता मंगेशकर-उदित नारायण ने गाया था.
इस बारे में जावेद अख्तर ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘मैंने आमिर खान को ‘लगान’ फिल्म को ना बनाने के लिए कहा था. फिर भी वो नहीं माने तो मैंने कहा कि मैं सिर्फ गाने लिखूंगा. ‘ओ पालनहारे’ गाना मेरी जिंदगी के कुछ मुश्किल गानों में से एक था. सादगी, श्रद्धा भोलापन और मासूमियत को अपने अंदर ढूंढकर गाना लिखना आज की दुनिया में बहुत मुश्किल काम है. मुझे गाने की सिचुएशन पता थी. मैं समझ गया था कि यह गाना होशियारी से नहीं लिखा जा सकता. अपने अंदर एक स्थिरता, ठहराव और सुकून चाहिए था. उस ठहराव में दुख महसूस किया.’
‘लगान’ फिल्म में भगवान कृष्ण-राधा पर एक गाना रखा गया था. इस गाने के बोल थे : राधा कैसे ना जले. गाना आशा भोसले और उदित नारायण ने गाया था. यह गाना भी खूब पॉप्युलर हुआ. इस गाने को आज भी स्कूल फंक्शन में गाते हैं.
‘लगान’ फिल्म 15 जून 2001 को सिनेमाघरों में आई थी. आशुतोष गोवारिकर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में आमिर खान-ग्रेसी सिंह लीड रोल में थे. ब्रिटिश एक्टर्स पॉल ब्लैकथॉर्न और रेचल शेली ने भी अहम रोल निभाए थे. प्रोड्यूसर आमिर खान ही थे. फिल्म की कहानी 1893 के आसपास की थी. स्क्रीनप्ले-डायलॉग आशुतोष गोवारिकर-कुमार दवे ने मिलकर तैयार किए थे. स्लिप डिस्क की वजह से आशुतोष गोवारिकर ने बेड पर लेटकर फिल्म का डायरेक्शन किया था. शूटिंग गुजरात के भुज जिले के एक गांव में हुई थी. मजेदार बात यह है कि आमिर खान ने शुरुआत में यह फिल्म रिजेक्ट कर दी थी. तीन माह बाद जब पूरी स्क्रिप्ट गोवारिकर ने आमिर खान को सुनाई तो फिल्म में काम करने और इसे प्रोड्यूस करने के लिए तैयार हो गए.
‘लगान’ फिल्म में म्यूजिक एआर रहमान का था. आज लगान फिल्म की गिनती इंडियन सिनेमा की कल्ट क्लासिक फिल्मों में होती है. ‘लगान’ ऑस्कर के लिए बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म फिल्म कैटेगरी में नॉमिनेट हुई थी. फिल्म ने 8 नेशनल अवॉड जीते थे. इतने ही फेयर अवॉर्ड इस फिल्म की झोली में आए थे. 24 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 66 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म का क्लैश सनी देओल की फिल्म ‘गदर’ से हुआ था.
आमिर खान और आशुतोष गोवारिकर दोस्त हैं. दोनों ने कई फिल्मों में काम भी किया है. 2008 में आशुतोष गोवारिकर के निर्देशन में एक फिल्म ‘जोधा अकबर’ बनी. फिल्म में जोधा और अकबर की प्रेम कहानी, अकबर की वीरता-दरियादिली को खूबसूरती से दिखाया गया था. ऋतिक रोशन, ऐश्वर्या राय बच्चन लीड रोल में थे. इसके अलावा, सोनू सूद और इला अरुण ने अहम भूमिकाएं निभाई थीं. इस फिल्म में भी एक कृष्ण भजन था जिसके बोल थे : मन मोहना बड़े झूठे, हार के हार नहीं माने. बने थे खिलाड़ी पिया, निकले अनाड़ी, मुसे बेमानी करे मुझसे ही रूठे.’ फिल्म में यह गाना ऐश्वर्या राय पर फिल्माया गया है. वो भगवान कृष्ण की मूर्ति के सामने यह गाना गाती हैं. गाने की आवाज अकबर के दरबार तक पहुंचती है. बेला शेंडे ने यह गाना गाया है. गीतकार जावेद अख्तर ही थे. संगीत एआर रहमान का था.
जोधा अकबर फिल्म बहुत ही भव्य तरीके से बनाई गई थी. अकबर-जोधा के बीच आपसी सम्मान और एकदूसरे की प्रशंसा कैसे सच्चे प्यार में बदल जाती है. इसे बहुत ही अनोखे अंदाज फिल्म में दिखाया गया है. फिल्म में भव्य सेट देखने को मिले थे. फिल्म को 5 फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे. दो नेशनल अवॉर्ड मिले थे. 40 करोड़ रुपये की लागत में बनी इस फिल्म ने 112 करोड़ रुपये का बिजनेस किया था. IMDb पर इसे 7.5 रेटिंग मिली थी. यह एक हिट फिल्म साबित हुई थी.
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