बहराइच जिले के किनारे जंगल से सटा हुआ गाँव विशुनापुर जहा आज भी बड़ी संख्या में थारू जनजाति के लोग कई पीढ़ियों से निवास करते है. पहले पैसे की कमाई व जीवन यापन के लिए पूर्वजो ने निकले कई काम और रास्ते जैसे जंगल, नदियों में पाई जाने वाली घास,जलकुंभी,आदि से तरह-तरह की यूजफुल वस्तुएं बनना. जिस हुनर को अब अपने पूर्वजों से सीख वंशज भी तरह-तरह की चीजें बना रहे है, खास कर महिलाएं.
बहराइच: जिला बहराइच पिछड़ा इलाका होने के नाते यहा रोजगार की दिक्कत रहती है. ऐसे में जंगल किनारे तमाम गांव ऐसे है. जिनमे थारू जनजाति के लोग निवास करते है. ऐसे में अपने जीवन यापन के लिए यह जंगलों की लगभग चीजों पर निर्भर रहता है. फिर चाहे वह खेती हो या फिर जंगल नदी में उगने वाली जलकुंभी, मूंज, घास, जिसे हम कचरा समझकर छोड़ देते हैं, उसी को बहराइच की थारुजनजाति बहन, बेटी उसे अपनी कमाई का जरिया बना रही है.
पूर्वजों से सीख आजमा रहीं हुनर
बहराइच जिले के किनारे जंगल से सटा हुआ गाँव विशुनापुर जहा आज भी बड़ी संख्या में थारू जनजाति के लोग कई पीढ़ियों से निवास करते है. पहले पैसे की कमाई व जीवन यापन के लिए पूर्वजो ने निकले कई काम और रास्ते जैसे जंगल, नदियों में पाई जाने वाली घास,जलकुंभी,आदि से तरह-तरह की यूजफुल वस्तुएं बनना. जिस हुनर को अब अपने पूर्वजों से सीख वंशज भी तरह-तरह की चीजें बना रहे है, खास कर महिलाएं.
जलकुंभी से बना रही गर्मी से बचने वाली टोपी
विशुनापुर की रहने वाली बेटी दीपिका ने नदी की जलकुंभी से गर्मी से बचने के लिए सुंदर टोपी बना कर तैयार किया है,जो बिलकुल रूरी स्टाइल में है जिसको सिर पर लगाने से धूम भी नही लगती और सिर को भी यह ठंडा रखता है, अब यह लोगो को खूब भह भी रही है.जिस एक टोपी को बनने में 4 से पाँच घंटे का समय और इसकी कीमत 300 रुपये है, जिसकी खरीदारी आप बहराइच मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर मिहीपूरवा तहसील अंतर्गत गाँव विशुनापुर से कर सकते है.
एक टोली बाने में होता है इतना प्रोसेस
दीपिका ने लोकल 18 टीम से खास बातचीत में बताया है, जलकुंभी से विभिन्न सामग्री बनाने के लिए सबसे पहले नदी से जलकुंभी को निकाल उसकी पत्तियों को हटा कर साफ, सफाई कर सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है,लगभग 8 से 10 में अच्छे से सुख जाने के बाद इसकी बिनाई की जाती है तब जाकर सामग्री तैयार होती है,जिस एक सामग्री को बनाने में घण्टों तक का समय लगता है,जिसकी शुरुआती कीमत 100 रुपये से लगाकर हजारों तक जाती है जो मेहनत और आकार पर निर्भर करता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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