दिल्ली के कई नाले और ड्रेन राजधानी की जीवनदायिनी यमुना नदी को लगातार प्रदूषित कर रहे हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कई नालों में गंदगी और रासायनिक प्रदूषण का स्तर तय सरकारी मानकों से चार से 13 गुना तक अधिक पाया गया है। इसका खुलासा दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की अप्रैल माह की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, कई नालों के साथ-साथ कुछ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भी तय मानकों पर खरे नहीं उतर सके। इससे यमुना, आगरा नहर और अन्य जल स्रोतों पर खतरा और बढ़ गया है।
डीपीसीसी ने 7 अप्रैल को विभिन्न नालों और ड्रेनों से पानी के नमूने लिए थे। जांच में सामने आया कि कई जगह पानी में जैविक कचरा, रासायनिक तत्व और सीवेज का स्तर बेहद ज्यादा है। इससे पानी की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है और जलीय जीवन पर असर पड़ सकता है।
यूपी से दिल्ली में प्रवेश करने वाली साहिबाबाद ड्रेन सबसे ज्यादा प्रदूषित पाई गई। यहां बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) 180 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई, जबकि मानक केवल 30 मिलीग्राम प्रति लीटर है। यानी यह स्तर छह गुना अधिक पाया गया। केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी) 392 मिलीग्राम प्रति लीटर और पानी में तैरते अघुलनशील ठोस कण यानी टोटल सस्पेंडेड सॉलिड्स (टीएसएस) 284 मिलीग्राम प्रति लीटर पाए गए, जो तय सीमा से काफी ऊपर है।
नजफगढ़ ड्रेन नेटवर्क भी बेहद खराब स्थिति में
दिल्ली का सबसे बड़ा नजफगढ़ ड्रेन नेटवर्क भी खराब स्थिति में मिला। बुपानिया ड्रेन में बीओडी 135, मुंगेशपुर ड्रेन में 130 और डीडी-6 ड्रेन में 125 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया। सप्लीमेंट्री ड्रेन में भी प्रदूषण का स्तर तय मानकों से कई गुना अधिक रहा। इन सभी ड्रेनों में गंदगी और जैविक प्रदूषण सामान्य सीमा से बहुत ऊपर दर्ज किया गया।
यूपी के नालों में बढ़ा प्रदूषण, नजफगढ़ झील पर भी खतरा
रिपोर्ट में यूपी के कुछ नालों और आगरा नहर की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई है। बंथला ड्रेन में बीओडी 130 और तुगलकाबाद ड्रेन में 170 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया। सरिता विहार पुल के पास पानी की गुणवत्ता भी खराब मिली। नजफगढ़ झील के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में बीओडी 75 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया, जिससे जलीय जीवों के लिए खतरा बढ़ गया है। एलपीजी बॉटलिंग प्लांट और सरिता विहार ब्रिज के पास पानी का बहाव नहीं मिला। नजफगढ़ झील के डाउनस्ट्रीम में बीओडी 75 मिलीग्राम प्रति लीटर पहुंच गया, जिससे जलीय जीवों पर खतरा बढ़ गया है।
कैसे यमुना में पहुंचेगा साफ पानी
दिल्ली के सात सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तय मानकों पर फेल पाए गए। कई प्लांटों में फीकल कोलीफॉर्म (मल में पाया जाने वाला बैक्टीरिया), बीओडी और टीएसएस का स्तर सीमा से अधिक मिला। यमुना विहार, महरौली, घिटोरनी और वसंत कुंज के कुछ प्लांटों में बैक्टीरिया का स्तर काफी अधिक पाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे प्लांट मानकों के अनुसार काम नहीं करेंगे, तो प्रदूषित पानी दोबारा जल स्रोतों में पहुंचेगा।
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