Purnia Handloom Clothes Export: बिहार के पूर्णिया की महिलाओं के हुनर का डंका अब अमेरिका में भी बज रहा है. स्थानीय स्टार्टअप हाउस ऑफ मैथिली को कैलिफोर्निया से सूती चादरों से बने कस्टमाइज्ड जैकेट्स का 4 लाख रुपये का ऑर्डर मिला है. करीब 50 स्थानीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाले इस सराहनीय प्रयास की पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें.
पूर्णिया: बिहार के पूर्णिया जिले की महिलाओं के हुनर का डंका अब सात समंदर पार अमेरिका में भी बजने लगा है. स्थानीय महिलाओं द्वारा हैंडलूम पर तैयार की गई सूती चादरें और उनसे बने आकर्षक डिजाइनिंग कपड़े (जैकेट) अब देश के साथ विदेशों में भी धूम मचा रहे हैं. अमेरिका के कैलिफोर्निया से पूर्णिया की ई-कॉमर्स कंपनी हाउस ऑफ मैथिली को एक बड़ा एक्सपोर्ट ऑर्डर मिला है. जिससे स्थानीय महिला कारीगरों में भारी उत्साह है.
कैलिफोर्निया से मिला 4 लाख का बड़ा ऑर्डर
पूर्णिया के बक्सा घाट रोड सिपाही टोला स्थित ई-कॉमर्स कंपनी हाउस ऑफ मैथिली को कैलिफोर्निया से एक साथ 150 से अधिक डिजाइनिंग पीसेज का ऑर्डर मिला है. यह पूरा ऑर्डर करीब 4 लाख रुपये का है. खास बात यह है कि कैलिफोर्निया के लोगों को यहां की महिलाओं के हाथों से बनी सूती चादरों से तैयार किए गए जैकेट्स और कस्टमाइज्ड ड्रेसेस खूब पसंद आ रहे हैं. इस ऑर्डर को पूरी तरह स्थानीय स्तर पर तैयार कर अगले 20 दिनों के भीतर पूर्णिया से कैलिफोर्निया भेजा जाएगा.
चादर को काटकर तैयार हो रहा आकर्षक जैकेट
हाउस ऑफ मैथिली के फाउंडर मनीष रंजन ने बताया कि कैलिफोर्निया भेजे जाने वाले इन खास कपड़ों को पूरी तरह पारंपरिक और हस्तकला के जरिए तैयार किया जा रहा है. यहां की महिलाएं पहले खुद सूती चादरें बुनती हैं. फिर उसी चादर को विशेष रूप से काटकर आकर्षक लुक और मॉडर्न डिजाइन में जैकेट का रूप दिया जाता है. इस जैकेट पर पूरी तरह से पूर्णिया की महिलाओं के हाथों की कारीगरी और हुनर का अनूठा संगम देखने को मिलेगा.
50 महिलाओं को सीधा रोजगार, बनीं आत्मनिर्भर
हाउस ऑफ मैथिली पिछले 3 वर्षों से पूर्णिया और आसपास के ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने का काम कर रही है. मनीष रंजन के मुताबिक उनकी संस्था पहले स्थानीय महिलाओं को पारंपरिक बुनाई और डिजाइनिंग का मुफ्त प्रशिक्षण देती है. फिर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराती है. वर्तमान में लगभग 50 महिलाएं यहां काम करके आत्मनिर्भर बन चुकी हैं. अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं.
ग्लोबल मार्केट में बिहार के हैंडलूम की बढ़ी धमक
बिहार के ग्रामीण अंचलों में तैयार होने वाले सिल्क और सूती कपड़ों की मांग हमेशा से रही है. लेकिन पूर्णिया की चादरों से वेस्टर्न लुक वाले जैकेट बनाकर उन्हें अमेरिकी बाजार तक पहुंचाना अपने आप में एक बड़ा मील का पत्थर है. इस स्टार्टअप की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही प्लेटफॉर्म और ट्रेनिंग मिले, तो बिहार के सुदूर जिलों की महिलाएं भी ग्लोबल फैशन मार्केट में अपनी पहचान बना सकती हैं.
About the Author
मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



