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Hydroponic Farming Technique: भीषण गर्मी, गिरते भूजल स्तर और बढ़ती सिंचाई लागत के बीच हाइड्रोपोनिक खेती किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही है. बिना मिट्टी और बेहद कम पानी में होने वाली इस आधुनिक खेती तकनीक से किसान शिमला मिर्च, चेरी टमाटर, लेट्यूस और स्ट्रॉबेरी जैसी महंगी सब्जियां उगाकर अच्छी कमाई कर सकते हैं. गोरखपुर विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में पानी बचाने वाली यह तकनीक खेती की नई दिशा साबित हो सकती है.

गोरखपुर: जेठ की तपती दुपहरी, आसमान से बरसती आग और लगातार नीचे गिरता भू जलस्तर ने देश के अन्नदाताओं और किसानों की चिंता को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. एक तरफ खेतों को सींचने के लिए पानी की भारी किल्लत है, तो दूसरी तरफ डीजल और बिजली के बढ़ते दामों ने पारंपरिक खेती की कमर तोड़कर रख दी है. जिसे देखते हुए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कृषि विभाग में तैनात प्रोफेसर आर.आर. सिंह किसानों को ‘हाइड्रोपोनिक तकनीक’ अपनाने की सलाह दे रहे हैं. उनका कहना है कि यह आधुनिक खेती आने वाले कल की सबसे बड़ी जरूरत बनने जा रही है, क्योंकि इसमें पानी का संकट न के बराबर है और मुनाफा बहुत ज्यादा.

क्या है हाइड्रोपोनिक खेती
हाइड्रोपोनिक एक ऐसी आधुनिक खेती तकनीक है जिसमें मिट्टी का इस्तेमाल नहीं किया जाता, पौधों को पाइप, ट्रे या कंटेनर में उगाया जाता है और उनकी जड़ों तक पानी के साथ जरूरी पोषक तत्व पहुंचाए जाते हैं. इस तकनीक में पानी बार-बार रिसाइकिल होता है, जिससे सामान्य खेती की तुलना में 80 से 90 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है.

कम जगह में ज्यादा उत्पादन
प्रोफेसर आर आर सिंह बताते हैं कि हाइड्रोपोनिक सिस्टम को पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस या शेडनेट हाउस में लगाया जा सकता है. इसमें NFT यानी न्यूट्रिएंट फिल्म टेक्नोलॉजी, डीप वाटर कल्चर और ड्रिप हाइड्रोपोनिक जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होता है. सेंसर आधारित सिस्टम पौधों के लिए जरूरी pH लेवल, तापमान और पोषक तत्वों को कंट्रोल करता है. इससे पौधों की ग्रोथ तेजी से होती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है.

इन महंगी सब्जियों की खेती से होगा फायदा
हाइड्रोपोनिक तकनीक से शिमला मिर्च, लेट्यूस, चेरी टमाटर, ब्रोकली, खीरा, स्ट्रॉबेरी, रंगीन कैप्सिकम और विदेशी पत्तेदार सब्जियों की खेती आसानी से की जा सकती है. बाजार में इन सब्जियों की कीमत सामान्य सब्जियों की तुलना में कई गुना अधिक होती है. होटल, रेस्टोरेंट और बड़े शहरों में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है.

इस तकनीक में खेतों की बार-बार सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती, ऑटोमेटिक मोटर और पाइपलाइन सिस्टम के जरिए सीमित पानी में खेती हो जाती है. इससे डीजल और बिजली का खर्च कम होता है. साथ ही कीटनाशकों का उपयोग भी कम करना पड़ता है, जिससे उत्पादन अधिक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनता है.

युवाओं के लिए बन सकता है स्टार्टअप मॉडल
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि, हाइड्रोपोनिक खेती गांवों में युवाओं के लिए नया स्टार्टअप मॉडल बन सकती है. कम जमीन और सीमित संसाधनों में भी किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं. तेजी से बदलते मौसम और पानी संकट के दौर में यह तकनीक खेती की नई दिशा मानी जा रही है.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें

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