इस मुद्दे पर डॉक्टर रिद्धि पांडे ने जानकारी देते हुए बताया कि कई मेडिकल स्टडी में ब्लड ग्रुप और कुछ विशेष प्रकार के कैंसर के बीच संबंध देखने को मिले हैं. हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि केवल ब्लड ग्रुप के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति को कैंसर होगा ही होगा.
पेट के कैंसर देखने को मिले अघिक
डॉ. रिद्धि पांडे ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि मेडिकल जर्नल्स और कैंसर संस्थानों में हुई कई केस स्टडी में यह पाया गया कि कुछ ब्लड ग्रुप्स में गैस्ट्रिक कैंसर यानी पेट के कैंसर और पैंक्रियाटिक कैंसर का खतरा अपेक्षाकृत ज्यादा देखा गया. रिसर्च के दौरान यह सामने आया कि O ब्लड ग्रुप वाले लोगों में ऐसे कैंसर के मामले कम पाए गए, जबकि A और AB ब्लड ग्रुप वाले लोगों में इन बीमारियों की संभावना अधिक देखी गई.
उन्होंने बताया कि विशेष रूप से ब्लड ग्रुप A वाले मरीजों में कुछ प्रकार के कैंसर की प्रवृत्ति ज्यादा देखने को मिली. वहीं, AB ब्लड ग्रुप वाले लोगों में भी कैंसर के मामलों की संख्या अपेाकृत अधिक दर्ज की गई. हालांकि यह केवल एक मेडिकल ऑब्जर्वेशन है, इसे अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता.
ब्लड ग्रुप को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं
डॉक्टर ने कहा कि ब्लड ग्रुप केवल एक संभावित फैक्टर हो सकता है, लेकिन कैंसर होने के पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार होते हैं. डॉ. पांडे ने स्पष्ट किया कि अभी तक ऐसी कोई फाइनल स्टडी सामने नहीं आई है, जो यह साबित कर सके कि किसी विशेष ब्लड ग्रुप के कारण ही कैंसर होता है.
उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति लगातार धूम्रपान करता है, शराब पीता है, खराब खानपान अपनाता है या तनाव में रहता है, तो उसे कैंसर ही नहीं बल्कि कई अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए केवल ब्लड ग्रुप को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा.
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की है जरूरत
डॉ. रिद्धि पांडे ने कहा कि कैंसर से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली सबसे जरूरी है. संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और मानसिक तनाव से दूरी शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करती है. उन्होंने कहा कि आजकल कम उम्र में भी कैंसर के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं. इसका बड़ा कारण बदलती जीवनशैली, फास्ट फूड, प्रदूषण, तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी माना जा रहा है, ऐसे में हर व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है.
ऐसे में समय पर इलाज ही है सबसे बड़ा हथियार
डॉक्टरों की सलाह है कि यदि परिवार में पहले किसी को कैंसर रहा हो या शरीर में लंबे समय तक कोई असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत जांच करानी चाहिए. समय पर पहचान होने पर कैंसर का इलाज काफी हद तक संभव हो जाता है. विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि ब्लड ग्रुप चाहे कोई भी हो, नियमित हेल्थ चेकअप और सही जीवनशैली अपनाना सबसे जरूरी है. कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए जागरूकता और समय पर इलाज ही सबसे बड़ा हथियार है.
फिलहाल, मेडिकल साइंस इस विषय पर लगातार रिसर्च कर रही है. आने वाले समय में ब्लड ग्रुप और कैंसर के संबंध को लेकर और स्पष्ट जानकारी सामने आ सकती है, लेकिन अभी यह कहना गलत होगा कि किसी एक ब्लड ग्रुप के लोगों को कैंसर होना तय है.
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