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नीट यूजी 2026 पेपरलीक में अब तक के खुलासे के बाद आशंका है कि एनटीए के स्ट्रांग रूम से विशेषज्ञ पैनल के आरोपी सदस्यों ने प्रश्नपत्र की मोबाइल पर फोटो खींची या फिर फोटोकॉपी बाहर ले गए। सीबीआई ने पेपर लीक मामले में पैनल से जुड़े दो प्रोफेसर को गिरफ्तार किया है।

जांच से यह तो साफ है कि एनटीए का स्टाफ परीक्षा की सुचिता बनाए रखने में नाकाम रहे। वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक, नीट-यूजी 2026 शेड्यूल की तैयारी जनवरी के आखिरी हफ्ते में शुरू हो गई थी। आवेदन के बाद 3 मई को परीक्षा की तिथि घोषित हुई। फरवरी के आखिर में प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। जबकि 15 से 20 अप्रैल तक प्रिंटिंग प्रेस का काम भी पूरा हो चुका था। क्योंकि, नीट तैयारी का प्रोसेस ढाई से तीन महीने का होता है। इसमें प्रश्नपत्र बैंक तैयार करने से लेकर प्रश्नपत्र के अलग-अलग सेट के लिए प्रश्नों का चयन और 13 भारतीय भाषाओं में प्रश्न पत्र का ट्रांसलेशन, प्रिंटिंग प्रेस से परीक्षा केंद्र के आसपास के बैंकों में सुरक्षित रखने का काम होता है।

एनटीए नियमों के तहत ऐसे तैयार होता है प्रश्नपत्र

एनटीए के चयनित विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के अलग-अलग पैनल बनते हैं। इसमें विषयों की जरूरत के हिसाब से पुराने और नए विशेषज्ञों को शामिल किया जाता है। हालांकि, इन विशेषज्ञों पर आगे कई स्तर पर अन्य पैनल जांच करते हैं ताकि कोई गड़बड़ी न हो। इसकी निगरानी एनटीए व परीक्षा से जुड़े अधिकारियों की होती है।

एनटीए के पास अपना प्रश्नपत्र का पूरा बैंक होता है, जिसमें पुराने प्रश्न होते हैं। सबसे पहले, पहला पैनल प्रश्न पत्र बैंक से हजार से ढाई हजार तक नए और पुराने प्रश्नों को मिलाकर शॉर्ट लिस्ट करते हैं। एक अन्य पैनल समिति उन प्रश्नों को जांचती हैं।

एक अन्य विषय विशेषज्ञ समिति उस सेट के प्रश्नों, उनके उत्तर व भाषा को जांचती है। क्योंकि हिंदी व अंग्रेजी के साथ 13 भारतीय भाषाओं में अनुवाद किए जाते हैं। एक अन्य पैनल के विशेषज्ञ अंतिम रूप से देने से पहले दोबारा जांच करते हैं। यह सब एनटीए व परीक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की गहन निगरानी में होता है।

प्रश्न पत्र तैयार करने वाले कमरों या उस एरिया में किसी के पास कोई इलेक्ट्रॉनिक आइटम, मोबाइल, लैपटॉप, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ, कागज, पेन जैसा कुछ नहीं होता है। यह नियम अधिकारियों, कर्मियों से लेकर पैनल से जुड़े सभी विशेषज्ञों पर भी लागू होता है। इस एरिया में खाली हाथ गहन जांच के बाद भेजा जाता है। किसी के पास कोई कागज, पेन या पेंसिल भी नहीं होती है।

प्रश्नपत्र के सेट को अंतिम रूप देने के बाद ही प्रिंटिंग व ट्रांसलेशन का काम शुरू होता है। इसके साथ परिवहन के माध्यम से परीक्षा केंद्रों के आसपास के समझौते के तहत तय बैंक के लॉकर में रखा जाता है। प्रश्न पत्र बनाने में एक से डेढ़ महीने का समय लगता है। जबकि परीक्षा से 15 दिन पहले सब काम पूरा हो जाता है।

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