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-नेतृत्व का अनोखा संदेश- खुद बदले डीएम, अधिकारियों और जनता से भी बदलाव की अपील
-ऊर्जा संरक्षण को जीवनशैली बनाने पर जोर, कार शेयरिंग और सार्वजनिक परिवहन अपनाने की सलाह
-निरीक्षण के दौरान स्वच्छता, व्यवस्था और भोजन गुणवत्ता पर सख्ती, जिम्मेदार प्रशासन की झलक

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। ऊर्जा संरक्षण और जिम्मेदार संसाधन उपयोग को लेकर प्रशासनिक स्तर पर एक प्रेरक उदाहरण पेश करते हुए जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मॉंदड़ शुक्रवार को सरकारी वाहन के स्थान पर बाइक से कलेक्ट्रेट पहुंचे। उनकी यह पहल देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा नागरिकों से किए गए ईंधन संरक्षण के आह्वान से प्रेरित रही। जिलाधिकारी की इस कार्यशैली ने प्रशासनिक नेतृत्व को जनभागीदारी से जोडऩे का मजबूत संदेश दिया। जिलाधिकारी ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती खपत केवल आर्थिक चुनौती नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण और भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईंधन संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं, बल्कि इसे जनआंदोलन का रूप देना होगा। इसी उद्देश्य से उन्होंने स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बाइक से कलेक्ट्रेट पहुंचकर अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को जागरूक करने का प्रयास किया। कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद जिलाधिकारी ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ विशेष संवाद आयोजित किया, जिसमें उन्होंने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलावों के माध्यम से ईंधन बचत के उपाय अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि जहां संभव हो सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें, कार शेयरिंग को बढ़ावा दें तथा छोटी दूरी के लिए दोपहिया वाहन या साइकिल का प्रयोग करें। उनका कहना था कि यदि प्रशासनिक स्तर से शुरुआत होगी तो समाज में सकारात्मक बदलाव स्वत: दिखाई देगा।

जिलाधिकारी की कार्यशैली का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि उन्होंने केवल संदेश देने तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि व्यवहारिक उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने अनावश्यक सरकारी वाहन उपयोग कम करने, यात्रा कार्यक्रमों के बेहतर समन्वय और ऊर्जा दक्ष प्रशासनिक प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया। अधिकारियों ने भी उनकी इस पहल को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि जब शीर्ष नेतृत्व स्वयं बदलाव की शुरुआत करता है तो उसका प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखाई देता है। इस अवसर पर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित महात्मा गांधी सभागार में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। जिलाधिकारी ने मीडिया के माध्यम से जनपदवासियों से अपील करते हुए कहा कि ईंधन बचत केवल आर्थिक बचत नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण में योगदान है। उन्होंने नागरिकों से बेवजह यात्रा से बचने, वाहन का सीमित उपयोग करने तथा ऊर्जा संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि प्रदूषण नियंत्रण, ट्रैफिक दबाव में कमी और बेहतर पर्यावरण संरक्षण भी संभव होगा।

प्रशासनिक सक्रियता को आगे बढ़ाते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक एवं अन्य अधिकारियों के साथ कलेक्ट्रेट और विकास भवन परिसर का निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्यालय व्यवस्थाओं, साफ-सफाई और जनसुविधाओं का जायजा लिया। विकास भवन परिसर स्थित कैंटीन की स्वच्छता व्यवस्था की विशेष रूप से जांच की गई। जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी ने स्वयं भोजन कर उसकी गुणवत्ता और शुद्धता की परख की। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कैंटीन संचालकों को निर्देश दिए कि स्वच्छता और खाद्य गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी परिसरों में आने वाले नागरिकों और कर्मचारियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। नियमित निरीक्षण के माध्यम से व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखा जाएगा।

जिलाधिकारी की यह पहल केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही का उदाहरण बनकर सामने आई। ईंधन संरक्षण जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषय को व्यक्तिगत आचरण से जोड़ते हुए उन्होंने यह संदेश दिया कि प्रशासनिक अधिकारी यदि स्वयं अनुशासन और जिम्मेदारी का पालन करें तो समाज में जागरूकता स्वत: बढ़ती है। जनपद के अधिकारियों, कर्मचारियों और मीडिया प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी व्यवहारिक कार्यशैली आमजन को प्रेरित करती है और प्रशासन तथा जनता के बीच विश्वास मजबूत करती है। गाजियाबाद प्रशासन द्वारा ईंधन संरक्षण को लेकर शुरू की गई यह पहल आने वाले समय में जनसहभागिता आधारित अभियान का रूप ले सकती है, जिससे ऊर्जा बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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